चक्रवात के कारण एवं उनसे बचाव के उपाय

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प्राकृतिक प्रकोपों में तूफान और चक्रवात भी बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान करते हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका का टारनेडो, प. द्वीपसमूह का हरीकेन और द. पू. एशिया का टाइफून क्षण में विनाश का ताण्डव उपस्थित करते हैं। भारत में उष्ण चक्रवातों के प्रभाव से उत्पन्न समुद्री तूफान तटवर्ती प्रदेशों में प्रलय का दृश्य उपस्थित कर देता है। 1964 में मिदनापुर चक्रवात के कारण 80 हजार और मछलीपट्टनम चक्रवात के कारण 40 हजार लोग काल-कलवित हुए। इसी प्रकार के भयंकर चक्रवातीय तूफान विश्व के अनेक उष्ण कटिबन्धीय क्षेत्रों में आते रहते हैं और लाखों लोगों की जान लेते हैं जिससे अपार सम्पत्ति का नुकसान होता है। भारत में सबसे अधिक तूफान बंगाल की खाड़ी में जन्म लेते हैं और सम्पूर्ण पूर्वी तटीय क्षेत्र में तबाही मचाते हैं। सन 1991 में बांग्लादेश में आये समुद्री तूफान ने एक लाख से अधिक लोगों की जान ले ली, लाखों को बेघर किया और करोड़ों की सम्पत्ति का नुकसान पहुँचाया। इसके कारण बन्दरगाहों का जीवन भी अस्त-व्यस्त हो गया। तूफानों को रोकना मनुष्य के बूते के बाहर हैं लेकिन इनकी हानियों को कम किया जा सकता है। तूफानों की पूर्व चेतावनी, तूफानी क्षेत्रों में जनसंख्या का कम बसाव और इनके प्रभाव के क्षेत्र में मकानों, पुलों, सड़कों और संचार के साधनों के उचित निर्माण प्रभावी उपाय हैं। तूफान और चक्रवातों की पूर्व चेतावनी देने के आधुनिकतम साधन विश्व के सभी देशों में स्थापित किये जा रहे हैं। भारत अपने मौसम विज्ञान विभाग (Indian Metereological Deptt.) के माध्यम से ऐसी सूचनाएँ एकत्र कर चेतावनी देने का कार्य करता है। भारत के तटवर्ती क्षेत्र में राडार केन्द्र स्थापित कर समुद्री तूफानों की चेतावनी दी जाती है। उपग्रहों से प्राप्त चित्र आज ऐसी चेतावनी के प्रमुख आधार बन गये हैं। फिर भी इतने बड़े देश के लिए तूफानों से होने वाली हानि का आंकलन कठिन है। कुछ वर्ष पूर्व सारी चेतावनी के बावजूद आन्ध्र प्रदेश में तूफानी चक्रवात ने लाखों लोगों को बेघर कर दिया था और करोड़ों की सम्पत्ति को नुकसान पहुँचाया या।

तूफान एवं चक्रवात के रूप–विश्व में तूफानों के कई रूप देखने को मिलते हैं। शीत कटिबन्ध में तूफान ब्लीजई कहलाता है और तेज झोंके के साथ गहरा हिमपात कर जीवन को अस्त-व्यस्त कर देता है। समशीतोष्ण कटिबन्ध में भी इनका प्रकोप देखा गया है। कनाडा, संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोप और सोवियत संघ में इनके कारण अपार क्षति होती है। जापान और चीन में भी बर्फीली आंधी भयानक होती है। उष्ण और उपोषण क्षेत्रों में चक्रवात, हरीकेन, टाइफून और टारनेडो संहारक रूप ले लेते हैं। इनके कारण समुद्री तूफान भी जन्म लेता है जो तटवर्ती क्षेत्रों में बाढ़ और जलप्लावन को अपार क्षति पहुँचाता है। चक्रवाती वर्षा कभी-कभी महाप्रलय का रूप लेती है। 1970 में बांग्ला देश में आये चक्रवाती तूफान से3 लाख लोगों की मृत्यु हुई और करोड़ों की सम्पत्ति तहस-नहस हो गई। 1900 में आन्ध्र प्रदेश के तूफान के कारण एक हजार लोग काल-कलवित हुए और 30 हजार मकान धराशायी हो गये। विश्व में तूफानों का अधिक कुप्रभाव तटीय क्षेत्रों पर पड़ता है। संयुक्त राज्य अमेरिका का प्रशान्त और अटलाण्टिक तट क्रमशः टानरेडो और हरीकेन की चपेट में आता रहता है। इसी प्रकार मैक्सिको तथा दक्षिण अमेरिका के देश भी तूफानों से आक्रान्त रहते हैं। एशिया में जापान, चीन और दक्षिणी पूर्वी एशिया के द्वीप, भारत,

बांग्लादेश, म्यांमार और अफ्रीकी देश इससे अधिक प्रभावित रहते हैं। 1946 से 1970 के मध्य जापान में 59 टाइफून तूफानों से 14 हजार लोग मारे गये और 6 लाख मकान नष्ट हुए। इसी अवधि में यहां 89 भयंकर चक्रवातों का आतंक हुआ जिससे 8 हजार लोग मारे गये और 66 हजार मकान नष्ट हुए। भारत में विनाशकारी चक्रवातों का आगमन कुछ वर्ष के अन्तराल पर होता रहता है। 1900 के आन्ध्र प्रदेश चक्रवात का विनाश अभी सर्वोपरि है, जिसमें 3 लाख लोग बेघर हुए, 600 मारे गये, 90 हजार पशु मारे गये, 100 करोड़ की सम्पत्ति नष्ट हुई थी। तूफान एवं चक्रवात से बचाव-इन तूफानों से बचाव के लिए विकसित देशों में अनेक यन्त्रों से संग्रहीत सूचनाओं का प्रयोग किया जा रहा है। उपग्रहों से प्राप्त चित्र, राडार चित्र और ऐसे ही साधनों से प्राप्त सूचनाओं से इनकी भविष्यवाणी और चेतावनी प्रसारित की जाती है। विकासशील देश अभी इन सुविधाओं से वंचित हैं। भारत अपनी उपग्रह प्रणाली से उपयोगी सूचना प्राप्त करता है जो ऐसे तूफानों के आगमन के पूर्व चेतावनी के रूप में प्रसारित की जाती है। रेडियो और दूरदर्शन के प्रचार से यह काम आसान हो गया है। फिर भी इन तूफानों की मार झेलने के लिए तैयार रहना एकमात्र रास्ता है, क्योंकि इनका मार्ग स्थायी नहीं है। कभी-कभी पश्चिमी बंगाल के तट की ओर आता तूफान डांग्लादेश की ओर मुड़ जाता है और देखते-देखते ताण्डव का दृश्य उपस्थित कर देता है। भारत में सर्वाधिक तूफान बंगाल की खाड़ी में जन्म लेते हैं। बंगाल में इन्हें काल बैसाखी कहा जाता है।

मेरा नाम संध्या गुप्ता है, मैं इस ब्लॉग का लेखक और सह-संस्थापक हूं। मेरा उद्देश्य इस ब्लॉग के माध्यम से आपको कई विषयों की जानकारी देना है। मुझे ज्ञान बांटना अच्छा लगता है। अगर आप मुझसे कुछ सीख सकते हैं, तो मुझे बहुत खुशी होगी।

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