पर्यावरण के प्रति मानव की नैतिक जिम्मेदारी पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

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मानव भू-पटल के विभिन्न वातावरणों में उन क्षेत्रों के वातावरण के साथ अपना समायोजन स्थापित कर जीवनयापन करता है। मानव ने आधुनिक तकनीक के बल पर अनेक स्थानों के वातावरण में अत्यधिक परिवर्तन कर वहाँ पर्यावरण असन्तुलन की स्थितियाँ उत्पन्न कर दी हैं। मानव की इन क्रियाओं में निम्न उल्लेखनीय हैं

1. मानव ने वनों की अन्धाधुन्ध व अविवेकपूर्ण ढंग से कटाई कर उनका सफाया कर दिया है।

2. मानव द्वारा वृहद स्तर पर स्वचालित वाहनों का उपयोग किय जाता है, औद्योगिक इकाइयों का संचालन किया जाता है तथा जीवाश्म ईंधन का उपयोग किया जाता है, जिससे पर्यावरण में प्रदूषित गैसों की मात्रा में क्रमशः बढ़ोत्तरी होती जा रही है।

3. मानव बड़ी मात्रा में कूड़ा-करकट व ठोस अपशिष्ट व वाहित अपशिष्ट को बाहर फेंकता है जो शुद्ध जलीय राशियों में मिलकर उसे प्रदूषित करता है।

4. कृषि क्षेत्रों में कीटनाशक व कवकनाशक रसायनों का प्रयोग तेजी से बढ़ा है, जिसके कारण कृषि उत्पादों में तथा मिट्टी में रसायनों का एक भाग मिश्रित हो जाता है।

5. मानव स्वभावतः शाकारी जीव की श्रेणी में आता है, लेकिन मानव समुदाय का एक मांसाहारी भी है जिससे प्राकृतिक भोजन श्रृंखला पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

मानव की उक्त सभी गतिविधियों से पर्यावरण प्रदूषण की समस्या गम्भीर होती जा रही है। वास्तव में इस समस्या को गम्भीर बनाने में मानव की व्यक्तिगत रूप से अलग-अलग तरह की भूमिका रहती है। पर्यावरण प्रदूषण के नियन्त्रण में यदि प्रत्येक व्यक्ति अलग-अलग तरह से योगदान करें तो पर्यावरण प्रदूषण की समस्या को काफी सीमा तक कम किया जा सकता है। इस सन्दर्भ में अग्रलिखित उपाय उल्लेखनीय हैं

1. प्रत्येक व्यक्ति को निजी वाहनों का कम से कम उपयोग करना चाहिये तथा निजी वाहन के स्थान पर सार्वजनिक वाहनों में यात्रा करने को प्राथमिकता देनी चाहिये।

2. प्रत्येक व्यक्ति को वृक्षों के महत्व को प्राथमिकता देनी चाहिये। प्रत्येक व्यक्ति यदि हर तीन महीने में एक वृक्ष का रोपण कर उसे सुरक्षा प्रदान करने की जिम्मेदारी ले, साथ ही वृक्षों को न तो काटे और न ही दूसरों को काटने दे, तो ऐसा करने से भू-पटल पर वर्गों का क्षेत्रफल बढ़ जायेगा तथा इससे पारिस्थितिकीय असन्तुलन की समस्या पर नियन्त्रण किया जा सकता है।

3. प्रत्येक व्यक्ति को अपने यहाँ स्थापित शौचालयों के लिये घरों में ही भू-गर्भिक चैम्बरों का निर्माण करा देना चाहिये, इससे सीवेज प्रवाह की मात्रा में कमी होगी तथा जल प्रदूषण को काफी कम किया जा सकता है।

4. घरों के कूड़े-करकट को सुनिश्चित डलावघरों में डालना चाहिये।

5. पॉलीथीन का प्रयोग नहीं करना चाहिये तथा पॉलीथीन के स्थान पर कागज अथवा जूट से निर्मित बैगों को वरीयता दी जानी चाहिये।

6. कृषकों को कृषि वैज्ञानिकों के दिशा-निर्देशों का अनुपालन करते हुए कीटनाशक तथा कवकनाशक रसायनों का रसायन अपने खेतों में करना चाहिये।

7. कृषि फार्मों में फसलों का हेरफेर (Crop Rotation) करते रहना चाहिये, इससे भूमि की उर्वरता कायम रहती है।

8. प्रत्येक मानव के मस्तिष्क में अपने पर्यावरण के संरक्षण के प्रति जागरूकता एवं मित्रवत् व्यवहार भावना जाग्रत होनी चाहिये।

मेरा नाम संध्या गुप्ता है, मैं इस ब्लॉग का लेखक और सह-संस्थापक हूं। मेरा उद्देश्य इस ब्लॉग के माध्यम से आपको कई विषयों की जानकारी देना है। मुझे ज्ञान बांटना अच्छा लगता है। अगर आप मुझसे कुछ सीख सकते हैं, तो मुझे बहुत खुशी होगी।

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