प्राकृतिक संसाधन किसे कहते हैं ? प्राकृतिक संसाधनों के वर्गीकरण को विस्तारपूर्वक समझाइये।

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प्राकृतिक संसाधन (Natural Resources)

मानव जीवन के लिए आवश्यक वे समस्त संसाधन जिनसे उसकी भौतिक एवं सांस्कृतिक आवश्यकताओं की पूर्ति होती है, संसाधन कहलाते हैं, चूंकि ये संसाधन यह सभी प्रकृति को विरासत में मिले हैं तथा पर्यावरण के मुख्य घटक हैं, अतः इन्हें प्राकृतिक संसाधन कहते हैं। उदाहरण सौर ऊर्जा, वायु, जल, भूमि, वनस्पति, प्रकाश, पृथ्वी का ताप, जीवाश्म ईंधन, खनिज, जन्तु तथा सूक्ष्म जीव आदि शामिल हैं।

कोई भी वस्तु, जो मनुष्य के लिए उपयोगी होती है, संसाधन है। दूसरे शब्दों में, संसाधन वह वस्तु या तत्व होता है जिसका उपयोग करके मनुष्य भी अपनी आवश्यकताओं एवं महत्वाकांक्षाओं की तुष्टि करता है।

प्राकृतिक संसाधनों का वर्गीकरण (Classification of Natural Resources)

प्राकृतिक संसाधनों का वर्गीकरण विभिन्न आधारों पर कई प्रकार से किया जाता जाता है। (A) प्रथम वर्गीकरण-उत्पत्ति आधारित

(1) जैविक-इनमें वे सभी संसाधन शामिल हैं, जिनमें जीवन होता है, जैसे-पेड़-पौधे, वनस्पति, पशु-पक्षी, जीवाश्म, मछली एवं अन्य जलीय जीव ।

(2) अजैविक-इन संसाधनों में मिट्टी, जल, वायु, ऊर्जा, प्रकाश तथा खनिज आते हैं। तेल, कोयला, प्राकृतिक गैस, पत्थर, जलवायु को भी अजैविक संसाधनों में सम्मिलित किया जाता है।


(B) पुनः पूर्ति के आधार पर वर्गीकरण (Classification based on Re-usable) डेस्मेन (1976) ने पुनः पूर्ति के आधार पर प्राकृतिक संसाधनों को चार उप-प्रकारों में वर्गीकृत किया है. है (1) अक्षय संसाधन (Inexhaustible resources)-इनके अन्तर्गत वे नैसर्गिक संसाधन

आते हैं जो उपयोग करने या न करने पर भी सदा सुलभ रहते हैं। उदाहरण के लिए, सूर्य, प्रकाश, जल, वायु आदि। (2) नवीनीकरण अयोग्य (Non-renewable resources)-इनका जनन उस गति से नहीं

हो पाता है जिस गति से इनका उपभोग किया जाता है। जब एक बार ये संसाधन समाप्त हो जाते हैं तो उनका स्थानापन्न नहीं हो पाता है। उदाहरण-वन्य जीवन (wildlife)

(3) नवीनीकरण योग्य संसाधन (Renewable resources) इनके अन्तर्गत वे सभी जीवित वस्तुएँ आती हैं जिनमें पुनर्जनन एवं वृद्धि की क्षमता होती है। जब तक इनके उपयोग की दर इनके जनन एवं पुनर्जनन की दर से कम रहती है और जब तक इनका पर्यावरण अनुकूल बना रहता है तब तक इनका प्रतिस्थापन (replacement) स्वयं होता रहता है। उदाहरण-पेड़-पौधे । (4) पुनर्चक्रणीय संसाधन (Recyclable resources)—ये विशिष्ट प्रकार के अनवीकरणीय संसाधन होते हैं तथा उपयोग करने के बाद से पूर्णतया नष्ट नहीं हो पाते हैं वरन् इनका बार-बार विभिन्न रूपों में उपयोग किया जा सकता है। उदाहरण-धातुएँ।

(C) पारिस्थितिकीय वर्गीकरण (Ecological Classification) ओवेन (Owen, 1971) ने प्राकृतिक संसाधनों को दो प्रमुख वर्गों में वर्गीकृत किया है- (i) अक्षयशील (inexhaustible), तथा (ii) क्षयशील (exhaustible)। उनका वर्गीकरण संसाधनों की गुणवत्ता परिवर्तनशीलता तथा पुनः प्रयोग पर आधारित है। उन्होंने संसाधनों के संरक्षण तथा परिरक्षण के भी उपाय सुझाये हैं।

मेरा नाम संध्या गुप्ता है, मैं इस ब्लॉग का लेखक और सह-संस्थापक हूं। मेरा उद्देश्य इस ब्लॉग के माध्यम से आपको कई विषयों की जानकारी देना है। मुझे ज्ञान बांटना अच्छा लगता है। अगर आप मुझसे कुछ सीख सकते हैं, तो मुझे बहुत खुशी होगी।

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