वनोन्मूलन (या निर्वनीकरण) एवं उसके प्रभाव या वनों का हास पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखो।

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वनोन्मूलन निर्वनीकरण एवं उसके प्रभाव (Deforestation and Their Effects)

बढ़ती हुई आबादी, शहरीकरण एवं औद्योगीकरण के कारण वन आधारित प्राकृतिक सम्पदाओं का उपयोग लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी प्रकार से पशुचारण, वनों की कटाई आदि के कारण पृथ्वी के विशाल भू-भागों से वनों का प्रतिशत लगातार कम होता जा रहा है।

वनोन्मूलन के कारण वनोन्मूलन के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं 1. औद्योगिक विकास, 2. शहरीकरण, 3. ईंधन के रूप में लकड़ी का उपयोग, 4. जलाशय एवं बिजली परियोजना, 5. सड़क एवं रेलवे लाइन निर्माण, 6. लकड़ी की कालाबाजारी आदि ।

वनोन्मूलन के प्रभाव-

आज हमारे देश में लकड़ी की वार्षिक स्खपत 40 मिलियन घन मीटर से अधिक है, इस आवश्यकता की पूर्ति के लिए देश में लगभग 1,50.000 हेक्टेयर भूमि पर प्रतिवर्ष वन लगाना आवश्यक होगा। दुर्भाग्यवश ऐसा नहीं किया जा रहा है, जिसके फलस्वरूप हमारे देश में वनों का प्रतिशत लगातार घटता जा रहा है। टीप-विस्तृत वर्णन हेतु प्रश्न क्रमांक 4 के वन विनाश से उत्पन्न समस्याओं के वर्णन का अवलोकन करें।

(i) वर्तमान वन क्षेत्र में सघन वृक्षारोपण

(ii) अवक्षरित भूमि पर वनों का विकास करना। (iii) सड़क एवं रेलवे लाइन किनारे पर वृक्षारोपण

(iv) जलावन के रूप में लकड़ी के उपयोग को हतोत्साहित करना । (v) सामाजिक वानिकी एवं कृषि वानिकी को बढ़ावा देना।

(vi) स्कूल, शासकीय भवनों एवं कृषि औद्योगिक इकाइयों के चारों ओर वृक्षारोपण। हमारी सरकार निर्वनीकरण को रोकने के लिए एक कार्य योजना पर कार्य कर रही है। इसके तहत 91 मिलियन हेक्टेयर भूमि पर वन लगाने की योजना है। एक अनुमान के अनुसार प्रति हेक्टेयर भूमि पर 10,000 पेड़ लगाने के लिए लगभग ₹3-4 हजार खर्च करने पड़ेंगे।

मेरा नाम संध्या गुप्ता है, मैं इस ब्लॉग का लेखक और सह-संस्थापक हूं। मेरा उद्देश्य इस ब्लॉग के माध्यम से आपको कई विषयों की जानकारी देना है। मुझे ज्ञान बांटना अच्छा लगता है। अगर आप मुझसे कुछ सीख सकते हैं, तो मुझे बहुत खुशी होगी।

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