GDPR क्या है और यह आपको कैसे प्रभावित करता है

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क्या आप जानते हैं की GDPR क्या है? क्यूँ इसके विषय में जानना सभी Web customers के लिए इतनी जरुरी है? यदि नहीं तो आपको यह publish GDPR in Hindi जरुर पढनी चाहिए. कुछ वर्षों से web ने हमारे verbal exchange करने के तरीकों को बहुत हद तक बदल कर रख दिया है.

इसने हमारे दैनिक के duties को भी काफी हद तक बदल दिया है. अब के समय में हम be in contact करने के लिए emails भेजते हैं, paperwork percentage करते हैं, अपने expenses pay करते हैं और अपने जरुरत के चीज़ों को भी On-line ही खरीदते हैं बिना दुबारा सोचे. ऐसा करते वक़्त हमें अपने firms को अपने non-public main points भी percentage करने पड़ते हैं.

क्या आपने कभी ये सोचा की आप कितने परिमाण में अपने non-public records को on-line में percentage करते हैं? या उन shared records या data का क्या होता है? जी हाँ दोस्तों में आपके banking data, contacts, addresses, social media posts यहाँ तक की आपके IP cope with भी, कोन से websites आप discuss with करते हो, ये सभी जानकारी digitally retailer होते हैं, आप चाहें या न चाहें.

इस बात तो लेकर firms का कहना है की वो ये सारे data इसलिए accumulate करते हैं क्यूंकि इससे वो आपको अच्छे तरीके से समझ सके जिससे वो आपको अच्छे तरीके से serve कर सके. इनसे उन्हें centered और related data मिलती है जिससे वो आपको बेहतर buyer revel in प्रदान कर सकें.

लेकिन क्या सच में इन records का केवल अच्छे buyer revel in के लिए ही इस्तमाल होता है ? हाल ही में ही अभी कुछ समय पहले Fb – Cambridge Analytica Scandal के बारे में आप सभी ने सुना होगा, जहाँ की करोडो Customers के Non-public data Leak हुए थे, कईयों का तो मानना भी है की पिछले साल US Election में इन सभी Data का इस्तमाल किया गया था.

इसलिए Knowledge के coverage को लेकर बहुत देशों ने अपनी चिंता जाहिर करी है. क्यूंकि किसी भी देश के लिए उनके records की सुरक्षा सबसे पहली जिम्मेदारी है. इसपर उस देश का भविष्य निर्भर करता है. कभी कभी तो अरबों रूपए का नुकसान भी उठाना पड़ता है. इसलिए यहाँ पर records के सुरक्षा के लिए GDPR (Normal Knowledge Coverage Law) को फिर से Replace किया गया और इसके time period and stipulations, Coverage को पहले से काफी बेहतर बनाया गया है.

हम में से ऐसे बहुत हैं जिन्हें ही इस विषय में कोई भी जानकारी नहीं है इसलिए इस बात की गंभीरता को देखते हुए आज मैंने सोचा की क्यूँ न आप लोगों को GDPR क्या होता है के विषय में पूरी जानकारी प्रदान करी जाये जिससे आप भी अपने records के coverage के लिए आवाज उठा सके. तो बिना देरी किये चलिए शुरू करते हैं.

GDPR क्या है (What’s GDPR in Hindi)

GDPR Kya Hai Hindi

GDPR एक algorithm होते है जिन्हें की कुछ इसप्रकार से design किया गया है जिससे की केवल EU voters ही नहीं बल्कि सभी लोग जो की web का इस्तमाल करते हैं। उनके पास अपने non-public records को regulate करने की ज्यादा क्ष्य्मता हो.

इसका मुख्य उद्देश्य है की industry के regulatory surroundings को simplify करी ताकि दोनों नागरिक और industry को इस virtual economic system में भरपूर फ़ायदा हो.

इन reforms को कुछ इस प्रकार से design किया गया है जिससे की हमारे मेह्जुदा दुनिया को ये हमें दिखा सके और हमारे rules और responsibilities को सही रूप से put in force कर सके – जिसमें को बहुत सी चीज़ें शामिल है जैसे की non-public records, privateness और consent इत्यादि.

अगर हम basically सोचें तब हमारे जीवन के लगभग सभी side इन records के आसपास ही revolve करती है. चाहे वो social media firms, से banks, outlets, और governments – सभी provider में records को पहले accumulate किया जाता है और फिर उन्हें research किया जाता है.

आपके title, cope with, bank card quantity और बहुत कुछ को accumulate किया जाता है, analyse और उसके पश्चात उन्हें organisations के द्वारा retailer किया जाता है.

इसी Would possibly 25, 2018, में नयी Ecu privateness law के तहत The Normal Knowledge Coverage Law (GDPR) को impact में लाया गया.

इस law को सभी native privateness rules पुरे EU और EEA area में impliment किया गया. ये उन सभी firms पर लागु होता है जो की लोगों से deal करते हैं और उनके non-public data को retailer करते हैं. ये केवल europe के firms तक ही शीमित नहीं है बल्कि ये बाकि के महादेशों पर भी लागु होता है. ये आम लोगों को अपने non-public records के ऊपर ज्यादा regulate प्रदान करता है.

GDPR का complete shape क्या है?

GDPR का complete shape है Normal Knowledge Coverage Law

GDPR के अंतर्गत Folks के Rights क्या है

चलिए जानते हैं GDPR के अंतर्गत folks को दिए गए rights क्या क्या है :

1. The precise to get admission to – यहाँ folks को ये proper दिया जाता है जिसके मदद से वो अपने non-public records को get admission to करने के लिए request कर सकते हैं और ये भी पूछ सकते हैं की उनके द्वारा प्रदान किये गए records को corporate किस हिसाब से इस्तमाल कर रहा है. पूछे जाने पर corporate को उस person को उसके non-public records की एक reproduction, totally free, digital structure में प्रदान करनी होगी.

2. The precise to be forgotten – अगर client किसी corporate का और buyer नहीं रहा तब वो corporate को उनके non-public data का इस्तमाल न करने के लिए request कर सकता है जिससे की उस corporate को उस records को delete करना होगा.

3. The precise to records portability – Folks के पास ये proper है जिससे की वो अपने records को एक provider supplier से दुसरे तक switch कर सकते हैं. और ये regularly used तरीके से और gadget readable structure में होना चाहिए.

4. The precise to learn – अगर कोई corporate किसी person का records acquire कर रहा है तब उस corporate को उस person तक ये खबर पहुँचाना होगा और उसके consent के बाद ही वो ये काम कर सकते हैं.

5. The precise to have data corrected – इस proper के अनुसार folks अपने records को replace करवा सकते हैं अगर वो outdated या incomplete या improper निकला तब.

6. The precise to limit processing – Folks अपने records को processing होने से रोक सकते हैं अगर वो चाहें तब. उनका file एक जगह में रहेगा और इस्तमाल भी नहीं होगा.

7. The precise to object – इस proper के अनुरार एक person अपने records को direct advertising and marketing में processing होने से रोक सकता है. यदि कोई processing चल भी रही हो तब भी forestall का request आने पर उन्हें तभी motion लेना पड़ेगा.

8. The precise to be notified – अगर किसी कारण से records breach होता है तब ये corporate का दयित्व है की वो folks को इस विषय में notify करें inside 72 hours. ये उस person का जानने का अधिकार है.

कैसे GDPR को लाया गया

January 2012, में Ecu Fee ने records coverage reform के लिए पुरे Ecu Union में बातचीत चलायी जिससे की Europe को इस virtual age के लिए are compatible किया जा सके. करीब चार सालों के बाद ही ये settlement को सही रूप से put in force किया जा सका और इसमें जरुरी बदलाव लाया जा सका.

इस reform का एक key part है Normal Knowledge Coverage Law (GDPR) का intrduction होना. ये नयी EU framework को सभी organisations में लागु किया गया और इसके साथ Europe के बहार भी. उनका मानना है की Europe और दुसरे महादेशों का virtual long run केवल विस्वास में ही बनाया जा सकता है. Knowledge Coverage के लिए forged commonplace requirements के होने से लोगों में ये विस्वास जागृत होगा की उनके non-public data के ऊपर केवल उन्ही का ही regulate है. इससे वो Virtual Age को बड़े आसानी से ग्रहण कर सकेंगे बिना किसी चिंता के.

GDPR Compliance (अनुपालन) क्या होता है ?

Knowledge breaches का अक्समात होना संभव है और इसे रोका भी नहीं जा सकता. कई बार Data का चोरी होना, खो जाना या किसी दुसरे लोगों के हाथ में आ जाना जिनके पास इन्हें नहीं जाना चाहिए, ऐसा हो जाता है, ये काम वो करते हैं जिनकी इरादे नेक नहीं होते हैं.

लेकिन GDPR के phrases के अनुसार, न केवल organisations को ये make sure कराना होगा की उनके द्वारा accumulate किये गए non-public records secure हैं और strict stipulations में हैं, बल्कि इसके लिए वो भी जिम्मेदार होंगे जो की उस records को accumulate और arrange करते हैं.

उन्हें इन records को give protection to करना होगा misuse और exploitation से, इसके साथ उन्हें records house owners के rights को भी recognize करना चाहिए अन्यथा उन्हें भी ऐसा न करने के कारण penalty भुगतना पड़ सकता है.

GDPR किन पर लागु होता है ?

GDPR उन सभी organisation पर लागु होता है जो की EU के अंतर्गत function करते हैं, इसके अलावा भी वो सभी organisations जो की EU के बाहर items और services and products be offering करते हैं shoppers और companies को EU के अंतर्गत. इसका मतलब है की विश्व के प्राय सभी main company पर GDPR लागु होती है.

Knowledge Handlers के Sorts

Regulation में दो प्रकार के data-handlers ज्यादा प्राधान्य दिया जाता है वो हैं : ‘processors’ और ‘controllers’.

Controller : एक controller एक ऐसा particular person, public authority, company या दूसरी frame है जो की अकेले या collectively दूसरों के साथ ये resolve करता है की non-public records का functions क्या है और processing कैसे किया जाये.

Processor : एक processor एक ऐसा particular person, public authority, या दूसरी frame है जो की controller के तरफ से non-public records को procedure करता है.

GDPR in the end processor के ऊपर criminal responsibilities position करता है जिससे की वो non-public records के information को handle करे और ये ध्यान दें की वो कैसे processed हों, इसके साथ ही एक upper stage की criminal legal responsibility भी प्रदान करता है अगर कभी organisation breached हुआ तब.

Controllers को भी drive किया जाता है जिससे वो ये make sure करें की सभी contracts processors के साथ GDPR को पालन कर रहें या नहीं.

GDPR के Industry Implications क्या है

यह नयी records coverage law client को driving force के seat में बैठाती है, और इस law को कैसे ठीक से पालन किया जाये इसकी जिम्मेदारी companies और organizations के ऊपर पड़ती है.

GDPR सभी companies और organizations पर लागु होती है जिन्हें की EU में determine किया गया है, चाहे उनकी records processing EU में हो या नहीं. यहाँ तक की non-EU established organizations भी GDPR के अंतर्गत आते हैं. अगर आपकी industry items और services and products be offering करती है EU के नागरिकों को तब वो सभी के ऊपर GDPR लागु होता है.

सभी organizations और firms जो की non-public records के साथ काम करते हैं उन्हें एक records coverage officer या records controller को appoint करना होगा जो की GDPR compliance का दयित्व लेगा.

ऐसे firms और organizations जो की GDPR का सही तरीके से पालन नहीं करेंगे उन्हें positive देना पड़ेगा as much as 4% of annual world income या 20 million Euros, इनमें जो भी ज्यादा हो .

बहुत से लोग ये सोचते हैं की GDPR simply एक IT factor है, लेकिन ये सच्चाई नहीं है. क्यूंकि GDPR अपने आप में ही एक बहुत बड़ी चीज़ है किसी corporate के लिए जैसे firms की advertising and marketing और gross sales actions.

GDPR किस तरह से पहले से अलग है?

वैसे तो पहले के EU privateness requirements और GDPR में काफी अंतर है, लेकिन उनमें से तीन मुख्य number one spaces of enlargement हैं :

1.  Territorial scope. ये GDPR में सबसे बड़ी improve है, जो की सभी firms के ऊपर jurisdiction देने की क्ष्य्मता प्रदान करती है जो की EU में non-public records से deal करते हैं चाहे वो corporate EU country हो या न हो.

ये वो सारे actions को duvet करती है जो की EU Electorate को items और services and products be offering करती हैं और इसके साथ उनके behaviour को भी observe करती हैं. वहीँ Pre-GDPR में, territorial problems ज्यादा ही ambiguous हुआ करते थे, जिनसे a large number of advanced criminal circumstances पैदा होते थे.

2.  Companies जिन्हें की EU voters’ के records की जरुरत होती है वो आसानी से criminal तरीके से अब प्राप्त कर सकते हैं. वहीँ पहले इसे प्राप्त करना इतना आसान नहीं था.

3.  पहले की तुलना में अभी की fines बहुत ज्यादा हैं जो की बेहतर है क्यूंकि इससे अब compaines इनके insurance policies को पालन करने से डरेंगी. पहले के fines ज्यादा नहीं हुआ करते थे.

GDPR का Bloggers पर क्या असर होगा

जैसे की हम जानते हैं की Web पर हम यदि की weblog या website online की जानकारी पता करना चाहते हैं तब हम WHOIS का इस्तमाल करते थे। जो की किसी भी weblog या website online की जानकारी हमें प्रदान कर देती थी।

क्यूंकि बहुत से Internet hosting Provider supplier ऐसे records को public कर देते हैं, इससे house owners का non-public data और personal नहीं होता है. लेकिन अभी GDPR के होने से अब कोई भी internet hosting corporate या wordpress भी किसी भी consumer का records public नहीं करेगी.

यदि ऐसा करती है तब उनके GDPR के द्वारा निर्धारित positive का भुकतान करना पड़ेगा. Person को भी अपने Non-public Knowledge पर Complete Regulate मिल जायेगा. Corporations को भी पहले के कई rules को छोड़कर केवल GDPR के legislation को भी पालन करना होगा जो की उनके काम को आसान बना देगी.

GDPR in Hindi

जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन किसके द्वारा बनाया गया?

जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन यूरोपीय संघ द्वारा बनाया गया है।

जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन कब बनाया गया ?

जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन 14 अप्रैल 2016 को बनाया गया है।

जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन कब लागू होगा?


जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन 25 मई 2018 से लागू होगा।

आज आपने क्या सीखा

अभी के virtual दुनिया में Knowledge एक बहुत ही precious foreign money है. और जहाँ GDPR कुछ demanding situations उत्पन्न कर रहे हैं companies के लिए वहीँ बहुत से जगहों में alternative भी पैदा कर रहे हैं। Corporations जो की person privateness को ज्यादा ध्यान देते हैं, और ज्यादा transparency handle करते हैं records के इस्तमाल में, ऐसे firms को custormes ज्यादा पसंद करते हैं.

उनका ऐसे compaines के तरफ ज्यादा विस्वास होता है, जिससे उनके क्यादा dependable shoppers होते हैं. इसलिए पुराने और नए compaines को भी GDPR Insurance policies को सही तरीके से पालन करना चहिये जिससे की वो shoppers के साथ एक बेहतर संपर्क स्थपित कर सकें.

मुझे पूर्ण आशा है की मैंने आप लोगों को GDPR क्या है? के बारे में पूरी जानकारी दी और में आशा करता हूँ आप लोगों को GDPR की असर के बारे में समझ आ गया होगा. मेरा आप सभी पाठकों से गुजारिस है की आप लोग भी इस जानकारी को अपने आस-पड़ोस, रिश्तेदारों, अपने मित्रों में Proportion करें, जिससे की हमारे बिच जागरूकता होगी और इससे सबको बहुत लाभ होगा. मुझे आप लोगों की सहयोग की आवश्यकता है जिससे मैं और भी नयी जानकारी आप लोगों तक पहुंचा सकूँ.

मेरा हमेशा से यही कोशिश रहा है की मैं हमेशा अपने readers या पाठकों का हर तरफ से हेल्प करूँ, यदि आप लोगों को किसी भी तरह की कोई भी doubt है तो आप मुझे बेझिजक पूछ सकते हैं. मैं जरुर उन Doubts का हल निकलने की कोशिश करूँगा.

आपको यह लेख GDPR क्या होता है (GDPR in Hindi) कैसा लगा हमें remark लिखकर जरूर बताएं ताकि हमें भी आपके विचारों से कुछ सीखने और कुछ सुधारने का मोका मिले. मेरे पोस्ट के प्रति अपनी प्रसन्नता और उत्त्सुकता को दर्शाने के लिए कृपया इस पोस्ट को Social Networks जैसे कि Fb, Twitter इत्यादि पर percentage कीजिये.

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