बढ़ती हुई शहरी आबादी की ऊर्जा सम्बन्धी समस्याओं को किस प्रकार हल किया जा सकता है ? समझाइए।

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बढ़ती हुई मानव जनसंख्या एवं औद्योगिकीकरण के कारण आज बेरोजगारी अपनी चरम सीमा पर है, जिसके कारण लोग शहरों की ओर भागने लगे हैं। इन्हीं कारणों से आज ग्रामीण आबादी शहरों की ओर आकर्षित हो रही है। शहरीकरण की प्रक्रिया के साथ-साथ हमें कई परेशानियाँ उठानी पड़ती हैं। खाद्य समस्या, संसाधनों की समस्या एवं स्थान की समस्या भी बढ़ती जा रही है। हम प्रारम्भ से ही ऊर्जा की आपूर्ति हेतु लकड़ी, कोयला एवं पेट्रोलियम पदार्थों का उपयोग करते आये हैं। आज इनकी माँग और बढ़ती जा रही है, जिसके कारण इनकी कमी होती जा रही है और कालान्तर में एक समय ऐसा आयेगा जबकि ये ऊर्जा संसाधन पृथ्वी से लुप्त हो जाएँगे। अतः शहरी आबादी एवं वहाँ स्थापित उद्योग-धन्धों के परिचालन हेतु हमें ऊर्जा के कुछ ऐसे साधन ढूँढ़ने होंगे जो लम्बी अवधि तक चलते रहें या जिनका नवीनीकरण होता रहे।

शहरी ऊर्जा समस्या को हल करने के उपाय-शहरी ऊर्जा समस्या को हल करने का सर्वाधिक कारगर तरीका यही हो सकता है कि ऊर्जा प्राप्ति के लिए परम्परागत स्रोतों पर हमारी निर्भरता कम हो तथा ऊर्जा के गैर-परम्परागत एवं नवीनीकरण योग्य संसाधनों का उपयोग किया जाए। शहरी ऊर्जा समस्या को हल करने में निम्नलिखित वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत अत्यधिक सहायक सिद्ध हो सकते हैं

(i) जल ऊर्जा (Water Energy)-जल प्रवाह से विद्युत् ऊर्जा पैदा की जाती है। इसके अलावा समुद्री ज्वार से भी आजकल कुछ देश ऊर्जा प्राप्त कर रहे हैं। फ्रांस तथा इंग्लैण्ड इसके उदाहरण है। आजकल गर्म पानी के स्रोतों से भी ऊर्जा प्राप्त करने के लिए जियोथर्मल पावर स्टेशनों पर बहुत अधिक ध्यान दिया जा रहा है।

गर्म जल स्रोतों को हॉट स्प्रिंग (Hot springs) कहते हैं। इनके जल का तापमान 750°C से भी अधिक होता है। हमारे देश में अभी तक 46 जल तापीय स्रोत ज्ञात किये चुके हैं। इन स्रोतों से भोजन पकाना तथा विद्युत निर्माण सम्भव है। इस प्रकार जल में निहित ऊर्जा का उपयोग परम्परागत ईंधन के स्थान पर किया जा सकता है।

(ii) वायु ऊर्जा (Wind Energy)-पवन चक्कियों का उपयोग करके भी विद्युत ऊर्जा प्राप्त की जाती है तथा कुओं से पानी निकाला जा सकता है।

(iii) परमाणु ऊर्जा (Atomic Energy)- नाभिकीय विखण्डन (Nuclear fission) तथा नाभिकीय संलयन (Nuclear fusion) से प्राप्त ऊर्जा को परमाणु ऊर्जा कहते हैं। यह ऊर्जा का सबसे अच्छा स्रोत है, लेकिन इसके दुरुपयोग की सम्भावना सबसे अधिक रहती है। अगर इस ऊर्जा का सही उपयोग किया जाए तो ऊर्जा संकट को दूर किया जा सकता है, क्योंकि इसके लिए बहुत कम पदार्थ की आवश्यकता होती है। उदाहरणस्वरूप-4 ग्राम यूरेनियम-235 के विखण्डन से प्राप्त ऊर्जा 15 टन कोयले या 14 बैरल क्रूड ऑयल से प्राप्त ऊर्जा के बराबर होती है। हमारे देश में उत्तर प्रदेश के नरोरा, राजस्थान के कोटा, महाराष्ट्र के मुम्बई तथा तमिलनाडु के चेन्नई केन्द्रों पर परमाणु ऊर्जा से विद्युत ऊर्जा का उत्पादन किया जा रहा है।

आज इस ऊर्जा से जल को गर्म करने, भोजन को पकाने, कमरों को गर्म करने, शहरों में प्रकाश करने तथा विद्युत पैदा करने का प्रयास लगातार किया जा रहा है। इस दिशा में महत्वपूर्ण सफलताएँ भी मिली है। जापान में लगभग 16 इमारतों में सोलर हीटर का प्रयोग किया जा रहा है। इजराइल के लगभग सभी घरों में प्रयोग की जाने वाली ऊर्जा का लगभग 10% भाग सौर ऊर्जा से प्राप्त किया जाता है। हमारे देश में भी सौर ऊर्जा का प्रयोग नित्य बढ़ता जा रहा है। आज यह बात प्रमाणित हो चुकी है कि सूर्य की ऊर्जा एक ऐसा अक्षय साधन है, जिसका उपयोग करके ऊर्जा संकट से बचा जा सकता है।

(v) हाइड्रोजन (Hydrogen)-जैसा कि हम जानते हैं कि H, एक तीव्र ज्वलनशील पदार्थ है। इस कारण द्रव हाइड्रोजन निकट भविष्य में ऊर्जा का अच्छा वैकल्पिक स्रोत बन सकता है। (vi) भू-गर्भीय ताप (Geo-thermal Energy)- पृथ्वी के अन्दर आज भी उच्च ताप है, जिसके उपयोग का प्रयास जारी है।

(vii) बायोगैस (Biogas)-जैव अपशिष्टों से प्राप्त ऊर्जा को बायोगैस कहते हैं, जिसमें मे मुख्य रूप से पायी जाती है। यह प्रदूषण मुक्त ऊर्जा का स्रोत है। आजकल ग्रामीण क्षेत्रों में गोबर गैस का उपयोग ईंधन, प्रकाश तथा खाद पैदा करने के लिए किया जा रहा है।

मेरा नाम संध्या गुप्ता है, मैं इस ब्लॉग का लेखक और सह-संस्थापक हूं। मेरा उद्देश्य इस ब्लॉग के माध्यम से आपको कई विषयों की जानकारी देना है। मुझे ज्ञान बांटना अच्छा लगता है। अगर आप मुझसे कुछ सीख सकते हैं, तो मुझे बहुत खुशी होगी।

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