एन्डोमिज्म एवं एन्डेमिक जातियाँ, स्थानिक प्रजातियाँ

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विशेष क्षेत्रीय जातियों को चार प्रकारों में बाँटा गया है

1. अवशेष विशेष क्षेत्रीय (Relic endemics) – इसमें वे जातियाँ आती है जिनसे ज्यादातर सम्बन्धित जातियाँ जीवाश्म (fossil) हो चुके हैं। जीवित जीवाश्म (living fossil), जिंगो बाइलोवा (Ginko biloba) इसका उपयुक्त उदाहरण है।

2. पेलियो विशेष क्षेत्रीय (Palaeo endemics)- ऐसी विशेष क्षेत्रीय जातियाँ जिनकी उत्पत्ति अति प्राचीन काल में हुई जो विशेष क्षेत्रों में ही कुछ कारणवश सीमित रहती है। पेलियो विशेष क्षेत्रीय कहलाती है।

3. असत्य विशेष क्षेत्रीय (Pseudo-endemics)- उत्परिवर्तन (mutation) के कारण विशेषी क्षेत्रीय जातियाँ तो उत्पन्न होती है परन्तु कुछ समय बाद अदृश्य हो जाती है। इस तरह की विशेष क्षेत्रीय जातियों को असत्य विशेष क्षेत्रीय कहते हैं।

4. जय विशेष क्षेत्रीय (Neo-endemics)- जब नयी जातियाँ विशेष क्षेत्रीय तो रहती हैं परन्तु बाद में क्षेत्रफल में धीरे-धीरे वितरित होने की यदि सम्भावना हो तो उसे नव विशेष क्षेत्रीय कहते हैं।

मेरा नाम संध्या गुप्ता है, मैं इस ब्लॉग का लेखक और सह-संस्थापक हूं। मेरा उद्देश्य इस ब्लॉग के माध्यम से आपको कई विषयों की जानकारी देना है। मुझे ज्ञान बांटना अच्छा लगता है। अगर आप मुझसे कुछ सीख सकते हैं, तो मुझे बहुत खुशी होगी।

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