“मानव का पुनर्स्थापन एवं पुनर्सावास एक समस्या है।” का वर्णन कीजिए।

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यह शाश्वत सत्य है कि हमें विकास का मूल्य किसी न किसी रूप में चुकाना है यह मूल्य हम प्रकृति को क्षति पहुँचाकर चुका रहे हैं। यानि हर प्रकार के विकास की गतिविधि से किसी न किसी रूप में प्रकृति को हानि पहुँचती है। चूँकि हम प्रकृति से जुड़े हैं अतः हमें भी अप्रत्यक्ष रूप से हानि पहुँचती है। विकासशील देशों की आर्थिक नीति के फलस्वरूप वृहत मात्रा में जल, जंगल, जमीन जैसे प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग हुआ। इसका सीधा असर गरीब और ग्रामीण जनता पर पड़ा। अर्थात् • विकास से लाभ तो एक सुविधाभोगी विशिष्ट वर्ग ने उठाया दूसरी ओर इससे होने वाली हानि की मार गरीब एवं असहाय वर्ग ने झेली। इसके कई उदाहरण है, जैसे-बाँध के निर्माण से विद्युत ऊर्जा उत्पन्न हुई, इसके पानी का उपयोग सिंचाई के साथ-साथ विभिन्न उद्योगों ने किया, शहरी जनता को पेयजल उपलब्ध हुआ इत्यादि। लेकिन दूसरी ओर बाँध के डूबत क्षेत्र में गाँव के गाँव आ गये यहाँ के निवासियों को अपना मूल स्थान छोड़ना पड़ा, उनके सामने पुनर्स्थापन पुनर्सावास की समस्या खड़ी हो गई जिसका समाधान आज तक नहीं हो पाया। इसी का परिणाम यह है कि आज हमारी महत्त्वपूर्ण नदी घाटी परियोजना विवाद में है।

इस प्रकार आज विकास के क्रम में हमें इस पुनर्स्थापन एवं पुनर्सावास से सम्बन्धित समस्याओं की ओर गम्भीरता से सोचना है। इस समस्या के अग्रलिखित प्रमुख कारण है (1) बाँधों का निर्माण सभी जानते हैं कि आज बाँधों का महत्व कितना अधिक है। यदि ये बाँध न होते तो हमारा खाद्यान्न उत्पादन नहीं बढ़ पाता। विद्युत ऊर्जा के प्रमुख स्रोतों में बाँध भी एक प्रमुख स्रोत है। असामान्य एवं अनियमित वर्षा या सूखे के समय यह बाँध ही पेयजल के स्रोत होते हैं। अतः बाँधों का निर्माण अत्यावश्यक है। चलते विश्व अभियान में पर्यावरण चेतना का प्रयास संयुक्त राष्ट्र का खास हिस्सा रहेगा तथा इसी के हुए अफ्रीका उप-महाद्वीप में विशेष वृक्षारोपण तथा अद्भुत जंगली जड़ी-बूटियों के संरक्षण तथा हिमालय के तराई भू-भाग में कुछ दुर्लभ जड़ी-बूटियों को बचाने के प्रयास भी हुए हैं। अफ्रीकी तथा एशियाई देशों में जंगलों की अन्धाधुन्ध कटाई को रोकने के लिए वहां की सरकारों के साथ मिलकर प्रयास किये जा रहे हैं।

भारत में पर्यावरण चेतना

इस वर्ष देश के पर्यावरण परिदृश्य पर अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन, विरोधी प्रदर्शन तथा समुद्र में तेल प्रदूषण रोकने के प्रयासों को भी तेजी मिलने की सम्भावना है। भारत में पिछले 20 वर्षों से अटकी हुई बाँध परियोजना को शीघ्र पूरा करने की योजना है। सरकार ने जंगली जीव अधिनियम बना रखा है और बाघ, हिरण तथा हाथियों इत्यादि को मारने की घटनाएँ बराबर कम हो रही हैं। बाघ परियोजना पूरी हुई है। इस सिलसिले में जिनेवा के इन्टरनेशनल यूनियन फॉर कन्जर्वेशन ऑफ नेचर एवं नेचुरल रिसोर्सेज (I.U.C.N.) के पर्यावरण और जीव विशेषज्ञों ने कहा है कि यदि इन जीवों को भारत समेत अन्य दक्षिण एशियाई देशों में बचाने के प्रयास न किये गये तो यह प्रजातियाँ तथा नस्लें खत्म हो सकती हैं।

मेरा नाम संध्या गुप्ता है, मैं इस ब्लॉग का लेखक और सह-संस्थापक हूं। मेरा उद्देश्य इस ब्लॉग के माध्यम से आपको कई विषयों की जानकारी देना है। मुझे ज्ञान बांटना अच्छा लगता है। अगर आप मुझसे कुछ सीख सकते हैं, तो मुझे बहुत खुशी होगी।

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