भारतवर्ष में जनसंख्या वृद्धि के कारणों का उल्लेख कीजिए।

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जनसंख्या विस्फोट या मानव जनसंख्या वृद्धि (Population Explosion or Human Population Growth)

पृथ्वी के किसी भू-भाग में एक निश्चित समय पर उपस्थित जीवों की कुल संख्या को जनसंख्या या आबादी कहते हैं। मनुष्य एक जीवित प्राणी है जिसमें प्रजनन की अभूतपूर्व क्षमता होती है। प्रजनन क्रिया के द्वारा ही मनुष्य अपनी पीढ़ियों को कायम रखने का प्रयास करता है तथा वह सन्तानोत्पत्ति करता है जिसके परिणामस्वरूप किसी स्थान विशेष में मनुष्यों की संख्या में वृद्धि होती है। आजादी से पूर्व भारतवर्ष एवं विश्व की जनसंख्या काफी कम थी। बीसवीं शताब्दी में सम्पूर्ण विश्व में मनुष्यों की संख्या में काफी अधिक वृद्धि हुई है। वर्तमान शताब्दी में हुई जनसंख्या की तीव्र वृद्धि को जनसंख्या विस्फोट की संज्ञा दी गई। आज जनसंख्या में होने वाली तीव्र वृद्धि सम्पूर्ण विश्व स्तर पर चिन्ता का विषय बनी हुई है। प्राचीन काल से अब तक जनसंख्या वृद्धि का अध्ययन करने से भविष्य की जनसंख्या वृद्धि की प्रवृत्ति का अनुमान लगाया जा सकता है। प्रथम A.D. से सन् 2001 तक सम्पूर्ण विश्व की जनसंख्या के निम्नांकित आँकड़ों का

अध्ययन करने से जनसंख्या वृद्धि की दर का स्पष्ट ज्ञान हो जाता है

इस प्रकार उपर्युक्त ऑकड़ों के अध्ययन से ज्ञात होता है कि जनसंख्या में वास्तविक विस्फोटक वृद्धि 1960 से प्रारम्भ हुई तथा मानव जनसंख्या में सर्वाधिक वृद्धि सन् 1990 से 2001 के मध्य 10 वर्षों में कुल जनसंख्या में 2 बिलियन की वृद्धि हुई। इसी प्रकार सन् 2001 से 2016 तक जनसंख्या में 0-6 बिलियन की वृद्धि हुई है। इस प्रकार अत्यन्त अल्प समय में ही मानव जनसंख्या में हुई इस असीमित वृद्धि को ही जनसंख्या विस्फोट कहते हैं।

जनसंख्या वृद्धि की दर (Rate of Population Growth)–

विश्व में जनसंख्या वृद्धि दर उतार-चढ़ाव प्रदर्शित करती है। 1950-60 के मध्य जनसंख्या में वार्षिक वृद्धि दर 1-77% थी जो 1960-65 में बढ़कर 1-99% हो गई। 1975-80 के मध्य इसमें पुनः गिरावट आई और यह दर घटकर 1-81 रह गई। सन् 1982 में 41 वर्षों में जनसंख्या की वार्षिक वृद्धि दर 1-7% थी। इस दर से विश्व की जनसंख्या 41 वर्षों में दोगुनी हो जायेगी। 1965 में जनसंख्या वृद्धि की दर सर्वाधिक 2% थी। इस दर से जनसंख्या 35 वर्षों में दुगुनी हो सकती थी।

जनसंख्या वृद्धि के प्रमुख कारण (Main Causes of Population Growth)

किसी भी राष्ट्र की जनसंख्या वृद्धि के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं

(1) सामाजिक कारण, (2) आर्थिक कारण, (3) प्राकृतिक कारण, (4) वैज्ञानिक कारण।

(1) सामाजिक कारण (Social Reasons)

सामाजिक कारण जनसंख्या वृद्धि का प्रमुख कारण होते हैं। अध्ययनों के आधार सामाजिक कारण जनसंख्या वृद्धि के लिए उत्तरदायी होते हैं पर निम्नलिखित

(i) संयुक्त परिवार (Joint Family) संयुक्त परिवार हमारे देश की प्रमुख विशेषता है। संयुक्त परिवार उसके सभी सदस्यों को सुरक्षा प्रदान करते हैं। ऐसे परिवारों में सामूहिक आय से सदस्यों की विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति होती है। बच्चों के पालन-पोषण का बोझ माता-पिता पर ही केन्द्रित नहीं होने के कारण संयुक्त परिवार के सदस्यों का ध्यान परिवार सीमित रखने की ओर आकृष्ट नहीं होता है।

(ii) बाल विवाह (Child Marriage)-हमारे देश में बाल विवाह एक सामाजिक प्रथा के रूप में प्राचीन काल से ही प्रचलित है। कम आयु में विवाह होने से व्यक्ति का प्रजनन काल अधिक लम्बा हो जाता है तथा अधिक सन्तानोत्पत्ति की सम्भावनाएँ बढ़ जाती हैं। एक सर्वेक्षण के अनुसार जिन महिलाओं का विवाह 14 से 17 वर्ष की आयु में हुआ उनके औसतन 5 से 9 बच्चे तथा जिनका विवाह 18-21 वर्ष की आयु में हुआ था उन्होंने औसतन 4 से 7 बच्चे पैदा किये। इस प्रकार बाल विवाह जनसंख्या वृद्धि का एक प्रमुख कारण है।

(iii) निरक्षरता (Illiteracy)—स्वतन्त्रता के पूर्व तक हमारे देश का साक्षरता प्रतिशत बहुत कम या आज भी साक्षरता का प्रतिशत 65-38 है। निरक्षरता से अन्धविश्वास बढ़ता है। यही कारण है कि निरक्षर लोग आज भी अधिक बच्चे पैदा होने को ईश्वर की कृपा समझते हैं अतः वे अधिकाधिक सन्तानें पैदा करने में विश्वास रखते हैं। कई धर्म ऐसे हैं जहाँ पर जन्म-दर को नियन्त्रित करने की विविध विधियों को धर्म-विरोधी कार्य मानते हैं जिसके कारण स्वच्छन्द सन्तानोत्पत्ति को बल मिलता है।

(2) आर्थिक कारण (Economic Reasons)

वाडिया एवं मर्चेण्ट के अनुसार, जहाँ जीवन में कुछ दाँव पर न लगा हो, वहाँ बालक का जन्म अतिरिक्त आय का साधन है, क्योंकि परिवार की अल्प आय की वृद्धि के लिए उसे कम आयु से ही काम पर लगाया जाता है। यह कथन कितना सत्य है यह अनेक समाजों में विशेषकर पिछड़े और गरीब तबके के लोगों को देखकर ही कहा जा सकता है। मनोरंजन का कोई साधन न होने से सन्तानोत्पत्ति अधिक होती है।

(3) प्राकृतिक कारण (Natural Reasons)

जलवायु भी जनसंख्या वृद्धि का कारण होती है। गर्म जलवायु वाले देशों के लोगों में कम आयु में ही प्रजनन परिपक्वता आ जाती है। यही कारण है जब ठण्डे देशों में लड़कियाँ विवाह योग्य होती है

(4) वैज्ञानिक प्रगति सम्बन्धी कारण (Scientific Progress)

तब तक गर्म जलवायु देशों की लड़कियाँ दो बच्चों की माँ बन चुकी होती हैं। इस प्रकार ऐसे प्राकृतिक कारणों से भी आबादी में वृद्धि हो जाती है। जनसंख्या की वृद्धि का सबसे मुख्य कारण यह है कि जन्म-दर एवं मृत्यु दर में अब सन्तुलन नहीं रहा। चिकित्सा विज्ञान के विकास के साथ-साथ अब ऐसी दवाओं की खोज की गयी है जो ऐसे रोगों को ठीक कर देती हैं जिनका पहले कोई इलाज ही नहीं था। अतः पहले की अपेक्षा मृत्यु दर काफी कम हो गयी है। पहले बच्चों के मरने की संख्या बहुत अधिक थी, परन्तु अब यह संख्या बहुत अधिक घट गयी है।

इनके अतिरिक्त, (i) प्राकृतिक प्रकोपों से सुरक्षा, (ii) निम्न सामाजिक स्तर, (iii) कृषि तकनीकों का विकास एवं उत्पादन में वृद्धि होना, (iv) सामाजिक कुरीतियाँ भी मानव जनसंख्या में वृद्धि का प्रमुख कारण है।

जनसंख्या वृद्धि के कारण उत्पन्न समस्याएँ (Problems Arishing due to Population Growth)

बढ़ती हुई मानव जनसंख्या में आज मनुष्य के सम्मुख अनेकों समस्याएँ उत्पन्न कर दी है। लगातार बढ़ती हुई आबादी ने हमारे सामने निम्न प्रकार की समस्याएँ उत्पन्न हो गई है

(1) बेरोजगारी आज युवकों की प्रमुख समस्या है।

(2) गरीबी एवं दरिद्रता

(3) जीवन-स्तर में गिरावट होना।

(4) संसाधनों की कमी होना। (5) खाद्य समस्या ।

(6) वन, पेट्रोलियम पदार्थों, कोयला और ईंधन प्रदायक सामग्रियों की कमी होना।

(7) सामाजिक स्तर में गिरावट आना।

(8) पर्यावरण प्रदूषण होना।

(9) पारिस्थितिक सन्तुलन का प्रभावित होना।

(10) कृषि भूमि एवं आवासीय भूमि की कमी होना।

जनसंख्या नियन्त्रण के प्रमुख उपाय (Important Measures to Control Population)

सामान्यतः बढ़ती हुई आबादी को नियन्त्रित करने के लिए निम्न प्रकार के उपाय अपनाने चाहिए (1) शिक्षा का प्रसार करके— अशिक्षा जनसंख्या वृद्धि का प्रमुख कारण है। अशिक्षा के कारण ही समाज में विभिन्न प्रकार की कुरीतियाँ, प्रथाएँ पनपती हैं और आम जनता में रूढ़िवादिता, धर्मान्धता, अज्ञानता आदि का प्रसार होता है और व्यक्ति बढ़ती हुई आबादी से होने वाली समस्याओं के बारे में चिन्तन नहीं कर पाता है।

जनसंख्या वृद्धि को रोकने या कम करने के लिए लोगों को निम्नांकित बातों एवं उनके महत्वों शिक्षा देनी चाहिए

(i) जनसंख्या विस्फोट के प्रभावों या हानियों को समझाकर लोगों को जनसंख्या विस्फोट के कारण होने वाली समस्याओं एवं उसके कुप्रभावों से अवगत कराना चाहिए। बातों को समझने के पश्चात् धीरे-धीरे लोगों में जनसंख्या को नियन्त्रित करने की भावना उत्पन्न होगी और वे जनसंख्या कम करने का प्रयास करने लगेंगे। (ii) धर्मान्धता एवं सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करना—

(a) हमें लोगों को इस बात की शिक्षा देनी चाहिए कि सन्तानोत्पत्ति ईश्वर की देन नहीं है। बच्चों की पैदाइश को रोकने में वे खुद ही सक्षम हैं और वे चाहें तो सन्तानोत्पत्ति को रोक सकते हैं।

(b) लोगों के दिमाग से यह गलतफहमी निकालने का प्रयास करना चाहिए कि अधिक सन्तानें परिवार की आय बढ़ाती हैं।

(c) लोगों को इस बात से अवगत कराना चाहिए कि मोक्ष अधिक सन्तान उत्पन्न करने से नहीं बल्कि उनके अच्छे पालन-पोषण एवं शिक्षित करके उन्हें आत्मनिर्भर बनाने से प्राप्त होगा। (iii) छोटे परिवार के महत्वों को समझाना–आम जनता को इस बात को भली-भाँति समझाना चाहिए कि कम सन्तान होने से क्या लाभ होते हैं। आम जनता को जनसंख्या वृद्धि की भयावहता एवं गम्भीर परिणामों को समझाकर जनसंख्या वृद्धि को नियन्त्रित किया जा सकता है।

(2) विवाह की उम्र में वृद्धि करके विवाह का उद्देश्य सन्तानोत्पत्ति भी होता है। हमारे देश में बाल विवाह का प्रचलन था। अतः आज आवश्यकता इस बात की है कि हम विवाह करने की उम्र बढ़ा दें ताकि प्रजनन का समय कम हो जाय।

(3) जन्म दर पर नियन्त्रण करके–अधिक जन्म-दर जनसंख्या वृद्धि का प्रमुख कारण होती है। अतः यदि किसी भी प्रकार से जन्म-दर को ही नियन्त्रित कर लिया जाये तो जनसंख्या वृद्धि भी नियन्त्रित हो जायेगी।

(4) कुछ समाजों में पुरुष एक से अधिक विवाह करते हैं। अतः यदि एक से अधिक विवाह करने पर पाबन्दी लगा दी जाये तो भी जनसंख्या वृद्धि को रोकने में काफी हद तक सफलता मिल जायेगी।

(5) परिवार नियोजन के विभिन्न तरीकों; जैसे-कण्डोमों का प्रयोग, कॉपर-टी का प्रयोग, नसबन्दी आदि को प्रोत्साहन देना चाहिए तथा लोगों के मन में व्याप्त डर को दूर करना चाहिए।

मेरा नाम संध्या गुप्ता है, मैं इस ब्लॉग का लेखक और सह-संस्थापक हूं। मेरा उद्देश्य इस ब्लॉग के माध्यम से आपको कई विषयों की जानकारी देना है। मुझे ज्ञान बांटना अच्छा लगता है। अगर आप मुझसे कुछ सीख सकते हैं, तो मुझे बहुत खुशी होगी।

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