पारिस्थितिक पिरामिड क्या है ? पारिस्थितिक तंत्र में पाये जाने वाले विभिन्न पिरामिडों का वर्णन कीजिए।

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पारिस्थितिक तंत्र की आहार शृंखला में प्राथमिक उत्पादकों से लेकर सर्वोच्च माँसाहारियों तक कई पोषण रीतियाँ होती हैं। प्रत्येक खाद्य रीति आहार श्रृंखला का एक चरण होता है तथा विभिन्न चरण परस्पर सम्बद्ध होते हैं, जिसमें पारिस्थितिक तंत्र की सुनिश्चित पोषण व कार्यात्मक संरचना बनती है। उत्तरोत्तर पोषण रीतियों के परस्पर सम्बन्धों को जीव संख्या, जैवभार (biomass) तथा ऊर्जा प्रवाह के आधार पर व्यक्त किया जा सकता है। इस सम्बन्धी को ऐसे चित्रो द्वारा दिखाया जा सकता है जिन्हें पारिस्थितिक पिरामिड (ecological pyramid) कहते हैं। पिरामिड के पाद पर प्राथमिक उत्पादक तथा शिखर पर सर्वोच्च माँसाहारी होते हैं और शाकाहारी व मध्यवर्ती माँसाहारी उत्तरोत्तर पोषण रीतियाँ बनाते हैं। पारिस्थितिक पिरामिड प्रत्येक पोषण रीति में जीवों की संख्या, जैव भार तथा ऊर्जा प्रवाह की दर के आधार पर बनाया जा सकता है।

विभिन्न पोषण रीतियों में किसी इकाई क्षेत्र में किसी इकाई समय पर उपस्थित जीवों की संख्या के आधार पर बनाया गया पिरामिड जीव संख्या का पिरामिड कहलाता है। अधिकांश जीव संख्या के पिरामिड सीधे होते हैं, क्योंकि उसमें उत्पादकों की संख्या अधिक होती है। उदाहरण- (1) तालाब का पारिस्थितिक पिरामिड, (2) घास के मैदान का पारिस्थितिक पिरामिड, (3) खेत का पारिस्थितिक पिरामिड ।

उपरोक्त सभी पारिस्थितिक पिरामिडों में उत्पादकों की संख्या बहुत उत्तरोत्तर पोषण रीतियों में उपभोक्ताओं की संख्या कम होती जाती है। अधिक होती है तथा

एक वृक्ष के पारिस्थितिक तंत्र में जीव संख्या का पिरामिड उल्टा होता है।

C 3 = सर्वोच्च उपभोक्ता ।

(2) जीवभार का पिरामिड (Pyramid of Biomass)

यह पिरामिड पारिस्थितिक तंत्र की विभिन्न पोषण रीतियों के जीवभार अथवा जैवमात्रा (आर्द्र अथवा शुष्क भार) पर आधारित सम्बन्धों को निरूपित करता है। यदि व्यक्तिगत उत्पादकों का जीवभार अधिक हो तथा उत्तरोत्तर उपभोक्ता रीतियों का जीवभार कम होता चला जाए तो परिणामस्वरूप जीवभार पिरामिड खड़ा होता है जैसा कि चित्र में दिखाया गया है। घासस्थल तथा शस्य खेल का जीवभार पिरामिड भी सीधा होता है। इसे निरूपित करने के लिए भी प्रस्तुत किया जा सकता है।

कभी-कभी जीवभार पिरामिड उल्टा होता है। ऐसा तब होता है जब प्राथमिक उत्पादक स्तर के जीव छोटे साइज के हों तथा उत्तरोत्तर उपभोक्ता रीतियों के जीवों का साइज बढ़ता चला जाए जैसाकि तालाब पारिस्थितिक तंत्र में होता है। उल्टा जीव भार पिरामिड द्वारा निरूपित किया जा सकता है।

(3) ऊर्जा का पिरामिड (Pyramid of Energy)

प्रत्येक प्रकार के पारिस्थितिक तंत्र में कई खाद्य शृंखलाएँ हो सकती हैं तथा इनमें ऊर्जा का प्रवाह कई चरणों में होता है तथा वह उत्पादकों, उपभोक्ताओं से होते हुए अन्त में सर्वोच्च माँसाहारियों तक पहुँचता है। प्राथमिक उत्पादकों से लेकर सर्वोच्च माँसाहारियों में ऊर्जा के प्रवाह के दौरान प्रत्येक खाद्य स्तर पर ऊर्जा में क्रमशः कमी होती जाती है, क्योंकि प्रत्येक पोषण स्तर पर कुछ ऊर्जा उपयोग हो जाती है तथा कुछ ऊर्जा की हानि हो जाती है। अतः ऊर्जा का पिरामिड बनाने पर वह सदैव सीधा प्राप्त होता है। ऊर्जा का पिरामिड सभी पारिस्थितिक तंत्रों के लिए हमेशा सीधा ही बनता है।

मेरा नाम संध्या गुप्ता है, मैं इस ब्लॉग का लेखक और सह-संस्थापक हूं। मेरा उद्देश्य इस ब्लॉग के माध्यम से आपको कई विषयों की जानकारी देना है। मुझे ज्ञान बांटना अच्छा लगता है। अगर आप मुझसे कुछ सीख सकते हैं, तो मुझे बहुत खुशी होगी।

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