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environmental pollution

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भारतवर्ष में जनसंख्या वृद्धि के कारणों का उल्लेख कीजिए।

जनसंख्या विस्फोट या मानव जनसंख्या वृद्धि (Population Explosion or Human Population Growth) पृथ्वी के किसी भू-भाग में एक निश्चित समय पर उपस्थित जीवों की कुल संख्या को जनसंख्या या आबादी कहते हैं। मनुष्य एक जीवित प्राणी है जिसमें प्रजनन की...

भूकम्प आपदा को समझाइए तथा भूकम्प आपदा प्रबन्ध के उपायों की विवेचना कीजिए।

भू-पटल को प्रभावित करने वाली प्राकृतिक शक्तियों में भूकम्प एक यकायक उत्पन्न होने वाली सर्वाधिक शक्तिशाली शक्ति है। भूकम्प, धरातल के वे कम्पन होते हैं जो प्राकृतिक शक्तियों के प्रभाव से उत्पन्न होते हैं। प्राकृतिक आपदाओं में भूकम्प सर्वाधिक हानिकारक...

भूस्खलन

जब चट्टानें प्राकृतिक या मानवीय कारणों से चटख जाती हैं तो गुरुत्वबल से धराशायी हो जाती है जिसे भूस्खलन कहा जाता है। ऐसी घटनाएँ अधिकतर पहाड़ी क्षेत्रों में घटित होती हैं। भूस्खलन के मलवे से गाँव और शहर उजड़...

बाढ़ के कारण

(1) वनस्पति विनाश (2) वर्षा की अनिश्चितता (3) नदी तल पर अधिक मलवे का जमाव, (4) नदी की धारा में परिवर्तन, (5) नदी मार्ग में मानव निर्मित व्यवधान (6) तटबन्ध और तटीय अधिवास हाल के वर्षों में बाढ़ का...

बाढ़-कारण एवं नियन्त्रण

बाढ़ प्राकृतिक प्रकोपों में सबसे अधिक विश्वव्यापी है। यदि जल प्लावन ऐसे क्षेत्र में होता है जहाँ सामान्यतया पानी नहीं रहता है तो उसे बाढ़ कहते हैं। उदाहरणार्थ, जब वर्षा का जल अपने प्रवाह मार्ग (नदी, नाला) से न...

चक्रवात के कारण एवं उनसे बचाव के उपाय

प्राकृतिक प्रकोपों में तूफान और चक्रवात भी बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान करते हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका का टारनेडो, प. द्वीपसमूह का हरीकेन और द. पू. एशिया का टाइफून क्षण में विनाश का ताण्डव उपस्थित करते हैं। भारत...

भूकम्प क्या है ? भूकम्प के कारणों तथा प्रभावों का वर्णन कीजिए।

भूकम्प का सामान्य अर्थ 'पृथ्वी का कम्पन' है। जिस प्रकार किसी तालाब के शान्त जल में पत्थर का टुकड़ा फेंकने से गोलाकार लहरें केन्द्र से चारों तरफ बाहर की ओर प्रवाहित होती हैं, उसी प्रकार जब कहीं भूकम्प उत्पन्न...

आपदा प्रबन्धन से क्या अभिप्राय है ? आपदा प्रबन्धन के विभिन्न पक्षों की चर्चा...

प्रकृति की घटनाएँ जब चरम रूप ग्रहण कर लेती है तो उनसे मानव सहित सम्पूर्ण जैव जगत कठिनाई में पड़ जाता है और कभी-कभी विनाश की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। ऐसी घटनाएँ कभी-कभी इतनी त्वरित होती है कि...

पर्यावरण के प्रति मानव की नैतिक जिम्मेदारी पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

मानव भू-पटल के विभिन्न वातावरणों में उन क्षेत्रों के वातावरण के साथ अपना समायोजन स्थापित कर जीवनयापन करता है। मानव ने आधुनिक तकनीक के बल पर अनेक स्थानों के वातावरण में अत्यधिक परिवर्तन कर वहाँ पर्यावरण असन्तुलन की स्थितियाँ...

“पर्यावरण प्रदूषण ने मानव समाज को रोगग्रस्त कर दिया है।” इस कथन की विवेचना...

पर्यावरण के सन्दर्भ में पूर्व के वर्णन से यह बातें स्पष्ट है कि हमारे चारों ओर का वातावरण पर्यावरण कहलाता है और हम स्वयं भी पर्यावरण के अंग है। लेकिन एक विशेषता मनुष्य में अन्य जीवों से यह है...

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