जलक्रमक पर संक्षिप्त टिप्पणियाँ

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जल (water) में होने वाले अनुक्रमण को, जलक्रमक (hydrosere) कहते हैं, जैसे—झील, तालाब इत्यादि। यदि जल खारा (salty) हो तो उसे लवण क्रमक (holosere) कहते हैं। इसमें निम्नलिखित अवस्थायें होती हैं

(1) पादप प्लवक अवस्था (Phytoplankton stage)

(2) निमग्न अवस्था (Submerged stage)

(3) प्लावी अवस्था (Floating stage)

(4) रीड स्वेम्प अवस्था (Reed swamp stage)

(5) मार्स मीड्यू अवस्था (Marsh meadew stage)

(6) वनस्थली अवस्था (Woodland stage)

(7) वन अवस्था (Forest stage)

पादप प्लवक अवस्था (Phytoplankton stage)

इस अवस्था (stage) को जलक्रमक (hydrosere) की पुरोगामी अवस्था (pioneer stage) भी कहते हैं क्योंकि इसमें प्राथमिक माध्यम को बसाते हैं। इसके अन्तर्गत जल में पाये जाने वाले हरी शैवाल (green algae), नील हरित शैवाल (blue green algae) डायटम्स (diatoms) इत्यादि आते हैं जो पानी में पाये जाने वाले जीव-जन्तु के लिए भोजन का निर्माण करते हैं। निमग्न अवस्था (Submerged stage)

इस प्रकार की अवस्था (stage) पादप प्लवक अवस्था (phytoplankton stage) के बाद आती है। पादप प्लवक (phytoplankton) की मृत्यु (death) एवं उनके अपघटन (decompose) होने के बाद इस अवस्था (stage) में जलाशय या तालाब के तल में कीचड़ पायी जाने लगती है। इस अवस्था (stage) में हाइड्रिला (hydrilla), पोटेमेजेटान (potamegeton), इलोडिया (elodea), वेलिसनेरिया (vallisnaria), मायरोफिलम (myriophyllum) इत्यादि पौधे पाये जाते हैं। उपरोक्त पौधों की मृत्यु (death) एवं उनके अपघटन (decompose) के पश्चात् तल की गहराई क्रमशः कम होने लगती है। इसके बाद यह स्तर दूसरे पौधे के आवासीय स्तर में बदल जाता है।

प्लावन अवस्था (Floating stage)

यह अवस्था (stage) निमग्न अवस्था (submerged stage) के पश्चात् आती है। इस अवस्था (stage) में तालाब या जलाशय की गहराई क्रमशः कम होने लगती है, करीब-करीब 6 फुट से 10 फुट तक। वातावरण बदलने से इसमें नये तरह के पौधे जैसे जलयुक्त पौधे एवं स्वतन्त्र प्लावी पौधे दिखाई देने लगते हैं। ट्रापा (trapa), न्यूफर (newpher), नीलम्बो (nelumbo), साल्वीनिया (salvinia), एजोला (azolla), निम्फिया (nymphia) एवं मोनोकोरिया (monochoria) । इन पौधों की मृत्यु (death) एवं अपघटन (decompose) होने के पश्चात् धीरे-धीरे तैरने वाली जातियाँ विलुप्त होने लगती हैं और एक नये आवासीय स्तर का निर्माण होने लगता है।

नरकुल अवस्था (Reed swamp stage)

यह अवस्था (stage) निमग्न अवस्था (floating stage) के पश्चात् आती है। इस अवस्था (stage) में जल की गहराई 1 फुट से 4 फुट रहती है। इस अवस्था में पौधे प्रायः सीधे खड़े रहते हैं यह स्तर जल स्थलीय (amphibious) कहलाता है। इस अवस्था में पौधों के तने का कुछ भाग वायु में रहता है। इसके कारण इस प्रकार के पौधों में वाष्पोत्सर्जन (transpiration) की क्रिया (process) भी होने लगती है। उदाहरण रीड (read), टाइफा (typha), सेजीटेरिया (sagittaria) । इस प्रकार के पौधों की मृत्यु एवं अपघटन क्रिया के पश्चात् नयी अवस्था आने लगती है। मार्स मीड्यू अवस्था (Marsh meadew stage)

यह अवस्था (stage) नरकुल के बाद आती है। इसमें जल का स्तर घटने लगता है। इस अवस्था में ग्रेमिनी (gramineae), सायप्रेसी (cyperaceae) के पौधों का उद्भव होने लगता है। वाष्पोत्सर्जन (transpiration) के कारण जल की तेजी से हानि होने लगती है। दलदली जमीन धीरे-धीरे समाप्त होने लगती है और जमीन क्रमशः धीरे-धीरे शुष्क (dry) होने लगती है। वनस्थली अवस्था (Woodland stage) यह अवस्था (stage) मार्स मीड्यू अवस्था (Marsh meadew stage) के बाद आती है।

दलदली पौधे धीरे-धीरे विलुप्त होने लगते हैं। जमीन शुष्क होने लगती है और फिर नया आकाशीय स्तर बनता है। अब यह स्थान कुछ स्थलीय पौधों, झाड़ियाँ (shrubs) एवं छोटे-छोटे वृक्षों द्वारा भरा जाने लगता है। इस अवस्था में सूक्ष्म जीवों के साथ ह्यूमस (humus) भी दिखाई देने लगता है।

वन अवस्था (Forest Stage)

यह अवस्था (stage) वनस्थली अवस्था (woodland stage) के पश्चात् आती है। इस अवस्था (stage) को हम चरम अवस्था (climax stage) भी कहते हैं। वनस्थली अवस्था में अब नये नये पौधों का उद्भव होने लगता है। जलवायु के अनुसार नये-नये वनों का निर्माण होने लगता है। इस अवस्था (stage) में नये वृक्ष बड़े एवं अधिक ऊँचाई वाले होते हैं। उदाहरण— एल्म

मेरा नाम संध्या गुप्ता है, मैं इस ब्लॉग का लेखक और सह-संस्थापक हूं। मेरा उद्देश्य इस ब्लॉग के माध्यम से आपको कई विषयों की जानकारी देना है। मुझे ज्ञान बांटना अच्छा लगता है। अगर आप मुझसे कुछ सीख सकते हैं, तो मुझे बहुत खुशी होगी।

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