UPS क्या है और कैसे काम करता है

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क्या आपको पता है की UPS क्या है (What’s UPS in Hindi)? क्यूँ इसका इस्तमाल किया जाता है और ये कितने प्रकार के हैं? यदि आप एक Pc person हो तब तो UPS के विषय में शायद आपको पहले से पता हो क्यूंकि इसका इस्तमाल सबसे ज्यादा Computer systems में ही किया जाता है.

लेकिन यदि पूरी जानकारी न भी हो तो घबराने की जरुरत नहीं है क्यूंकि आज के इस article में हम UPS क्या है के सन्धर्व में जानकारी प्रदान करने की कोशिश करेंगे. हमारे दैनिक काम के दोरान हम बहुत से समय में energy minimize की स्तिथि से गुजरते हैं. वैसे घर के दुसरे electric home equipment जैसे की Fan, Mild, TV, Refrigerator तो इससे ज्यादा प्रभावित नहीं होते हैं क्यूंकि उन्हें steady energy provide की जरुरत नहीं होती है.

लेकिन अगर आपके पास में pc gadget मेह्जुद है तब तो उसे ठीक तरह से इस्तमाल करने के लिए हमेशा निरन्तर Energy की जरुरत होती है ऐसे में अगर Energy Minimize हो जाये तब हमारे knowledge loss होने का खतरा भी होता है. बस इसी समस्या को दूर करने के लिए हमें एक ऐसी software चाहिए जो की हमें interruption loose energy provide प्रदान कर सके. इसी प्रकार के software को UPS कहा जाता है.

यह UPS या uninterruptible energy provide (UPS) एक ऐसा software होता है जो की इसके साथ attached gadgets को निरंतर energy provide करता रहता है. अगर में आसान भाषा में कहूँ तब यह एक surge bar जिसके साथ एक battery connected होता है.

अगर energy minimize भी हो जाये तब भी battery उस जरुरत के energy को provide करता है जब तक की आपका major energy repair न हो जाये या उस battery का पूरा fee इस्तमाल न हो जाये. यदि आप UPS के विषय में और भी जानना चाहते हैं तब आपको ये publish UPS क्या होता है पूरी तरह से आगे पढनी चाहिए क्यूंकि मैंने UPS के साथ साथ और भी अन्य सम्बंधित जानकारी प्रदान करने की कोशिश करी है.

उम्मीद है आपको मेरी ये कोशिश पसंद आये, तो फिर बिना देरी किये चलिए शुरू करते हैं और UPS क्या काम करता है और इसके कितने प्रकार है के विषय में पूरी जानकारी प्राप्त करते हैं.

यूपीएस क्या है (What’s UPS in Hindi)

यूपीएस एक ऐसा विद्युत उपकरण है जो इनपुट पावर स्रोत या मुख्य शक्ति विफल होने पर लोड को आपातकालीन शक्ति प्रदान करता है।
UPS Kya Hai Hindi

UPS हमेशा load को निरंतर energy provide करती रहती है चाहे major provide OFF हो या फिर ON. UPS का major utility है की वो Primary energy provide के absence में हमें energy provide करता है जिससे हमारे software को कोई भी factor न हो. UPS की supply of power होती हैं batteries.

किसी भी UPS की again up time (जिसका मतलब है की कितने समय तक UPS load को major energy provide के absense में energy प्रदान कर सकता है) उसमें इस्तमाल हुए batteries की kind और amount पर निर्भर करता है.

UPS का Complete shape क्या है?

UPS का Complete shape होता है Uninterrupted Energy Provide. इसका ये मतलब है की हम UPS का इस्तमाल एक selection energy supply के हिसाब से कर सकते हैं जो की निरंतर हमें interruption loose energy provide load को प्रदान कर सकती है.

UPS की क्या जरुरत है

जैसे जैसे Electronics और Pc primarily based gadgets में building हुई, वैसे वैसे delicate electronics apparatus जैसे की Non-public Computer systems, Tremendous Computer systems, Knowledge Processors, Virtual Controllers इत्यादि के इस्तेमाल में भी बढ़ोतरी हुई.

ऐसे gadgets को interruption loose energy provide की जरूरत होती है, क्यूंकि ये gadgets knowledge को deal with करने के लिए Reminiscences और Processors का इस्तमाल करते हैं. जैसे की हम जानते हैं की ये gadgets बहुत ही delicate होते हैं corrupted energy provide को लेकर.

उदहारण के लिए, अगर आप किसी non-public pc को at once Flip Off कर देते हैं उसके energy plug को निकाल कर, बिना उसे Close Down किये तब ऐसा करने से आप knowledge loss कर सकते हैं और कभी कभी तो आपके pc का working gadget भी corrupt हो सकता है.

इन्ही समस्यों को हल करने के लिए home तोर पे और Business तोर पे भी Instrument और Knowledge Protection के लिए UPS का इस्तमाल किया जाता है.

UPS के कुछ महत्वपूर्ण Portions in Hindi

यदि हम UPS के महत्वपूर्ण portions की बात करूँ तब इसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित portions होते हैं, जिनके विषय में हम आगे चलकर main points में जानेंगे :
•  Rectifier (Battery Charger)
•  Static ByPass or Transfer or Contactor
•  Battery
•  Inverter

Rectifier:
जैसा कि हम सभी जानते हैं कि rectifier का मुख्यt फंक्शबन AC को DC में कन्वiर्ट करना हैं। इसे बैटरी चार्ज करने के लिए इस्तेeमाल किया जाता हैं और यह इन्वशर्टर सर्किट में फिड़ होता हैं। इसका आउटपूट, लोड की आवश्यकता पर निर्भर करता है।

इस rectifier का मुख्य दो major purposes हैं. पहला ये की इसका इस्तमाल batteries को fee करने के लिए होता है, जिससे की batteries हमेशा right kind waft voltage में रहे.

जहाँ कुछ producers batteries को simply trickle fee करते हैं उन्हें right kind waft voltage में रखने के लिए. वहीँ कुछ producers और ज्यादा refined way (3 steps) का इस्तमाल करते हैं जिसमें पहले speedy fee होता है 90% तक, उसके पश्चात gradual fee होता है 100% तक, और after all एक flip off charger एक बार ये batteries totally charged हो गए तब.

वहीँ इसका जो दूसरा काम है वो ये की rectifier का इस्तमाल incoming energy को A/C से D/C में convert करने के लिए किया जाता है.

Static Bypass:
प्राय सभी on-line UPS में एक inner static bypass circuit मेह्जुद रहता है जो की एक first defensive position के तरह काम करता है जब भी आप कभी UPS gadget के भीतर failure revel in करें तब.

जब भी कभी gadget failure होता है तब ये static bypass robotically circuit को बंद कर देता है और आ रहे incoming energy को rectifier, batteries और inverter की और divert करता है जिससे ये load को software grade energy (unconditioned) at once कर सके.

माना की ये conditioned energy नहीं है, लेकिन फिर भी ये आपके methods को ठीक तरीके से functioning करने में सहायक होता है यदि कभी UPS की inner elements fail हो जाते हैं तब.

Battery:
किसी भी UPS Gadget का center होता है ये Battery. ये Batteries का इस्तमाल मुख्य रूप से power retailer करने के लिए किया जाता है. यादो कभी भविष्य में मुख्य energy fail हो जाता है तब इन batteries का उपयोग किया जाता है. ये batteries में मुख्य रूप से Lead और acid का इस्तमाल होता है. और ये acids में हमेशा reactions चलते रहते हैं.

इन batteries की भी आयु होती है और कुछ वर्षों के बाद इन्हें भी बदलना पड़ता है. Batteries का age Four से 6 सालों तक का होता है. इन batteries का ख़ास ख्याल रखना पड़ता है और इसमें समय समय पर Distilled पानी भरना होता है जिससे इसमें चल रहे response को होने में मदद मिलती है.

Inverter:
ये Inverter UPS Gadget का ultimate और major हिस्सा होता है. यह rectifier के procedure के ठीक उल्टा कार्य करता है. मतलब की ये लोड के उपयोग के लिए आनेवाले DC provide को AC में convert करता हैं. ये D.C buss से D/C को settle for करता है और उसे आगे rectifier और battery को provide करता है.

यदि कभी Energy Failure होता है तब rectifier और present प्रदान नहीं कर सकता है D/C buss को जिससे केवल पुरे gadget को energy केवल batteries ही प्रदान करता है. ये batteries D/C buss को तब तक energy प्रदान करते रहते हैं जब तक की वो fritter away न हो जायें.

एक बार batteries fritter away हो जायें तब gadget jeopardy के स्थिति में पहुँच जाता है और exterior energy supply की तलाश में रहता है. जहाँ पर बहार से energy generator के मदद से प्रदान किया जाता है.

Inverter का output साइनवेव होता हैं. यह D.C. को consistent frequency और amplitude के A.C में convert करता हैं.

Primary Energy Provide की क्या समस्यें होती हैं :

Mains energy provide में बहुत प्रकार के interruptions अलग अलग shape में होते रहते हैं. ये fluctuations हमारे delicate digital apparatus और knowledge को नुकशान पहुंचा सकते हैं. इसलिए सबसे अच्छा resolution है की UPS का इस्तमाल किया जाये. चलिए कुछ ऐसे ही corruptions के विषय में जानते हैं :

1. Voltage Fluctuations: Mains energy provide में, अक्सर voltage बढती है या फिर कमती है, rated voltage की तुलना में. उदहारण के लिए हमारे घरों में voltage fluctuates होती है 210 Volts से 240 volts तक.

ये fluctuations को देखने के लिए हम virtual voltmeter का इस्तमाल कर सकते हैं. जितनी ज्यादा ये fluctuations होगी ये उतनी ही ज्यादा harm हमारे gadgets को कर सकती हैं.

2. Temporary Impulses: Alternating provide की authentic sine wave बड़ी आसानी से disturb हो सकती है किसी भी कारण के लिए जिसके चलते amplitude में उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है. इन्ही disturbances को Temporary Impulses भी कहा जाता है.

Amplitude की fast build up को spike कहते हैं और fast lower को notch कहा जाता है.

3. Voltage Surges: जब हम एक heavy load को energy provide के साथ attach करते हैं, तब पुरे gadget का voltage कुछ समय के लिए build up या lower हो सकता है. इसी diversifications को Voltage Surges कहा जाता है.

4. Noise: Alternating Sine Wave में distortion जो की कम समय के लिए आता है उसे Noise कहा जाता है. इनके उत्पत्ति का मुख्य कारण है Radiऔर TV transmission, या deficient grounding भी. Noise knowledge और apparatus को harm पहुंचा सकती है.

5. Frequency Variation: अगर load में instantaneously trade दिखाई पड़ा तब इससे provide’s frequency में variation पैदा हो सकती है जिससे ये knowledge को नुकसान पहुंचा सकती है.

6. Black Outs: किसी भी कारण के लिए अगर mains energy provide में अगर Fast failure दिखाई पड़ा तब इसे black outs कहा जाता है. ये equipments के लिए सही नहीं है.

7. Brown Outs: Energy के overloading होने के कारण अगर Deliberate energy cuts होते हैं तब उसे brown outs कहा जाता है.

UPS के Varieties : –

बहुत से प्रकार के design का इस्तमाल किया जाता है UPS methods को put in force करने के लिए, जहाँ सभी की distinct efficiency traits होती हैं. जो maximum commonplace design approaches को apply किया जाता है वो हैं :

  • Standby
  • Line Interactive
  • Standby on-line hybrid
  • Standby-Ferro
  • Double Conversion On-Line
  • Delta Conversion On-Line

The Standby UPS
ये Standby UPS सबसे commonplace kind होती है जिसे की Non-public Computer systems में इस्तमाल किया जाता है. इस UPS में switch transfer को set किया गया है filtered AC enter को number one energy supply (cast line trail) के हिसाब से चुनने के लिए, और ये transfer करेंगे battery/inverter को एक backup supply के हिसाब से अगर number one supply fail हो जाता है तब.

अगर ऐसा होता है तब switch transfer को perform होना होगा और load को battery/inverter backup के ऊपर transfer करना होगा. ये inverter केवल तभी get started होगा जब की energy fail होता है, इसलिए इसका नाम है “Standby.”

The Line Interactive UPS
ये Line Interactive UPS भी बहुत ही commonplace design है जिसे की small trade, Internet, और departmental servers में इस्तमाल किया जाता है. इसके design के अनुसार, the battery-to-AC energy converter (inverter) को हमेशा UPS के output के साथ attached होना होता है.

जब enter की AC energy commonplace होती है तब ये inverter को opposite order में perform करा रहा होता है जिससे की वो fee हो रहा होता है.

जब enter energy fails हो जाता है, तब switch transfer खुल जाता है और energy battery से UPS output की और float होने लगती हैं. यहाँ पर inverter हमेशा on रहती है और output के साथ attached रहती है, इसलिए ये design further filtering प्रदान करती है और Standby UPS की तुलना में कम switching transients पैदा करती है. इसके अलावा ये voltage law भी ठीक तरह से करती है.

Standby On-Line Hybrid
इन Standby On-Line Hybrid को “online” UPS भी कहा जाता है. इस प्रकार के UPS का इस्तमाल 10kVA के निचे किया जाता है. इसमें भी standby DC tDC converter battery को switched on जब major AC energy failure को locate किया जाता है, ठीक वैसे ही जैसे की standby UPS में होता है.

इसमें battery charger भी बहुत छोटी होती है जैसे की standby UPS में होता है. DC combiner में capacitors होने के कारण, UPS AC energy failure के दोरान कोई भी switch time show off नहीं करती है. इस design का इस्तमाल कभी कभी एक further switch transfer के साथ भी किया जाता है जिससे की कोई भी malfunction या overload से इसे bypass किया जा सके.

The Standby-FerrUPS
एक समय था जब Standby-FerrUPS का इस्तमाल सबसे ज्यादा हुआ करता था 3-15kVA के vary में. इसकी design rely करती है एक particular saturating transformer पर जिसकी 3 windings (energy connections) होती है.

इसकी number one energy trail होती है AC enter से शुरू कर, switch transfer से लेकर, transformer से लेकर, और after all output तक. जब energy failure होती है, तब switch transfer खुल जाता है, और inverter output load को pick out करता है.

इन Standby-Ferrके design में, inverter standby mode में होता है, और ये energized होता है तब जब enter energy fail होता है और switch transfer खुल जाता है. इस transformer की particular ” Ferro-resonant” capacity होती है, जो की इसे restricted voltage law प्रदान करती है और output waveform को ” shaping” करती है.

जो isolation AC energy transients के कारण Ferrtransformer प्रदान करती है वो किसी भी to be had filter out से बेहतर होती है. भले ही ये एक standby UPS through design है, फिर भी ये Standby-Ferrबहुत ही ज्यादा warmth generate करता है क्यूंकि ये शुरुवात से ही inefficient है. इन UPS की design भी बाकि के तुलना में बहुत बड़ी और वजनदार होती है.

इन UPS का अब और इस्तमाल न होने का कारण यह है की ये essentially volatile हो सकते हैं जब एक trendy pc के energy provide load के हिसाब से अगर ये काम कर रहे हों तब.

सभी बड़े servers और routers “Energy Issue Corrected” energy provides का इस्तमाल करते हैं जो की एक unfavorable enter resistance प्रदान करती है कुछ frequency vary के ऊपर; जब इन्हें किसी prime और resonant impedance वाले Ferrtransformer के साथ coupled कर दिया जाये तब, ये spontaneous और destructive oscillations पैदा कर सकती है.

The Double Conversion On-Line UPS
ये बहुत ही commonplace kind का UPS है above 10kVA. ये Standby UPS के तरह है, लेकिन इसमें number one energy trail inverter होती है AC major के बदले में.

एक Double Conversion On-Line design, में enter AC के fail होने से switch transfer turn on नहीं होती है, क्यूँ की यहाँ पर enter AC number one supply नहीं है, बल्कि ये backup supply है. लेकिन ये online mode of operation तभी switch time display करती है जब energy जो की आता है number one battery charger/battery/inverter energy trail से fail हो जाता है.

ये तब होता है जब कोई भी block इस energy trail में fail हो जाता है. यहाँ पर inverter energy भी कुछ समय के लिए drop out हो जाता है, जिससे एक switch होता है, ये switch तब भी हो सकता है अगर inverter में unexpected load adjustments या inner keep watch over issues पैदा हो.

Double Conversion On-Line UPS methods भी switch time show off करती है, लेकिन अलग अलग stipulations में जो की standby और line-interactive UPS से काफी अलग है.

जहाँ एक Standby और Line Interactive UPS एक switch time तब show off करती है जब कोई a blackout happens हो, वहीँ एक double-conversion online UPS switch time show off करती है जब एक huge load step या inrush present हो.

दोनों battery charger और inverter whole load energy जो की design में float करते हैं उन्हें convert करते हैं, जिससे की lowered performance और warmth technology बढती है.

The Delta Conversion On-Line UPS
Delta Conversion On-Line UPS की design,एक नयी era है जिसके की ख़ास इसीलिए presented किया गया है ताकि ये Double Conversion On-Line design के problem को दूर कर सके और ये to be had होता है 5kVA से 1 MW की vary में.

Double Conversion On-Line design, के समान ही Delta Conversion On-Line UPS में भी हमेशा एक inverter होता है जो load voltage को provide करता है. लेकिन यहाँ पर further Delta Converter inverter output को energy give a contribution करता है.

लेकिन ऐसे stipulations जैसे की AC failure या disturbances, होने पर ये design Double Conversion On-Line के जैसे की conduct exihibit करती है.

एक आसान तरीके से अगर में आपको समझाओं तो इस UPS में power performance में सबसे ज्यादा ध्यान दिया जाता है. Delta Conversion era का मुख्य उद्देश्य है की ये power save करें.

ऐसा करने के लिए ये केवल beginning और finishing issues के distinction (delta) में ही power elevate करती हैं. Double Conversion On-Line UPS convert करती है battery के energy को और फिर opposite भी करती है वहीँ Delta Converter में elements of the facility को enter से output तक transfer करती है.

Kind Advantages Boundaries Our’s Findings
Standby Low value prime performance compact Makes use of battery all over brownouts Impractical over 2kVA Non-public workstations के लिए easiest price
Line Interactive Top reliability Top performance Excellent voltage conditioning Impractical over 5kVA ये बहुत ही widespread UPS kind in life क्यूंकि इसकी prime reliability perfect for rack or allotted servers और harsh energy environments
Standby On-Line Hybrid Very good voltage conditioning Low-efficiency Low-reliability Top value Impractical over 5kVA Line Interactive बेहतर reliability और an identical conditioning प्रदान करती है higher price में
Standby Ferro Very good voltage Conditioning Top reliability Low performance volatile together with some so much and turbines इसकी Restricted utility होती है क्यूंकि ये low-efficiency और instability problems होते हैं and N+ 1 On-Line design provides even higher reliability
Double Conversion On-Line Very good voltage conditioning ease of paralleling Low performance Pricey below 5kVA Neatly suited to N+ 1 designs
Delta Conversion On-Line Very good voltage conditioning Top performance Impractical below 5kVA Top performance होने के करें ये considerable life-cycle value को कम कर देता है huge installations में

UPS और Inverter में क्या अंतर है

वैसे देखा जाये तो UPS और Inverter में बहुत अंतर है इसलिए मैंने दोनों के अंतर को निचे आपके समझने के लिए अच्छे से विस्तार में समझाया है.

Technically, इन दों में क्या distinction है

Uninterruptible energy provide (UPS) जहाँ पर steady energy provide प्रदान करता है जब energy minimize होता है. वहीँ Inverter circuit केवल battery के DC present को AC में convert करता है और provide करता है.

Nearly, इन दों में क्या distinction है

तो चलिए जानते हैं की कैसे ये दोनों nearly अलग अलग है :-

1.  UPS: Uninterruptible energy provide (UPS) हमें energy प्रदान करती हैं जब energy minimize होता है. इसे मुख्य रूप से desktop computer systems में backup के हिसाब से इस्तमाल किया जाता है.

2.  Inverter: ये एक energy backup resolution है. इसकी overall unit में तीन part होते हैं the fees (जो की आपके घर को electrical energy प्रदान करती है), battery और Inverter circuit जो की DC battery present को electrical energy में बदलती है. इसे Basically इस्तमाल किया जाता है backup energy पुरे घर को provide करने के लिए.

3.  UPS का इस्तमाल मुख्य रूप से gadget के backup के हिसाब से किया जाता है. अगर आप अपने desktop pc को इससे attach करें तब अगर कुछ भी energy loss होता है तब बस 1 microsecond में ही backup energy get started हो जाता है.

4.  Inverter pc backup के लिए appropriate नहीं है क्यूंकि इसमें switching में extend होता है. जिससे pc crash हो सकता है जिससे knowledge loss होने क खतरा होता है. इसके अलवा इससे motherboard और onerous disk के लिए भी खतरा है.

5.  UPS केवल 10 से 20 mins के लिए backup प्रदान कर सकता है. क्यूंकि इसका The principle aim ही है की छोटे समय के backup प्रदान करना जिससे की ये techniques और knowledge को save कर सकता है. वहीँ Inverters का goal है की वो पुरे घर को energy backup प्रदान सके.

6.  Inverter में flat plate और tubular battery का इस्तमाल होता है electrical energy retailer करने के लिए. इसमें steady repairs की जरुरत होती है जैसे की distilled water को भरना common durations में.

Function UPS Inverter
कहाँ इस्तमाल होता है Desktop Pc को backup प्रदान करती है घर के दुसरे tools जैसे की TV Lovers lighting fixtures को energy प्रदान करती है
Transfer होने के लिए कितना समय लगता है Negligible Microsecond
Backup time 10 से 20 mins Three से Four घंटे battery पर निर्भर करता है
Repairs nmaintainence समय समय में पानी भरना होता है
कीमत 2000 से 6000 10000 से 40000 तक

UPS के क्या लाभ हैं :

–  Repairs of Energy – UPS का सबसे पहला और ख़ास लाभ यही है कि ये आपके pc में प्रवाहित होने वाली energy को नियंत्रित करता है.

–  Continuity of Operation – इसमें यह एक खास बात है की ये लगातार काम करता रहता है जिसका मतलब है की energy के minimize होने से भी ये निरंतर का करता रहता है और energy backup प्रदान करता है.

–  Surge Coverage – ये आपके कंप्यूटर को present fluctuation से होने वाली हर तरह की हानि से बचाता है. इसके लिए ये कंप्यूटर में आने जाने वाली विधुत को keep watch over करता है.

–  Line Interactive UPS – ये आपके कंप्यूटर को एक संतुलित (managed) विधुत को प्रवाहित करता है और present के चले जाने के बाद भी ये आपको इतना समय देता हाई कि आप अपने कार्य को save कर सकें. जिससे knowledge और software का loss नहीं होता है.

–  Emergency Energy Supply:- UPS emergency के समय में बहुत अच्छे Energy Supply की तरह कार्य करता है. जब Primary Energy off हो तो आप UPS/inverter के उपयोग से अपने घर के बिजली का इस्तमाल कर सकते है. इसलिए UPS एक बेहतरीन Emergency Energy Supply होता है|

–  NData Loss :-अचनाक कंप्यूटर Close Down होने से कंप्यूटर के Knowledge Loss होने के पुरे possibilities होते है | UPS के होने पर इस बात का डर दूर हो जाता है कि अगर Energy चले गयी तो Knowledge Loss हो जाएगा | UPS Mild चले जाने के बाद आसानी से कुछ समय तक energy supplyकरता है कि आप आसानी से अपने knowledge को save कर सकते हैं और कंप्यूटर को Close Down कर सके |

UPS के क्या हानि हैं :

–  Get started Up Price – अगर आप Standby UPS का इस्तेमाल करना चाहते हो तो ये आपको काफी महंगा पड़ता है. इसका मतलब है की शुरुवात में UPS की set up value थोड़ी ज्यादा होती है.

–  Infrastructure – Infrastructure के हिसाब से UPS का इस्तेमाल होता है. इसलिए जितनी बड़ी infrastructure है उतनी ही बड़ी और ज्यादा battery का इस्तमाल होता है.

–  Repairs Price – UPS की बैटरी बहुत समय के लिए काम नही करती और कुछ समय के बाद ख़राब हो जाती है जिसके बाद आपको इसकी पुरानी बैटरी को पूरी तरह से बदल कर एक नयी बैटरी का इस्तेमाल करना होता है. इसके साथ समय समय पर इस battery को repairs की भी जरुरत होती है.

Conclusion

जैसे की हमने जाना की UPS के बहुत से प्रकार हैं और उनके अलग अलग programs भी हैं. इसलिए ऐसा कोई sorts unmarried UPS की kind नहीं है जो की सभी programs के लिए perfect है.

इसलिए UPS के अलग अलग प्रकार और उनके utility के विषय में जानना बहुत जरुरी है. कहीं तभी जाकर ही हम अपने लिए सही UPS का चुनाव कर सकते हैं. UPS की हानी की तुलना में इसके लाभ बहुत ही ज्यादा है जो की इसे ख़ास बनाते हैं. Energy के selection supply के हिसाब से UPS बहुत ही अच्छा विकल्प है.

मुझे पूर्ण आशा है की मैंने आप लोगों को UPS क्या है (What’s UPS in Hindi)? के बारे में पूरी जानकारी दी और में आशा करता हूँ आप लोगों को UPS क्या होता है के बारे में समझ आ गया होगा.

मेरा आप सभी पाठकों से गुजारिस है की आप लोग भी इस जानकारी को अपने आस-पड़ोस, रिश्तेदारों, अपने मित्रों में Proportion करें, जिससे की हमारे बिच जागरूकता होगी और इससे सबको बहुत लाभ होगा. मुझे आप लोगों की सहयोग की आवश्यकता है जिससे मैं और भी नयी जानकारी आप लोगों तक पहुंचा सकूँ.

मेरा हमेशा से यही कोशिश रहा है की मैं हमेशा अपने readers या पाठकों का हर तरफ से हेल्प करूँ, यदि आप लोगों को किसी भी तरह की कोई भी doubt है तो आप मुझे बेझिजक पूछ सकते हैं. मैं जरुर उन Doubts का हल निकलने की कोशिश करूँगा.

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