भारत एक जैव-विविधता वाला राष्ट्र है। व्याख्या करें।

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भारत की स्थिति अब विकासशील और औद्योगिक देशों के बीच की है। यह विकासशील देशों से कुछ अधिक विकसित और औद्योगिक देशों से कुछ कम विकसित है। भारत जैव-विविधता की दृष्टि से बहुत अधिक धनी है। इसके जीवमण्डल (Biosphere) का स्वास्थ्य और इसके कृषि (Agriculture), पशुपालन (Animal husbandry), मछली उद्योग (Fisheries), वनविद्या (forestry) तथा औषधि उद्योग (Pharmaceuticai industry) आदि सभी अच्छी स्थिति में हैं। साथ ही इनकी सांस्कृतिक विविधता (Cultural diversity), औषधि का देशज तन्त्र (Indigenous system of medicine), पुराने लोगों की बुद्धिमत्ता तथा उनका ज्ञान भी जैव-विविधता को आधार देते हैं। भारत की जैव-विविधता मुख्यतः परिवर्तनशील या भिन्न-भिन्न पर्यावरण; जैसे-अक्षांश (Latitude), ऊँचाई (Altitude), भौमिकी (Geology), जलवायु (Climate), देशान्तर (Longitude) आदि में भिन्नता के कारण है। भारत का भौगोलिक क्षेत्र 329 मिलियन हेक्टेयर है और इसमें 700 किलोमीटर का समुद्री किनारा है। जलवायु के लगभग सभी प्रकार; जैसे सबसे गरम भाग रेगिस्तान से लगाकर हिमालय के ठण्डे आर्कटिक भाग तथा इन दोनों चरम स्थितियों के बीच की जलवायु की सभी श्रेणियाँ भारत में मिलती हैं। वर्षा (Rainfall) 100 मिलीमीटर थार रेगिस्तान में तो 5000 मिलीमीटर चेरापूँजी में होती है। हालाँकि देश का क्षेत्रफल, विश्व के कुल क्षेत्रफल का केवल 2 प्रतिशत है किन्तु इसमें कुल पौधों और जन्तुओं की 5 प्रतिशत जातियाँ पाई जाती हैं। जैव-विविधता भारत की एक महत्वपूर्ण शक्ति है। पौधों की लगभग 45,000 तथा जन्तुओं की 68,371 जातियाँ भारत में पाई जाती हैं। भारत में कुल मिलाकर बैक्टीरिया (Bacteria), कवक (Fungi), पादपों (Plants) और जन्तुओं (Animals) की 1,08,276 जातियाँ हैं, जिन्हें पहचाना जा चुका है और उनका विवरण दिया जा चुका है। इनमें से 84 प्रतिशत जातियों में से कवक 21-2%, पुष्पीय पौधे 13-9% और कीट 49-3% हैं। यदि जातियों की संख्या के आधार पर देखा जाये तो केवल कीट (Insects) ही भारत में आधी जैव-विविधता का निर्माण करते हैं। ये जातियाँ भूमि (Land) पर, ताजे पानी में (Fresh water) और समुद्री आवासों में (Marine habitats) या सहजीवी या परजीवी (Symbiont or parasite) के रूप में रहती है।

अधिक जाति विविधता (Species Diversity) और स्थानिकता (Endemism) पायी जाती है। दोनों हॉटस्पॉट क्षेत्रों में स्तनधारियों (Mammals), सरीसृपों (Reptiles), उभयचरों (Amphibians), पक्षियों (Birds) तथा उच्च पौधों की 5,332 स्थानिक जातियाँ (Endemic species) पाई जाती हैं।

इसके अतिरिक्त देश एक महत्वपूर्ण बेवीलोवियन सैन्टर ऑफ डायवर्सिटी (Bavilovian Centre of Diversity) है तथा यहाँ 167 महत्वपूर्ण कृष्य पादप (Cultivated plant species) और पालतू जन्तुओं (Domesticated animals) का उद्भव (Orgin) भारत में हुआ है। निम्नलिखित कुछ फसलें हैं जिनका उद्भव भारत में हुआ और वे विश्व में फैल गई- चावल (Rice), गन्ना (Sugarcane), जूट (Jute), आम (Mango), नीबू (Citrus), केला (Banana), बाजरे तथा ज्वार (Millet) की जातियाँ, मसाले, औषधियाँ, सजावटी पौधे इत्यादि।

मेरा नाम संध्या गुप्ता है, मैं इस ब्लॉग का लेखक और सह-संस्थापक हूं। मेरा उद्देश्य इस ब्लॉग के माध्यम से आपको कई विषयों की जानकारी देना है। मुझे ज्ञान बांटना अच्छा लगता है। अगर आप मुझसे कुछ सीख सकते हैं, तो मुझे बहुत खुशी होगी।

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