संपोषित विकास की अवधारणा पर एक लेख लिखिए।

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संधारणीय विकास अथवा (Sustainable Development)

संपोषित विकास संधारणीय विकास का अर्थ (Meaning of Sustainable Development)- आधुनिक विकास गतिविधियों ने संसाधनों के साथ-साथ पर्यावरण को भी बुरी तरह से प्रभावित किया है। घटते प्राकृतिक संसाधन एवं बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण के कारण संपोषित विकास (Sustainable development) की धारणा का जन्म हुआ है। संधारणीय विकास को संपोषित

विकास, निर्वहनीय विकास, सतत् विकास एवं धारणीय विकास के नामों से जाना जाता है। विकास की इस नई धारणा का उद्भव वर्ष 1992 में ब्राजील की राजधानी रियो डी जेनेरियो में आयोजित पृथ्वी सम्मेलन में हुआ। इस सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण एवं विकास सम्मेलन के लिए अनेक दस्तावेज तैयार किये गये, जिन्होंने स्पष्ट किया कि पर्यावरण एवं विकास के बीच गहरा सम्बन्ध है।

आधुनिक मनुष्य के लालची स्वभाव के चलते प्राकृतिक संसाधनों जैसे, जल, खनिज पदार्थ, जीवाश्म ईंधन, वन मृदा आदि का अत्यन्त ही शोषण हुआ है, परिणामस्वरूप आज जल की समस्या, जीवाश्म ईंधनों के घटते भण्डार, मृदा की उपजाऊ क्षमता का ह्रास, वैश्विक तपन, जैव-विविधता का क्षरण आदि ने वैश्विक स्तर पर विकराल समस्या का रूप धारण कर लिया है, जिससे निजात पाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है और यह संपोषित विकास के द्वारा ही संभव है।

संधारणीय विकास अथवा टिकाऊ विकास (Sustainable Development),

विकास की वह अवधारणा है जिसमें पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना, भावी पीढ़ी को ध्यान में रखकर वर्तमान विकास दर जारी रखना। पर्यावरण तथा विकास पर विश्व आयोग (1983) के अन्तर्गत बर्टलैण्ड कमीशन द्वारा जारी रिपोर्ट (1987) के अनुसार, “आने वाली पीढ़ी की अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता से समझौता किये बिना वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु विकास ही सतत् विकास है।”

संपोषित विकास के अन्तर्गत संसाधनों का सीमित उपयोग होता है और साथ ही उसके संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाता है जिससे आने वाली पीढ़ियाँ भी लाभान्वित हो सकें। इसके अतिरिक्त विकास की प्रक्रिया इस प्रकार की होती है, जिससे पर्यावरण अव्यस्थित न हो और उसके संरक्षण को बढ़ावा मिले।

मेरा नाम संध्या गुप्ता है, मैं इस ब्लॉग का लेखक और सह-संस्थापक हूं। मेरा उद्देश्य इस ब्लॉग के माध्यम से आपको कई विषयों की जानकारी देना है। मुझे ज्ञान बांटना अच्छा लगता है। अगर आप मुझसे कुछ सीख सकते हैं, तो मुझे बहुत खुशी होगी।

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