परमाणु ऊर्जा

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संसार में कुछ ऐसी धातुएँ (यूरेनियम, थोरियम) हैं, जिनके परमाणु के केन्द्र (नाभिक) में महान शक्ति छिपी हुई होती है, जिसे परमाणु ऊर्जा कहते हैं। इस ऊर्जा को विद्युत की तरह प्रयोग किया जा सकता है।

परमाणु ऊर्जा का उत्पादन करने की दो विधियाँ-(i) विखण्डन (fission), और (ii) संगलन (fusion) है। विखण्डन क्रिया में एक बड़ा परमाणु टूटकर दो छोटे परमाणुओं में विभाजित हो जाता है। संगलन क्रिया में दो हल्के परमाणु परस्पर गलकर एक बड़े परमाणु में परिवर्तित हो जाते हैं। यूरेनियम धातु के परमाणु के विखण्डन की खोज 1930 से 1949 के बीच में हुई थी। परमाणु के विखण्डन से महान शक्ति निकलती है, जिसे नाभिकीय ऊर्जा भी कहते हैं। एक किग्रा यूरेनियम के विखण्डन में उतनी ऊर्जा उत्पन्न होती है जितनी 25 लाख किग्रा. कोयले के दहन (जलने) से होती है।

परमाणु ऊर्जा के ईंघन—विखण्डन (fussion) क्रिया से परमाणु ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए (1) यूरेनियम (Uranium), तथा (ii) थोरियम (Thorium) का प्रयोग किया जाता है। यद्यपि संगलन (fusion) की क्रिया में हल्के तत्वों, जैसे-हाइड्रोजन का प्रयोग किया जाता है और उनका भण्डार अक्षय है, फिर भी उनके संगलन के लिए संयंत्रों की आवश्यकता होती है। उनके निर्माण की लागत बहुत ऊँची होती है। संगलन क्रिया अभी परीक्षण (experiment) अवस्था में है। अतः यूरेनियम और थोरियम के विखण्डन द्वारा ही परमाणु ऊर्जा का उत्पादन किया जा रहा है। यूरेनियम की भी एक विशेष किस्म (Unrg) इसके लिए प्रयुक्त होती है। प्लूटोनियम (PU239) से भी नाभिकीय ऊर्जा प्राप्त होती है। यूरेनियम की अत्यन्त लघु मात्रा तो लगभग 100 खनिजों में होती है, परन्तु प्रयोजनीय मात्रा में यूरेनियम की प्राप्ति दो कच्ची धातुओं (ores) से होती है—(i) पिचब्लैंड (Pitchblende), और (ii) कारनोटाइट (Carnotite)। पिचब्लैंड कच्ची धातु से प्राप्त यूरेनियम एक ऑक्साइड यूनेनिनाइट (Unaninite) होता है, परमाणु ऊर्जा उत्पादन के लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण है।

भारतवर्ष के प्रमुख परमाणु ऊर्जा के केन्द्र (Main Centres of Atomic Energy in India)

(1) तारापुर केन्द्र-यह अमेरिका के सहयोग से निर्मित भारत का प्रथम परमाणु विद्युत केन्द्र है। इसकी स्थापना मुम्बई से 105 किलोमीटर उत्तर की ओर अरब सागर के तट पर बसे तारापुर गाँव में की गई है। इसकी उत्पादन क्षमता 400 मेगावाट है। इसमें 1969 से विद्युत शक्ति का उत्पादन होने लगा है।

(2) राणाप्रताप सागर परमाणु केन्द्र–चम्बल नदी पर राणाप्रताप सागर बाँध के पास रावतभाटा नामक स्थान पर कनाडा के सहयोग से यह परमाणु केन्द्र बनाया गया है। इस केन्द्र में दो-दो लाख किलोवाट के दो रियेक्टर यूनिट हैं।

(3) कल्पक्कम परमाणु शक्ति केन्द्र—यह देश का तीसरा परमाणु विद्युत केन्द्र है चेन्नई से 60 किमी. दूर कल्पक्कम नामक स्थान पर बनाया गया है। इसमें दो रियेक्टर है जिनकी क्षमता 235-235 मेगावाट है। इसकी दोनों इकाइयों ने कार्य करना प्रारम्भ कर दिया है। इसकी क्षमता 220 मेगावाट है।

(4) नरोरा परमाणु शक्ति केन्द्र गंगा नदी के बायें किनारे पर नरोरा नामक स्थान पर इस परमाणु शक्ति केन्द्र की स्थापना की गई है। यह केन्द्र स्वदेशी तकनीक पर आधारित है। इसमें भी दो रिवेक्टर हैं जिनमें से प्रत्येक की क्षमता 235 मेगावाट है। इनमें से एक ने मार्च 1989 से विद्युत उत्पादन प्रारम्भ कर दिया है।

(5) काकड़ापारा परमाणु ऊर्जा केन्द्र-यह भारत का पाँचवाँ परमाणु केन्द्र है। यहाँ पर दो विद्युत उत्पादन इकाइयाँ स्थापित की गयी हैं। इनमें से एक ने 3 सितम्बर 1992 से विद्युत उत्पादन प्रारम्भ कर दिया है। परमाणु ऊर्जा का महत्व (Importance of Atomic Energy)

(1) यद्यपि परमाणु ऊर्जा उत्पादन के लिए आरम्भ में परमाणु भट्टी (nuclear reactor) और शक्ति गृह के निर्माण में बहुत ऊँची लागत व्यय होती है, फिर भी बाद में उससे विद्युत उत्पादन का व्यय कोयले आदि की अपेक्षा कम होता है 10 लाख टन कोयले को ढोकर ले जाने में जितना व्यय होता है, उसकी अपेक्षा बहुत कम मात्रा में यूरेनियम या थोरियम की आवश्यकता होती है।

(2) कोयले और पेट्रोलियम का उपयोग अब कच्चे मालों (raw materials) के रूप में बढ़ता जा रहा है और उनसे अनेक प्रकार के बहुमूल्य रासायनिक पदार्थ और कृत्रिम वस्त्र, कृत्रिम रबर, प्लास्टिक्स आदि निर्मित किये जा रहे हैं। अतः नाभिकीय ऊर्जा को प्रयोग करने से कोयले तथा पेट्रोलियम के भण्डारों को पूरी तरह कच्चे माल के रूप में प्रयोग किया जा सकेगा।

(3) जिन प्रदेशों में कोयला और पेट्रोलियम नहीं हैं, उनमें परमाणु ऊर्जा विशेषतः उपयुक्त है। उदाहरण के लिए, भारत में महाराष्ट्र, तमिलनाडु, राजस्थान, दिल्ली राज्यों में कोयला नहीं है, इनके उत्पादन केन्द्रों (मुम्बई, अहमदाबाद, चेन्नई, दिल्ली आदि) को कोयला बिहार से मँगाना पड़ता है, जो 11,500 किमी. या इससे भी अधिक दूर हैं। ऐसे प्रदेशों के लिए परमाणु शक्तिगृहों का निर्माण विशेष लाभप्रद है।

मेरा नाम संध्या गुप्ता है, मैं इस ब्लॉग का लेखक और सह-संस्थापक हूं। मेरा उद्देश्य इस ब्लॉग के माध्यम से आपको कई विषयों की जानकारी देना है। मुझे ज्ञान बांटना अच्छा लगता है। अगर आप मुझसे कुछ सीख सकते हैं, तो मुझे बहुत खुशी होगी।

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