जैव-विविधता के तप्त स्थलों का वर्णन कीजिए।

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दुनिया के उष्ण कटिबन्धीय क्षेत्र जिसमें जैव-विविधता समृद्ध है एवं विशेष क्षेत्रीयता का स्तर उच्च है और जिसमें आवास विनाश के और जातियाँ विलोपन के खतरे में आते हैं इसलिए परिरक्षण के लिए ये तप्त स्थल (Hot spots) कहलाते हैं। वैज्ञानिक मायर्स (Myers 1988) ने 12 तप्त स्थलों (hot spots) को बतलाया या जानकारी दी और उन्होंने पहचाना कि विश्व की पादप जातियों का 14% इसके अन्तर्गत आता है और इसकी केवल 0.2% के कुल भूमि सतह पर हैं। डॉ. मायर्स ने बताया कि 8 और अन्य आवास इसके अन्तर्गत आते हैं

पूरे विश्व में निम्नलिखित क्षेत्रों में संरक्षण (conservation) को बढ़ावा देने के लिए प्रस्ताव पारित है

एशिया-एण्डोचीन, फिलीपीन्स, दक्षिण-पश्चिमी श्रीलंका, पूर्वी हिमालय अफ्रीका मेडागास्कर के द्वीप, तन्जानिया और कीनिया के पर्वतीय वन लैटिन अमरीका-ब्राजील के अटलांटिक तट वन, इक्वाडोर के तटीय वन ।

ओनेशिया केलेडोनिया (नया)। वर्तमान में विश्व में 25 तप्त स्थलों में भारत में तप्त स्थल वेस्टर्न घाट श्रीलंका एवं इण्डोनेशिया तथा वर्मा पास के पड़ौसी देशों को मिलाकर है। इन स्थानों में फ्लोरा अधिक है पर स्थानिक (endemic) है। इन तप्त स्थलों में वनस्पति पुष्पीय पौधों के साथ-साथ एम्फीबिया, रेप्टाइल और कुछ मेमल्स भी हैं।

पूर्वी हिमालय-इसमें सिक्किम, भारत, नेपाल, भूटान आते हैं। सिक्किम में 4,250 पौधों में 2,550 पौधे स्थानिक हैं जबकि भारत के अन्य भाग में 5,800 पौधों में से करीब-करीब 2,000 पौधे स्थानिक हैं। नेपाल में 7,000 पौधों में 500 पौधे स्थानिक हैं, जबकि भूटान में 7,000 पौधों में से 750 स्थानिक है।

वेस्टर्न घाट (Western Ghats)-पश्चिमी घाट में महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु एवं केरल आते हैं। इसमें करीब 49,219 पादप जातियों में से 1,600 स्थानिक है।

मेरा नाम संध्या गुप्ता है, मैं इस ब्लॉग का लेखक और सह-संस्थापक हूं। मेरा उद्देश्य इस ब्लॉग के माध्यम से आपको कई विषयों की जानकारी देना है। मुझे ज्ञान बांटना अच्छा लगता है। अगर आप मुझसे कुछ सीख सकते हैं, तो मुझे बहुत खुशी होगी।

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