प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में व्यक्ति की भूमिका का वर्णन कीजिए।

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प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में व्यक्ति विशेष अपनी भूमिका निम्नानुसार हो सकती है

(1) पर्यावरण शिक्षा-जन-साधारण को सबसे पहले स्वयं पर्यावरण शिक्षा प्राप्त करने की कोशिश करनी चाहिए जिससे वह स्वयं तो पर्यावरण के प्रति जागरूक होगा और अपने आस-पास के प्रत्येक व्यक्ति को संसाधनों की महत्ता समझाकर उसके संरक्षण का उपाय बतायेगा।

( 2 ) ऊर्जा का सही उपयोग– प्रत्येक व्यक्ति की दिनचर्या की शुरुआत किसी न किसी प्रकार के यन्त्रों के द्वारा होती है और इन यन्त्रों के संचालन हेतु ऊर्जा की आवश्यकता होती है जिसके लिए हम विभिन्न संसाधनों का उपयोग करते हैं। जैसे हम भोजन बनाने के लिए कोयला, लकड़ी या गैस, तेल का प्रयोग करते हैं। प्रत्येक व्यक्ति को चाहिए कि वह गैस का प्रयोग करे इससे वातावरण दूषित नहीं होगा, दूसरी ओर लकड़ी और कोयला जलाने से वातावरण दूषित होता है, साथ-साथ प्राकृतिक संसाधन भी नष्ट होते हैं। दूसरी ओर वाहनों के रख-रखाव एवं उचित वाहनों के प्रयोग से भी वायु प्रदूषण नहीं फैलता। सौर ऊर्जाजनित कुकर इत्यादि का प्रयोग भी करना चाहिए। इस प्रकार व्यक्ति विशेष उचित स्थान पर उचित ऊर्जा के संसाधनों का उपयोग कर प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है।

(3) वृक्षारोपण–प्रत्येक व्यक्ति अपने घरों के अपने कार्यालयों के, अपने आस-पास सार्वजनिक संस्थानों में खाली पड़ी भूमि में वृक्षारोपण करे तथा लगे हुए वृक्षों का संरक्षण भी करे। (4) जल का सदुपयोग—

(i) तालाबों एवं पोखरों, नदियों इत्यादि जगहों पर नहाने एवं कपड़ा धोने के लिए साबुन का प्रयोग नहीं करना चाहिए। इनमें कचरा या अन्य गन्दगी नहीं फेंकनी चाहिए।

(ii) कृषि कार्यों के लिए अत्यधिक उर्वरक एवं कीटनाशकों जैसे रसायनों का उपयोग अधिक नहीं करना चाहिए क्योंकि ये सब बहकर पानी में चले जाते हैं जिससे जल प्रदूषित हो जाता है। (iii) जल प्रदूषण के कारणों, उसके दुष्प्रभावों एवं उसके निराकरण की विधियों के बारे में जानकारी देनी चाहिए।

(5) ध्वनि प्रदूषण-शहरीकरण की एक प्रमुख समस्या है— ध्वनि प्रदूषण सामान्यतः 70 डेसीबल से अधिक की आवाज मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक होती है। दूसरी ओर इस ध्वनि प्रदूषण का जनक भी मनुष्य ही है। अतः प्रत्येक व्यक्ति को चाहिए कि वह ऐसा कार्य न करें; जैसे-खुशी के मौके पर लाउडस्पीकर का उपयोग, जुलूस या जलसे में ध्वनि विस्तारक का प्रयोग, अधिक आवाज वाले पटाखों का उपयोग जिससे ध्वनि प्रदूषण होता है। अतः ध्वनि प्रदूषण व्यक्ति विशेष के प्रयासों से ही रुक सकता है।

(6) पर्यावरण मित्र- प्रत्येक व्यक्ति विशेष को चाहिए कि वह पर्यावरण से अपना नाता जोड़े और दैनिक क्रिया-कलापों में हर स्तर पर पर्यावरण संरक्षण की सोचे यानि पर्यावरण को अपना मित्र बनाये और उसकी सहायता एवं रक्षा करे। यहाँ हम उन छोटी-छोटी बातों पर उल्लेख कर रहे हैं जिससे प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सम्भव है। ये निम्नानुसार है

(i) कागज फाड़ें या जलायें नहीं बल्कि उसे एकत्र कर रद्दी में बेच दें ताकि उसका पुनः उपयोग हो सके।

(ii) गिलास में उतना ही पानी लें, जितना पीना हो ताकि उसे फेंकना न पड़े।

(iii) एक ही कमरे में जहाँ तक सम्भव हो, घर के सभी सदस्य भोजन इत्यादि ग्रहण करें जिससे विद्युत की बचत होगी, साथ ही पूर्ण अन्धकार के पश्चात् ही रोशनी करें। (iv) भोजन इत्यादि के लिए आवश्यक सौर उपकरणों का प्रयोग करें।

(v) धीरे बात करें, ध्वनि-विस्तारकों का प्रयोग न करें, टेप, टी. वी. इत्यादि धीरे सुनें। (vi) खाना बनाते समय एल्युमिनियम के बर्तनों का उपयोग करें, प्रेशर कुकर का उपयोग करें, जिससे ईंधन बचता है।

(vii) बगीचों में पानी सूर्योदय के पहले या सूर्यास्त के बाद दें जिससे पानी व्यर्थ वाष्पित होकर नष्ट नहीं होगा, पौधे के लिए अधिक उपयोगी होगा। (viii) वाहन का उपयोग नियमानुसार कम गति से करें, पास में जाने के लिए वाहन का प्रयोग न करें, यदि सार्वजनिक वाहन उपलब्ध हो तो व्यक्तिगत वाहन का उपयोग कम करें।

(ix) फ्रिज का उपयोग नियमानुसार करें जिसमें बहुत अधिक ऊर्जा की खपत होती है। (x) पॉलीथिन थैलों का प्रयोग केवल आवश्यकतानुसार ही करें।

(xi) बर्तन साफ करने के लिए डिटर्जेण्ट के बजाय राख या मिट्टी का प्रयोग करें क्योंकि दोनों से ही बर्तन समान साफ होते हैं।

(xii) अपने मित्रों और पारिवारिक सदस्यों के बीच पर्यावरण संरक्षण की चर्चा करते रहें। साथ ही स्थानीय समाचार पत्रों के सम्पादकों को पर्यावरणीय समस्याओं से अवगत कराते रहें।

मेरा नाम संध्या गुप्ता है, मैं इस ब्लॉग का लेखक और सह-संस्थापक हूं। मेरा उद्देश्य इस ब्लॉग के माध्यम से आपको कई विषयों की जानकारी देना है। मुझे ज्ञान बांटना अच्छा लगता है। अगर आप मुझसे कुछ सीख सकते हैं, तो मुझे बहुत खुशी होगी।

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