पर्यावरण विज्ञान की प्रकृति एवं विषय क्षेत्र की व्याख्या कीजिए।

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प्रकृति में उपस्थित जीवधारियों की उत्तर जीविता के लिए ऊर्जा एवं पदार्थों की आवश्यकता होती है जिसे वह अपने चारों ओर उपस्थिति पर्यावरण से प्राप्त करता है। पर्यावरण दो शब्दों ‘परि’ एवं ‘आवरण’ से मिलकर बना होता है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि समस्त जीवधारी चारों ओर से एक पारिवृत्त से घिरा होता है जो कि उसे विभिन्न प्रकार से प्रभावित करता है तथा जीवधारियों को जीवित रखने के लिए आवश्यक समस्त परिस्थितियों एवं संसाधन उपलब्ध कराता है। इस पारिवृत्त को ही पर्यावरण (Environment) कहते हैं। इस प्रकार पौधे, जीव जन्तु एवं सूक्ष्मजीव अपने वातावरण के साथ मिलकर सम्मिलित रूप से एक तंत्र या इकाई (Unit) बनाते हैं, जिसे पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystems) कहते हैं। प्रत्येक प्रकार के पारिस्थितिक तंत्र में उपस्थित जैविक एवं अजैविक पदार्थ अन्तक्रिया करते हैं। अतः जीवों (Organisms) एवं उनके भौतिक वातावरण (Physical environ ment) का वैज्ञानिक अध्ययन करने के लिए जीव विज्ञान के अन्तर्गत एक नई शाखा बनाई गई, जिसे पारिस्थितिक विज्ञान (Ecology) अथवा पर्यावरण जीव विज्ञान (Environmental Biology) नाम दिया गया।

पर्यावरण की परिभाषा (Definition of Environment)

पर्यावरण को विभिन्न प्रकार से परिभाषित किया गया है। कुछ प्रमुख परिभाषाएँ निम्नानुसार है-

“समस्त भौतिक (Physical) तथा जैविक (Biotic) परिस्थितियों द्वारा जीवों की अनुक्रियाओं को प्रभावित करने वाले वातावरण को ही पर्यावरण कहते हैं।” “जीवधारियों के चारों ओर उपस्थित वह भौतिक एवं जैविक परिस्थितियाँ जो उसके जीवित रहने

के लिए आवश्यक होती हैं तथा उसकी अनुक्रियाओं को प्रभावित करती है उसे पर्यावरण कहते हैं।” “जीवधारियों के पर्यावरण का अध्ययन जीव विज्ञान की जिस शाखा के अन्तर्गत किया जाता है उसे पर्यावरण विज्ञान या पारिस्थितिकी (Ecology) कहते हैं।”

पारिस्थितिक विज्ञान की परिभाषाएँ (Definitions of Ecology)

पारिस्थितिक विज्ञान को समय-समय पर विभिन्न वैज्ञानिकों ने अलग-अलग ढंग से परिभाषित किया है, जिसमें से कुछ प्रमुख परिभाषाएँ निम्नलिखित हैं—

1. अर्न्स्ट हीकल (Ernst Haeckel, 1866) के अनुसार, “पारिस्थितिकी जीवों एवं उसके कार्बनिक (Organic) एवं अकार्बनिक (Inorganic) पर्यावरण (Environment) के मध्य समस्त पारस्परिक सम्बन्धों का अध्ययन है। ”

2. रीटर (Reiter, 1868) के अनुसार, “विज्ञान की वह शाखा जिसके अन्तर्गत जीवों ( Organ isms) एवं उसके निवास स्थान का अध्ययन किया जाता है, उसे पारिस्थितिक विज्ञान (Ecology) कहते हैं।” चूँकि पर्यावरण (Environment) ही जीवों का निवास स्थान है। अतः पारिस्थितिक विज्ञान (Ecology) को पर्यावरण जीव विज्ञान (Environment biology) भी कहते हैं।”

3. वार्मिंग (Warming, 1895-1905) के अनुसार, “पारिस्थितिक विज्ञान जीवों एवं उसके पर्यावरण के परस्पर सम्बन्धों का अध्ययन है।”

4. यूजीन पी. ओडम (Eugene, P. Odum, 1963) के अनुसार, “प्रकृति की संरचना (Structure) एवं कार्यों (Functions) का अध्ययन पारिस्थितिक विज्ञान (Ecology) कहलाता है। ”

5. एम. ई. क्लार्क (M. E. Clark, 1972) के अनुसार, “पारिस्थितिक विज्ञान, एक पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem) अथवा जीवों एवं उसके भौतिक वातावरण के परस्पर सम्बन्धों का अध्ययन है।”

पारिस्थितिकी के उद्देश्य (Objects of Ecology)

पारिस्थितिकी (Ecology) या पारिस्थितिक विज्ञान जीवधारियों एवं उसके पर्यावरण में परस्पर सम्बन्धों का अध्ययन करने वाला विज्ञान है। इस विज्ञान का प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित प्रक्रियाओं को समझना तथा पर्यावरण की रक्षा करना है

(1) जीवों के प्राप्ति स्थान (Occurrence), बाहुल्यता (Abundance) एवं क्रियाओं में होने वाले अस्थायी परिवर्तनों को समझना।

(2) जीवों में उनके भौतिक वातावरण (Physical Environment) के प्रति होने वाले संरचनात्मक एवं क्रियात्मक अनुकूलनों की जानकारी प्राप्त करना ।

(3) सामान्य अथवा प्राकृतिक दशाओं में जीवधारियों के व्यवहार (Behaviour) को समझना। समझना। (distribution) तथा उनकी बाहुल्यता (abundance) को समझना।

(4) समष्टि (Population) एवं समुदाय (Community) में जीवों के परस्पर सम्बन्धों को

(5) जीवधारियों के स्थानीय (Local) एवं भौगोलिक वितरण (Geographical

(6) समस्त पारस्परिक सम्बन्धों में होने वाली विकासात्मक प्रगति (Evolutionary development) की जानकारी प्राप्त करना ।

(7) प्राकृतिक स्रोतों (Natural resources) का प्रबन्धन (Management) एवं उनका संरक्षण

(8) मृदा (Soil), वन (Forests), वन्य जीवों (Wild life) आदि के महत्वों को समझना तथा (Conservation) करना। इनका संरक्षण करना।

(9) प्रकृति की जैविक उत्पादकता (Biological productivity) की जानकारी प्राप्त करना तथा मानव जाति के लिए इसकी उपयोगिता का अध्ययन करना

(10) पर्यावरण प्रदूषण (Environment pollution) एवं उसके स्रोतों की जानकारी प्राप्त तथा प्रदूषण को नियंत्रित करना।

पारिस्थितिक विज्ञान की प्रकृति एवं कार्य क्षेत्र (या विषय क्षेत्र) –

बहुविषयक प्रकृति

पारिस्थितिक विज्ञान का विषय-क्षेत्र अत्यन्त व्यापक है। इस विज्ञान के प्रमुख कार्य क्षेत्र या विषय-क्षेत्र निम्नानुसार है

1. पारिस्थितिक विज्ञान की सहायता से किसी क्षेत्र विशेष में उपस्थित पादपजात (Flora) एवं जन्तुजात (Fauna) की पहचान एवं गिनती की जाती है।

2. इस विज्ञान की सहायता से विशिष्ट वातावरण; जैसे-वन, मृदा, समुद्र एवं प्राकृतिक समुदायों के अन्तर्संबन्धों का अध्ययन सम्भव होता है।

3. कृषि (Agriculture), जीव वैज्ञानिक सर्वे (Biological survey), कीट नियन्त्रण (Insect control), वानिकी (Forestry) एवं मत्स्य विज्ञान (Fishery) आदि क्षेत्रों में पारिस्थितिकी (Ecol ogy), व्यावहारिक रूप से (Practically) उपयोगी सिद्ध हुई है।

4. मृदा संरक्षण (Soil conservation), वन संरक्षण (Forest conservation), वन्य जीव संरक्षण (Wild life conservation) आदि कार्यों में यह विज्ञान अत्यधिक उपयोगी सिद्ध हुआ है।

5. प्रदूषण (Pollution) के निराकरण एवं उससे बचाव के लिए भी हम पूर्ण रूप से पारिस्थितिकी के ज्ञान पर ही निर्भर हैं।

मेरा नाम संध्या गुप्ता है, मैं इस ब्लॉग का लेखक और सह-संस्थापक हूं। मेरा उद्देश्य इस ब्लॉग के माध्यम से आपको कई विषयों की जानकारी देना है। मुझे ज्ञान बांटना अच्छा लगता है। अगर आप मुझसे कुछ सीख सकते हैं, तो मुझे बहुत खुशी होगी।

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