भारतीय संविधान के अन्तर्गत नागरिकों को प्रदत्त मौलिक अधिकारों का वर्णन कीजिए।

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भारत के संविधान का निर्माण संविधान सभा ने किया था। संविधान सभा की प्रथम बैठक 9 दिसम्बर 1946 को हुई थी। सभा ने 26 नवम्बर, 1949 को संविधान को अंगीकार कर लिया था तथा 26 जनवरी, 1950 से भारत का संविधान लागू हुआ। 14 अगस्त, 1947 को हुई संविधान सभा की बैठक के अध्यक्ष सच्चिदानन्द सिन्हा थे। उनके देहावसान के बाद डॉ. राजेन्द्र प्रसाद संविधान सभा के अध्यक्ष बने। संविधान का मसौदा फरवरी 1948 में प्रकाशित हुआ था। भारतीय संविधान ब्रिटेन की संसदीय प्रणाली पर आधारित है। भारत के न्यायालयों को भारतीय संसद द्वारा पास किये गये कानूनों की संवैधानिकता पर निर्णय करने का अधिकार है। संविधान में प्रस्तावना के अलावा 1 से 10 अनुसूचियाँ, 1 से 395 धाराएँ और एक परिशिष्ट है। परिशिष्ट में वह आदेश है जिसमें जम्मू व कश्मीर पर संविधान लागू किया गया है।

संघ सूची, राज्य सूची व समवर्ती सूची (Union list, State List and Concurrent List)

संविधान में भारत को एक सर्वप्रभुत्व सम्पन्न समाजवादी धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्रीय गणराज्य घोषित किया गया है। 42वें संविधान संशोधन द्वारा प्रस्तावना में समाजवादी धर्मनिरपेक्ष” और “राष्ट्र की एकता और अखण्डता” शब्द जोड़े गये।

भारत राज्यों का संघ है। प्रथम अनुसूचित में राज्यों व केन्द्र शासित प्रदेशों का वर्णन किया गया है। संघ सरकार को संघ सूची में उल्लिखित सभी विषयों पर कानून बनाने का अधिकार प्राप्त है। राज्यों को राज्यसूची में उल्लिखित सभी विषयों पर कानून बनाने का अधिकार प्राप्त है। तीसरी सूची ‘समवर्ती सूची’ है। इसमें उल्लिखित विषयों पर कानून बनाने का अधिकार संघ सरकार व राज्य सरकार दोनों को है। संघ सरकार द्वारा बनाये गये व राज्यों द्वारा बनाये गये कानूनों में विरोध होने की दशा में संघ सरकार द्वारा बनाये गये कानूनों को मान्यता देने की बात धारा 254 में कही गयी है।

संविधान के भाग 2 में धारा 12 से 35 के अन्तर्गत नागरिकों को छः मूल अधिकार दिये गये हैं

1. समानता का अधिकार

3. शोषण से रक्षा का अधिकार

2. स्वाधीनता का अधिकार 4. धर्म की स्वाधीनता का अधिकार

5. सांस्कृतिक एवं शिक्षा सम्बन्धी अधिकार 6. संवैधानिक उपचार का अधिकार। प्रत्येक नागरिक को अपने मूल अधिकारों की रक्षा के लिए सर्वोच्च न्यायालय अथवा उच्च न्यायालय में कार्यवाही करने का अधिकार है।

सातवी अनुसूची में 97 विषय है संघ-सूची की 62वी प्रविष्टि में संसद द्वारा राष्ट्रीय महत्व की संस्था के रूप में संसद द्वारा कानूनन मान्य अथवा राष्ट्रीय पुस्तकालय, भारतीय संग्रहालय, विक्टोरिया स्मारक व भारतीय युद्ध स्मारक, इम्पीरियल युद्ध संग्रहालय या भारत सरकार द्वारा पूर्णतः या अंशतः वित्तीय रूप से सहायित संस्थानों को इसमें रखा गया है। संघ सूची की 63वी प्रविष्टि में राष्ट्रीय महत्व की संस्थाओं का उल्लेख किया गया है, जैसे-बनारस

हिन्दू विश्वविद्यालय, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय व दिल्ली विश्वविद्यालय आदि ।

संघ सूची की 64वी प्रविष्टि में भारत सरकार द्वारा पूर्ण रूप से अथवा आंशिक रूप से वित्तीय सहायता प्राप्त वैज्ञानिक एवं तकनीकी संस्थान, जिन्हें संसद ने राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित किया है, का उल्लेख है। संघ सूची की 65वीं प्रविष्टि में प्रोफेशनल, वोकेशनल व तकनीकी प्रशिक्षण, विशिष्ट अध्ययन या अनुसंधान को प्रोत्साहन देने अथवा अपराध पहचानने में अनुसंधान के लिए संघीय अभिकरणों व संस्थाओं का उल्लेख है।

संघ सूची की 66वीं प्रविष्टि में उच्च शिक्षा या अनुसंधान और वैज्ञानिक व तकनीकी संस्थानों में मानकों के निर्धारण और समन्वय का उल्लेख है।

संघ सूची की 13वीं प्रविष्टि में विदेशों में शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सम्बन्ध, अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलनों, परिषदों व अन्य निकायों में सहभागिता व वहाँ लिये गये निर्णयों के अनुपालन का उल्लेख है। राज्य सूची में 66 विषय है व दो प्रविष्टियाँ शिक्षा से सम्बन्धित हैं राज्य सूची की 11वीं प्रविष्टि में प्रथम सूची की 63, 64, 65 व 66वीं प्रविष्टियों व तीसरी सूची की 25वीं प्रविष्टि के प्रावधानों के अधीन विश्वविद्यालय शिक्षा सहित शिक्षा को रखा गया है। राज्य सूची की 12वीं प्रविष्टि में राज्य द्वारा नियंत्रित या वित्तीय सहायता प्राप्त पुस्तकालयों, संग्रहालयों व अन्य समान संस्थाओं को रखा गया है। इसमें संसद द्वारा कानून बनाकर अथवा कानून के तहत् राष्ट्रीय महत्व की संस्था के रूप में घोषित चीजों के अलावा प्राचीन या ऐतिहासिक इमारतों व अभिलेखों का भी वर्णन है।

तीसरी समवर्ती सूची में 47 प्रविष्टियाँ हैं। इनमें से 20वीं प्रविष्टि आर्थिक व सामाजिक नियोजन तथा 25वीं प्रविष्टि में व्यावसायिक व तकनीकी श्रमिक प्रशिक्षण को शामिल किया गया है। 1976 में स्वर्ण सिंह समिति ने शिक्षा को समवर्ती सूची में शामिल करने की सिफारिश की। इस संविधान संशोधन को संसद के दोनों सदनों व कई राज्य विधान सभाओं की स्वीकृति मिल गयी थी। तब से शिक्षा समवर्ती सूची में ही है।

संविधान की आठवीं अनुसूची में धारा 344 (1) व 351 (1) में 15 भाषाओं को मान्यता दी गयी है। ये भाषाएँ निम्न हैं-(1) असमिया, (2) बंगाली, (3) गुजराती, (4) हिन्दी, (5) कन्नड़, (6) कश्मीरी, (7) मलयालम, (8) मराठी, (9) उड़िया, (10) पंजाबी, (11) संस्कृत, (12) सिंधी, (13) तमिल, (14) तेलुगु, (15) उर्दू 1992 में किये गये संविधान संशोधन द्वारा कोंकड़ी, मणिपुरी और नेपाली को संविधान के आठवें अनुच्छेद में शामिल कर लिया गया।

मेरा नाम संध्या गुप्ता है, मैं इस ब्लॉग का लेखक और सह-संस्थापक हूं। मेरा उद्देश्य इस ब्लॉग के माध्यम से आपको कई विषयों की जानकारी देना है। मुझे ज्ञान बांटना अच्छा लगता है। अगर आप मुझसे कुछ सीख सकते हैं, तो मुझे बहुत खुशी होगी।

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