महिलाओं के प्रति भेदभाव मिटाने के उपाय लिखिए।

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‘महिलाओं के विरुद्ध भेदभाव’ शब्द से आशय लिंग के आधार पर किया गया ऐसा कोई भेद, अपवर्जन या प्रतिबन्ध है जिसका प्रभाव अथवा उद्देश्य महिलाओं द्वारा उनकी वैवाहिक प्रास्थिति पर बिना विचार किये हुये राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, सिविल अथवा किसी अन्य क्षेत्र में पुरुष एवं स्त्री की समानता के आधार पर महिलाओं द्वारा समान स्तर पर उपभोग अथवा प्रयोग करने से वंचित करती है।

अभिसमय द्वारा अनुच्छेद 1 के अन्तर्गत महिलाओं के विरुद्ध भेदभाव शब्द की परिभाषा लिंग के आधार पर किये गये किसी भी ऐसे भेदभाव अपवर्जन (exclution) अथवा प्रतिबंध के रूप में की गयी है जिसका प्रभाव अथवा उद्देश्य महिलाओं द्वारा अपनी वैवाहिक प्रास्थिति से बिना कोई सम्बन्ध रखे हुए पुरुष एवं महिलाओं की समानता, मानव अधिकारों एवं राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, सिविल (नागरिक) अथवा किसी अन्य क्षेत्र में मूलभूत स्वतंत्रताओं के आधार पर मान्यता उपभोग अथवा प्रयोग का ह्रास अथवा अकृत करना है।

भाग 3 के अन्तर्गत अभिसमय ने कई क्षेत्रों का प्रतिपादन किया है जहाँ राज्य पक्षकारों के लिए महिलाओं के विरुद्ध भेदभाव दूर करने के लिए कहा गया है जिसमें अग्रलिखित सम्मिलित है

1. शिक्षा (Education) — अनुच्छेद 10 के अन्तर्गत अभिसमय उपबन्ध करता है कि अपने कैरियर और शैक्षिक पथ-प्रदर्शन में महिलाओं के लिए वे ही शर्तें उपबन्धित की जायेंगी जैसी कि पुरुषों के लिए उपबन्धित हैं। वे ग्रामीण तथा नगर क्षेत्रों में सभी प्रकार के शैक्षिक स्थापनों में उपाधियाँ प्राप्त करने के लिए अध्ययन की एक-सी सुविधा प्राप्त करेंगी यह समानता विद्यालय के पहले सामान्य, तकनीकी, व्यावसायिक तथा उच्चतर तकनीकी शिक्षा तथा सभी प्रकार शैक्षिक प्रशिक्षण में प्राप्त करेंगी। महिलाओं का पाठ्यक्रम समान होगा, वही परीक्षा होगी और समान स्तर की योग्यताओं से युक्त शैक्षणिक कर्मचारीवृन्द होगा, विद्यालय परिसर होगा तथा एक प्रकार की सामग्री होगी जैसी कि पुरुषों की है। छात्रवृत्ति और अन्य अध्ययन अनुदान से सम्बन्धित मामलों में पुरुषों के समान महिलाओं को सुविधा दी जायेगी। अनवरत शिक्षा कार्यक्रम में पहुँच के समान अवसर उन्हें प्राप्त होंगे। खेल तथा व्यायाम शिक्षा (Physical education) में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए उन्हें समान अवसर प्राप्त होंगे।

2. नियोजन (Employment)-अभिसमय ने अनुच्छेद 11 के अन्तर्गत उपबन्ध किया है कि राज्य पक्षकार महिलाओं के विरुद्ध भेदभाव दूर करने के लिए सभी प्रकार की उचित व्यवस्था करेंगे। नियोजन के क्षेत्र में महिलाओं के अधिकार पुरुषों के समान होंगे- (क) विशेष रूप से काम करने का अधिकार, (ख) समान नियोजन के अवसर के अधिकार, (ग) व्यवसाय तथा नियोजन चुनने का स्वतन्त्र अधिकार, (घ) समान पारिश्रमिक पाने का अधिकार जिसमें समान मूल्य के कार्य के सम्बन्ध में समान लाभ और व्यवहार सम्मिलित हैं और कार्य की विशेषता का मूल्यांकन करने में समानता का व्यवहार है, (ङ) सामाजिक सुरक्षा का अधिकार विशेष रूप से सेवा निवृत्ति, बेरोजगारी, बीमा, अवैधता वृद्धावस्था तथा कार्य करने की अन्य असमर्थता तथा भुगतान की गयी छुट्टी का अधिकार, (च) कार्यकारी दशाओं में स्वास्थ्य और सुरक्षा की रक्षा का अधिकार; यहाँ विवाह अथवा प्रसव के आधार पर महिलाओं के विरुद्ध कोई भेदभाव न होगा।

3. स्वास्थ्य सुरक्षा (Health Care) अभिसमय का अनुच्छेद 12 उपलब्ध करता है कि राज्य पक्षकार स्वास्थ्य सुरक्षा सेवाओं की प्राप्ति में जिसमें परिवार नियोजन भी सम्मिलित है, महिलाओं के विरुद्ध भेदभाव दूर करने की कार्यवाही करेंगे।

4. आर्थिक तथा सामाजिक जीवन (Economic & Social Life) अभिसमय का अनुच्छेद 13 यह उपलब्ध करता है कि आर्थिक तथा सामाजिक जीवन के अन्य क्षेत्रों में महिलाओं के विरुद्ध भेदभाव दूर किया जायेगा। उन्हें वही अधिकार मिलेंगे जो पुरुषों को प्राप्त हैं विशेष रूप से निम्नलिखित मामलों में प्राप्त होंगे–(क) पारिवारिक लाभ के अधिकार में, (ख) बैंक ऋण बन्धक तथा वित्तीय जमा के अन्य रूप में, (ग) मनोरंजन कार्यवाही, खेल तथा सांस्कृतिक जीव के अन्य पहलुओं में।

5. ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएँ (Women in Rural Areas) अनुच्छेद 14 ने उपबन्ध किया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के विरुद्ध भेदभाव दूर करें राज्य पक्षकारों से अपेक्षित है कि वे ऐसी महिलाओं को अधिकार सुनिश्चित करे—(क) सभी स्तरों पर विकास योजनाऔर उसके अनुपालन में भागीदारी करना, (ख) पर्याप्त स्वास्थ्य सुरक्षा प्राप्त करना तथा परिवार नियोजन की सूचना प्राप्त करना राज्य प्राप्त करना तथा सेवा प्राप्त करना, (ग) सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम से सीधे लाभ प्राप्त

करना, (घ) औपचारिक तथा अनौपचारिक प्रशिक्षण तथा शिक्षा प्राप्त करना जिसमें साक्षरता अभियान तथा अन्य बातों के साथ सभी सामुदायिक लाभ तथा विस्तार की सेवाएँ जो उनकी तकनीकी प्रवीणता को बढ़ाने के लिए हों, (इ) स्वयं-सहायता समूहों तथा सहकारिताओं का गठन करना है जो नियोजन तथा स्वतः नियोजन द्वारा समान पहुँच प्राप्त करते हों, (च) सभी सामुदायिक कार्यवाहियों में भाग लेना, (छ) कृषिक जमा और ऋणों में पहुँच प्राप्त करना, बाजारी सुविधायें, उचित प्रौद्योगिकी तथा भूमि तथा कृषि सुधार में तथा भूमि पुनर्वास योजनाओं में समान उपचार, तथा (ज) पर्याप्त आजीविका दशाओं का उपभोग करना।

6. विधि के समक्ष समानता (Equality before Law)— अभिसमय का अनुच्छेद 15 उपबन्ध करता है कि राज्य पक्षकार विधि के समक्ष पुरुषों के समक्ष पुरुषों के साथ महिलाओं को समानता प्रदान करेंगे। महिलाएँ संविदायें पूर्ण करने में और सम्पत्ति का प्रशासन करने में समान अधिकार

रखेंगी और राज्य पक्षकार न्यायालयों तथा न्यायाधिकारणों में तथा प्रक्रिया की समान अवस्थाओं में उनसे समान व्यवहार करेंगी। राज्य पक्षकार सहमत होंगे कि सभी संविदायें तथा सभी अन्य प्रकार की व्यक्तिगत लिखतें जो विधिक प्रभाव रखती हैं जो महिलाओं की विधिक क्षमता को नियन्त्रित करने के लिए निर्देशित हैं, शून्य समझी जायेंगी। राज्य पक्षकार महिलाओं और पुरुषों को गतिमान होने के लिए समान अधिकार प्रदान करेंगे और वे अपना निवास और अधिवास चुनने की स्वतंत्रता रखेंगे।

7. विवाह तथा परिवार सम्बन्ध (Marriage and Family Relations) अनुच्छेद 16 उपबन्ध करता है कि राज्य पक्षकार विवाह तथा परिवार सम्बन्धी सभी मामलों में महिलाओं के विरुद्ध भेदभाव दूर करने के सभी उपाय करेंगे महिलाओं को निम्नलिखित अधिकार प्रदान किये जायेंगे—(क) विवाह करने का समान अधिकार, (ख) विवाह तथा विवाह के विघटन में समान अधिकार तथा दायित्व, (ग) अपने बच्चों सम्बन्धी मामलों में माता-पिता के रूप में समान अधिकार तथा दायित्व सभी मामलों में

बच्चों का हित सर्वोपरि होगा, (घ) अपने बच्चों की संख्या और बीच की अवधि निश्चित करने में स्त्री पुरुष की स्वतंत्र तथा सूचना, शिक्षा तथा अपने अधिकारों का प्रयोग करने के लिए समर्थ बनाने के लिए उन्हें समान रूप से प्राप्त होगा, (ङ) बच्चों की संरक्षता, न्यासधारिता तथा दत्तकग्रहण के संबंध में समान अधिकार तथा दायित्व (च) पति तथा पत्नी के रूप में समान व्यक्तिगत अधिकार जिसमें पारिवारिक नाम चुनने का अधिकार, व्यवसाय तथा आजीविका चुनने का समान अधिकार सम्मिलित है।

अभिसमय के राज्य पक्षकारों ने महिलाओं के विरुद्ध भेदभाव की इसके सभी रूपों में भर्त्सना की है और हर संभव साधन द्वारा महिलाओं के विरुद्ध भेदभाव को समाप्त करने के लिए सहमत हुए हैं तथा इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि

1. पुरुष एवं महिलाओं की समानता के सिद्धान्त को अपने राष्ट्रीय संविधानों अथवा अन्य उपयुक्त साधनों व विधायनों में शामिल करेंगे, यदि यह सिद्धान्त उनमें पहले से शामिल न हो।

2. महिलाओं के विरुद्ध सभी प्रकार के भेदभाव का विरोध करते हुए सभी व उपयुक्त विधायी एवं अन्य उपायों को अंगीकार करेंगे। 3. पुरुषों के साथ समान अधिकार व आधार पर महिलाओं के अधिकारों के विधिक संरक्षण की स्थापना करेंगे। 4. महिलाओं के विरुद्ध भेदभाव के किसी कार्य अथवा अभ्यास में संलग्न होने से विरत रहेंगे। 5. किसी व्यक्ति, संगठन अथवा उद्यम द्वारा महिलाओं के विरुद्ध भेदभाव को समाप्त करने के लिए सभी उपयुक्त उपाय अपनायेंगे। ऐसे सभी राष्ट्रीय दण्ड प्रावधानों का निरसन करेंगे जो महिलाओं के विरुद्ध भेदभाव किये जाने में सहायक होते हैं।

मेरा नाम संध्या गुप्ता है, मैं इस ब्लॉग का लेखक और सह-संस्थापक हूं। मेरा उद्देश्य इस ब्लॉग के माध्यम से आपको कई विषयों की जानकारी देना है। मुझे ज्ञान बांटना अच्छा लगता है। अगर आप मुझसे कुछ सीख सकते हैं, तो मुझे बहुत खुशी होगी।

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