पर्यावरण प्रदूषण क्या है ? प्रमुख पर्यावरण प्रदूषकों का संक्षिप्त विवरण दीजिए।

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वातावरण का एक निश्चित संगठन होता है तथा उसमें सभी प्रकार के जैविक एवं अजैविक पदार्थ एक निश्चित अनुपात में पाये जाते हैं। ऐसे वातावरण को सन्तुलित वातावरण कहते हैं। कभी-कभी वातावरण में एक या अनेकों घटकों की प्रतिशत मात्रा किसी कारणवश या तो कम हो जाती है अथवा बढ़ जाती है अथवा वातावरण में अन्य हानिकारक घटकों का प्रवेश हो जाता है जिसके कारण पर्यावरण प्रदूषित हो जाता है। यह प्रदूषित पर्यावरण जीवधारियों के लिए अत्यधिक हानिकारक होता है। इसे ही पर्यावरण प्रदूषण कहते हैं।

इस प्रकार, “पर्यावरण प्रदूषण, वायु, जल एवं स्थल के भौतिक, रासायनिक एवं जैविक विशेषताओं में होने वाला वह अवांछनीय परिवर्तन है जो मानव एवं उसके लिए लाभकारी तथा अन्य जन्तुओं, पेड़-पौधों, औद्योगिक तथा दूसरे कच्चे माल इत्यादि को किसी भी रूप में हानि पहुँचाता है।”

दूसरे शब्दों में, “पर्यावरण के जैविक एवं अजैविक घटकों में होने वाला किसी भी प्रकार का परिवर्तन पर्यावरण प्रदूषण कहलाता है।”

प्रदूषक पदार्थ (Pollutants) प्रदूषण के लिए उत्तरदायी पदार्थों को प्रदूषक (Pollutant) कहते हैं। प्रदूषक वे पदार्थ होते हैं जिन्हें मनुष्य बनाता है, उपयोग करता है तथा अन्त में शेष सामग्री को जैवमण्डल या पर्यावरण में फेंक देता है।

पर्यावरण को प्रदूषित करने वाले प्रमुख पदार्थ निम्नानुसार होते हैं (1) जमा हुए पदार्थ उदाहरण- धुआँ, धूल, गिट, घर आदि।

(2) रासायनिक पदार्थ उदाहरण- डिटर्जेन्ट्स, आर्सीन्स, हाइड्रोजन फ्लुओराइड्स, फॉस्जीन आदि ।

(3) धातुएँ- उदाहरण-लोहा, पारा, जिंक, सीसा (

4) गैसे-कार्बन मोनो-ऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, अमोनिया, क्लोरीन, फ्लोरीन आदि।

(5) उर्वरक – उदाहरण- यूरिया, पोटाश एवं अन्य उर्वरक ।

(6) वाहित मल (Sewage) शहरी गन्दा पानी

(7) पेस्टीसाइड्स- उदाहरण-D.D.T. कवकनाशी, कीटनाशी ।

(8) ध्वनि। (9) ऊष्मा ।

(10) रेडियोएक्टिव पदार्थ।

प्रदूषकों के प्रकार (Types of Pollutants)

इसके अन्तर्गत विभिन्न प्रकार के प्रदूषणों (pollutions) का वर्गीकरण किया गया है। जिस प्रकार का पर्यावरण (Environment) प्रदूषण होता है उसी को आधार मानकर वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, मृदा प्रदूषण, समुद्री प्रदूषण पाये जाते हैं। प्रदूषकों (pollutants) में विभिन्न प्रकार के प्रदूषक होते हैं; जैसे-SO, प्रदूषण, CO प्रदूषण, फ्लोराइड प्रदूषण, धुन्ध प्रदूषण, Ph प्रदूषण, Hg प्रदूषण, ठोस सपमार्जक प्रदूषण, रेडियोएक्टिव प्रदूषण तथा शोर या ध्वनि प्रदूषण आदि ।

(1) अक्षयकारी प्रदूषक (Non-degradable Pollutants) कुछ पदार्थ तथा विषैले पदार्थ, जैसे-ऐल्युमीनियम (AI), मरक्यूरिक लवण, लम्बी श्रृंखला वाले फेनोलिक्स तथा DDT आदि या तो अपघटित (degrade) नहीं होते हैं अथवा इनका निम्नीकरण (degra-dation) प्रकृति में बहुत धीमी गति से होता है। प्राकृतिक पारिस्थितिक तन्त्र में इनका चक्रीयकरण नहीं होता है। यह न केवल एकत्रित होते हैं अपितु गमन करके जीव वैज्ञानिक रूप से भोजन (food) में विस्तृत रूप में खाद्य शृंखला तथा जैव-भू रासायनिक चक्रों द्वारा फैल जाते हैं।

(2) जैव निम्नीकरण या क्षयकारी योग्य प्रदूषक (Biodegradable Pollutants) यह घरेलू अपमार्जक पदार्थ होते हैं जिनका विघटन प्रकृति में आसानी से हो जाता है। जब यह पदार्थ एकत्रित हो जाते हैं तब अनेक समस्याएँ उत्पन्न करते हैं।

प्रदूषण के प्रकार (Types of Pollution)

प्रदूषण निम्न प्रकार के होते हैं-

(1) वायु प्रदूषण (Air Pollution) |

(2) जल प्रदूषण (Water Pollution)। (3) ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution) |

(4) मृदा प्रदूषण (Soil Pollution ) ।

(5) रेडियोएक्टिव प्रदूषण (Radioactive Pollution )

(6) तापीय प्रदूषण (Thermal Pollution) – विश्व की जनसंख्या में वृद्धि तथा औद्योगिकीकरण के कारण आज पेड़-पौधों का अधिकाधिक उपयोग होता जा रहा है तथा उद्योगों के द्वारा बहुत सा प्रदूषणयुक्त पानी नदी, तालाबों एवं नालियों में छोड़ दिया जाता है जिसके कारण यह जल जिस जलकाय में पहुँचता है उसका तापमान बढ़ जाता है। इसी प्रकार उद्योगों के द्वारा प्रकृति में बहुत सी ग्रीन हाउस गैसें छोड़ी जाती हैं, जिसके कारण पृथ्वी के वातावरण के तापक्रम में वृद्धि होती रहती है, जो कि अत्यधिक हानिकारक है।

(7) समुद्री प्रदूषण (Marine Pollution) यह भी जल प्रदूषण का ही एक भाग है। शहरों, औद्योगिक इकाइयों के द्वारा छोड़ा गया प्रदूषित जल ही नदियों के माध्यम से समुद्र में पहुँचकर समुद्री जल का प्रदूषण करता है जिसके कारण बहुत से समुद्री जीव लुप्त होते रहे हैं। तेल टैंकरों के दुर्घटनाग्रस्त होने एवं समुद्री क्षेत्रों में स्थित तेलकुओं में होने वाली दुर्घटनाओं के कारण अत्यधिक मात्रा में तेल समुद्री जल में पहुँचकर समुद्री प्रदूषण उत्पन्न करता है।

पर्यावरणीय प्रदूषण के नियन्त्रण के उपाय (Controlling Measures of Environmental Pollution )

पर्यावरणीय प्रदूषण की समस्या निम्नलिखित दो विधियाँ द्वारा हल की जा सकती है –

(1) प्रत्येक स्तर के मनुष्यों को शिक्षा देनी चाहिए कि वे प्राकृतिक स्रोतों (natural resources) का संरक्षण (Conservation) करें। वास्तव में मनुष्य भी अपने सुख के लिए अनेकानेक वस्तुओं का उपभोग करता है तथा उसके उपयोग में न आने वाले पदार्थों को वातावरण में फेंक देता है जो प्रदूषण (pollution) के प्रमुख कारण होते हैं, क्योंकि इन्हीं के कारण प्राकृतिक सन्तुलन बिगड़ जाता है। यदि मनुष्य प्राकृतिक स्रोतों का ठीक प्रकार से उपयोग करें तो यह असन्तुलन कभी नहीं होगा।

इस प्रकार प्राकृतिक स्रोतों को सन्तुलित बनाये रखने की शिक्षा देना तथा पालन करना प्रदूषण को रोक सकता है। नगरों एवं गाँवों में इस प्रकार शिक्षाप्रद बातों के प्रसार के लिए जगह-जगह संरक्षण क्लब, प्रदूषण रोको सप्ताह, प्रदूषणों पर सुन्दर भाषणों का आयोजन करना चाहिए। विद्यार्थियों को स्कूल तथा कॉलेज स्तर पर प्रदूषण सम्बन्धी पूर्ण ज्ञान कराना चाहिए ताकि वे नगरों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में हो रहे प्रदूषण को रोक सकें। (2) वातावरणीय प्रदूषण से उत्पन्न संकट के निवारण के लिए साधन एवं विधियाँ जुटानी चाहिए। प्रदूषक (Pollutant) स्रोतों को बहुत कम कर देना चाहिए। प्रदूषण उत्पन्न करने वाले स्थानी के चारों ओर नियन्त्रण स्टेशनों व उपकरणों को स्थापित करना चाहिए। फैक्ट्रियों से निकले हानिकारक

अपशिष्ट पदार्थों को उपचारित करने के लिए Treatment plants लगाने चाहिए तथा इस विधि को कानूनी रूप से लागू करना चाहिए। इसी कारण प्रवाहित मल (Sewage recycling) का प्रबना अनिवार्य कर देना चाहिए।

मेरा नाम संध्या गुप्ता है, मैं इस ब्लॉग का लेखक और सह-संस्थापक हूं। मेरा उद्देश्य इस ब्लॉग के माध्यम से आपको कई विषयों की जानकारी देना है। मुझे ज्ञान बांटना अच्छा लगता है। अगर आप मुझसे कुछ सीख सकते हैं, तो मुझे बहुत खुशी होगी।

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