Galwan Valley : डाकू या चरवाहा? गुलाम रसूल जिसके नाम पर पड़ा गलवान घाटी का नाम, क्यूँ पीछे पड़ा है चाइना

गलवान घाटी का विवाद, कैसे पड़ा नाम, कौन था वो व्यक्ति

गलवान घाटी को लेकर क्यों है भारत और चीन में विवाद आज यह सवाल का जवाब सभी लोग जानना चाहते हैं कि आखिर क्यों गलवान घाटी पर चीन और भारत की सेनाएं आमने सामने खड़ी हो जाती हैं। वर्तमान समय में भारत और चीन की सीमाओं पर काफी तनाव की स्थिति है जिस कारण नियंत्रण रेखा एलएसी पर भारत एवं चीन की सेनाएं बढ़ती चली जा रही है।

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कैसे शुरू हुआ गलवान घाटी पर लड़ाई

भारत का मानना यह है कि गलवान घाटी के पास चीनी सेनाओं ने अपने टेंट बना दिए हैं और अपनी फौज में वृद्धि करते जा रहा है. वहीं चीनी सेनाओं का यह आरोप है कि भारतीय सेना ने गलवान घाटी के पास गैरकानूनी तरीके से रक्षा संबंधी निर्माण किए हैं। इसी विवाद के कारण मई 2000 से दोनों ही देशों के बीच टकराव की स्थिति उत्पन्न हो चुकी है।

मई के शुरुआती हफ्ते में नॉर्थ सिक्किम नाथुला सेक्टर में भारतीय एवं चीनी सेना के बीच में जंग छिड़ गई थी. इसके बाद लद्दाख के एलएसी के पास भी चीनी सेनाओं के हेलीकॉप्टर देखे गए जिसके विरोध में भारतीय वायु सेना ने भी पेट्रोलिंग शुरू कर दी। दोनों ही देशों का एक दूसरे पर यह आरोप है कि उनकी सेनायेवहां पर असामान्य गतिविधियां उत्पन्न कर रही है जिसके जवाब में यह लड़ाई चल रही है।

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क्यों अहम हैं गलवान घाटी

  1. यह गलवान घाटी विवादित क्षेत्र अक्साई में स्थित है, अक्साई भारत और चीन की सीमा में स्थित एक स्थान है. परंतु अक्साई चीन पर भारत एवं चीन दोनों ही देशों का समान रूप से दावा है . दोनों ही देशों का कहना यह है कि यह उनके देश का हिस्सा है। इसीलिए इस गलवान घाटी पर हमेशा ही तनाव की स्थिति बनी रहती है 1962 की जंग के दौरान गलवान घाटी एक अहम केंद्र था, जहां से चीन और भारत के बीच लड़ाई की जाती थी।
  2. भारत और चीन के बीच गलवान घाटी का मुद्दा 1958 से चला आ रहा है, असल में भारत का यह दावा है कि अक्साई चीन भारत का हिस्सा है. जब चीन सरकार ने अक्साई चीन पर सड़क का निर्माण प्रारंभ किया तब भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इस बात पर आपत्ति प्रकट की. अक्साई चीन में जिस सड़क का निर्माण किया जा रहा था वह काराकोरम रोड से जुड़ रही थी जो कि पाकिस्तान की तरह बढ़ रही थी। इसके निर्माण के समय भारतने चीन के सामने आपत्ति प्रकट की थी लेकिन किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई नहीं की गई थी लेकिन फिलहाल भारत चीन द्वारा अक्साई चीन पर की जाने वाली गतिविधियों के खिलाफ कार्यवाही कर रहा हैं .
  3. उस समय इस विवाद को सुलझाने के लिए भारत और चीन के बीच में एक समझौता हुआ था जिसके अंतर्गत एल ए के नियमों को मानने के लिए एक दूसरे को बाध्य किया गया था जिस समझौते के अनुसार गलवान घाटी के आसपास भारतीय एवं चीन दोनों ही देश किसी भी तरह का निर्माण कार्य नहीं कर सकते लेकिन चीन की सेनाओं ने पहले ही वहां पर गैरकानूनी निर्माण कर लिए हैं और स्थिति की गंभीरता को जानते हुए भारतीय सेनाओं में भी निर्माण कार्य शुरू किया जैसे ही भारतीय सेनाओं ने यह निर्माण कार्य शुरू किया वैसे ही विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई क्योंकि यह समझौते के विरुद्ध है।

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भारत के लिए क्यों है गलवान घाटी महत्वपूर्ण

  1. अक्साई चीन का यह हिस्सा भारत के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सुरक्षा की दृष्टि से बहुत ही ज्यादा महत्व रखता है।
  2. फिलहाल भारत के पाकिस्तान के साथ भी संबंध बहुत खराब है और चीन के साथ भी आपसी विवाद चलते रहते हैं, ऐसे में भारत को अपनी सीमाओं को सुरक्षित रखना बहुत ज्यादा जरूरी है . इस दिशा में कार्य करते हुए गलवान घाटी पर सैन्य निर्माण भारत के लिए बहुत ज्यादा जरूरी हो जाते हैं।
  3. परंतु चीन के साथ आज की स्थिति में युद्ध करना भारत के लिए बहुत ही नुकसानदायक हो सकता है क्योंकि गलवान घाटी के आसपास चीन सेना काफी सशक्त है और आज कोरोनावायरस के कारण आर्थिक संकट से गुजर रहे भारत को चीन से इस तरह से लड़ने में काफी नुकसान हो सकता है।
  4. लेकिन फिलहाल चीन की स्थिति भी बहुत ज्यादा अच्छी नहीं है क्योंकिकरोनावायरस के कारण बहुत से देश चीन के खिलाफ हो चुके हैं इसीलिए चीन अपनी कूटनीतिज्ञ चालो को लेकर फिलहाल बहुत ज्यादा शांत है।
  5. अगर इसी तरह की स्थिति उत्पन्न रही तो भारत और चीन आपस में बातचीत कर इस मुद्दे को सुलझा सकते हैं।

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गलवान घाटी का इतिहास एवं भोगोलिक संरचना

भारत और चीन के बीच गलवान घाटी पर विवाद चल रहा है. अब हम जानते हैं कि गलवान घाटी की स्थिति भारत और चीन के बीच क्या है और गलवान घाटी का नाम बलवान घाटी कैसे पड़ा तो इस तरह हम जानते हैं कि गलवान घाटी का इतिहास क्या है।

इतिहास

वर्ष 1958 से लेकर अब तक भारत और चीन के बीच बलवान घाटीपर विवाद चल रहा है यह गलवान घाटी 14000 फीट ऊंची है और जहां पर बहुत ज्यादा ठंड होती है . यहां पर लगभगमाइनस 20 डिग्री तक का टेंपरेचर हो जाता है. इन टेंपरेचर के बीच में भारतीय एवं चीनी सेना ने आपस में युद्ध करती हैं जो की बहुत ही जोखिम भरा काम है।

कैसे पड़ा गलवान घाटी का नाम गलवान

ऐसा माना जाता है लद्दाख के रहने वाले गुलाम रसूल गलवान के नाम पर इस घाटी का नाम रखा गया. गुलाम रसूल गलवान पेशे से एक गाइड था या फिर इसे कई लोग चरवाहे अथवा डाकू के रूप में भी जानते हैं .

कुछ का मानना है कि यह एक चरवाहा था और कुछ कहते हैं कि यह एक खूंखार डाकू था लेकिन वर्ष 1878 में जन्मे गुलाम रसूल एक गाइड के तौर पर जाने जाते हैं, बचपन से सही घर से निकल गए थे लोगो से मिलते रहने के कारन इनकी अंग्रेजी बहुत अच्छी हो गई थी .और इस तरह इन्होंने बहुत सी अच्छी जगह की खोज की थी जिनमें से एक थी यह गलवान घाटी.

गुलाम रसूल को बचपन से ही नई नई जगह को ढूंढने का शौक था यह लद्दाख के रहने वाले थे और इन्होंने लद्दाख के आसपास गलवान घाटी और गलवान नदी सहित बहुत से नए इलाकों की खोज की थी इसीलिए इस जगह का नाम उनके नाम पर पड़ा. रसूल ने इस इलाके से संबंधी एक बुक भी लिखी हैं जिसका उपयोग आज के समय में इतिहास जानने के लिए किया जाता हैं.

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गलवान घाटी का विवाद कब से चला आ रहा है?

1958

गलवान घाटी विवाद किन दो देशों के बीच चल रहा है?

यह विवाद भारत और चीन के बीच चल रहा है।

गलवान घाटी की खोज किसने की?

गलवान नदी एवं घाटी की खोज गुलाम रसूल गलवान ने की।

गुलाम रसूल गलवान कहां के रहने वाले थे ?

गुलाम रसूल गलवान लद्दाख के रहने वाले थे।

गुलाम रसूल गलवान का जन्म कब हुआ ?

1878

गलवान घाटी की ऊंचाई कितनी है?

14000 फीट

भारत के लिए गलवान घाटी क्यूँ महत्वपूर्ण हैं ?

सुरक्षा की दृष्टि से

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