आतंकवाद विरोधी दिवस 2021 निबंध भाषण शायरी Anti Terrorism Day in Hindi

आतंकवाद विरोधी दिवस 2021 पर निबंध कविता व अनमोल वचन शायरी भाषण शपथ ( Anti Terrorism Day in India, Poem, Quotes in Hindi)

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आतंकवाद विरोधी दिवस पर निबंध भाषण

इस संसार में हमें प्रतिदिन किसी ना किसी आतंकवादी के द्वारा फैलाये आतंक की घटना सुनने को मिल ही जाती है. इसके पीछे का कारण है कि सभी आतंकवादी संगठन दुनिया के हर इंसान के अंदर अपने नाम का डर पैदा करना चाहते हैं. इन आतंवादियों के अंदर इंसानियत और रहम नाम की भावनाएं बिलकुल भी नहीं होती है, इन भावनाओं को खत्म करने के लिए  इनका ब्रैनवास किया जाता है. जिसकी वजह से इन लोगों को किसी भी मासूम को मारने में थोड़ी सी भी हिचकिचाहट नहीं होती है. संसार के लगभग सभी देश आतंकवादियों के खिलाफ हैं, क्योंकि इन आतंकवादियों के बमों के धमाके हर देश में हजारों- लाखों की संख्या में निर्दोष लोगों की जान ले लेते हैं. इसी वजह से सभी देश एक साथ मिलकर आतंकवाद को जड़ से उखाड़कर फेकना चाहते हैं. लेकिन इस मिशन को पूरा करने के लिए हमें लोगों के अंदर शांति एवं इंसानियत की भावनायें जगानी होंगी. भारत की सरकार ने सबसे पहले दुनिया के सामने आकर आतंकवाद के खिलाफ कदम उठाये हैं, इसके साथ ही भारत सरकार ने हर साल आतंकवाद विरोधी दिवस मनाने का फैसला लिया है.

आतंकवाद विरोधी दिवस कब मनाया जाता है  (International anti-terrorism date)

भारत के पूर्व प्रधान मंत्री वी पी सिंह ने  21 मई को आतंकवाद विरोधी दिवस मनाने की घोषणा की थी. तब से हर साल भारत में 21 मई को केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार मिलकर इस दिन को मनाने के लिए तमाम तरह के कार्यक्रमों का आयोजन करती हैं.  इस दिन सिर्फ भारत में नहीं बल्कि संसार के सभी देशों में होने वाली आतंकवादी गतिविधियों को ध्यान में रखकर ही आतंकवाद के खिलाफ फैसले लिए जाते हैं.

हर साल की तरह 2021 में भी आतंकवाद विरोधी दिवस मनाया जाना है, 21 मई   को भारत में आतंकवाद की इस बड़ी समस्या के खिलाफ विभिन्न कार्यक्रम संपन्न किए जाएंगे. अगर आप चाहें तो आप भी सरकार की आतंकवाद के खिलाफ इस मुहीम में शामिल हो सकते हैं. 

Anti Terrorism Day

आतंकवाद विरोधी दिवस का इतिहास (Anti Terrorism day historical past)

  • भारत के प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के बाद इस पद को संभालने की जिम्मेदारी राजीव गाँधी को दी गई थी. भारत में सबसे कम उम्र में प्रधानमंत्री बनने का रिकॉर्ड राजीव गाँधी ने ही बनाया था, इनको जनता से जुड़कर रहने वाला प्रंधानमंत्री कहा जाता था. लेकिन कुछ आतंकवादियों को इनकी इंसानियत से नफरत होने लगी थी.
  • उस समय भारत के प्रधानमंत्री का रैली में जाना और लोगों से सीधे मिलना आम बात थी. क्योंकि पहले प्रधानमंत्री की इतनी शख्त सिक्योरिटी नहीं हुआ करती थी.  राजीव गाँधी से मिलने के लिए किसी भी नागरिक को बहुत इंतजार नहीं करना पड़ता था, ऐसी राजनीती करने की वजह से बहुत से आतंकवादी संगठन  राजीव गाँधी से नाराज थे. क्योंकि राजीव गाँधी लोगों के अंदर इंसानियत एवं शांति की भावना जगा रहे थे. जिससे आतंकवाद संगठन प्रभावित होते थे. राजीव को रोकने के लिए इन्हें बहुत सी धमकियाँ दी गई, लेकिन इन्होंने अपनी राह पर चलते रहना उचित समझा.
  • इतना सब हो जाने के बाद राजीव गाँधी जी ने तमिलनाडु में एक रैली करने का निश्चय लिया . इसी रैली के दौरान एक महिला, राजीव गाँधी से मिलने की बार-बार गुजारिश कर रही थी.  उस समय लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम नाम के संगठन ने प्रधानमंत्री को मारने की साजिश रची थी एवं इस महिला का सम्बन्ध इसी संगठन से था. किसी को भी उस समय इस साजिश का अंदाजा ही नहीं हुआ और महिला आतंकवादी को राजीव गाँधी से मिलने की इजाजत दे दी गई. जिसके चलते एलटीटीई की महिला आत्मघाती हमलावर (सुसाइड बॉम्बर) ने इन पर हमला किया और राजीव गाँधी का जीवन समाप्त हो गया.
  • उसी समय राजीव गाँधी के पास में खड़े 25 और लोग इस बम का शिकार हुए थे, इन हत्याओं के बाद सरकार ने आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कड़े कदम उठाना शुरू कर दिया.

आतंकवाद विरोधी दिवस क्यों मनाया जाता है 

इस दिन को मनाने की शुरुआत करने के पीछे भारत में होने वाले आतंकी हमलों पर रोक लगाना था. आतंकवाद भविष्य में कितना खतरनाक साबित हो सकता है, इस बात का अंदाजा आतंकी हमले में देश के प्रधानमंत्री की जान जाने से  ही लगाया जा चुका था. भारत के प्रधानमंत्री की हत्या हो जाना कोई मामूली बात नहीं थी, इस समय पूरा देश में राजीव गाँधी की मृत्यु के शोक में डूबा हुआ था. इसके साथ ही सरकार को देश के लोगों की सुरक्षा एवं आतंवादियों के खिलाफ नए फैसले लेना भी जरुरी हो चुका था. इसके लिए आतंकवादियों को समाप्त करने के लिए सरकार ने कई अहम फैसले लिए एवं राजीव की मृत्यु के बाद भारत के नए प्रधानमंत्री ने वी. पी. सिंह ने आतंकवाद विरोधी दिवस को मनाने की घोषणा कर दी. जिससे पूरे देश को आतंकवाद के खिलाफ एकजुट किया जाए एवं आतंकी संगठन को खत्म करने की मुहीम चलाई जा सके.

आतंकवाद विरोधी दिवस कैसे मनाया जाता है 

स्पेशल मीटिंग को बुलाना

इस दिन आतंकवाद से निपटने के लिए सेमिनार कॉन्फ्रेंस एवं मीटिंग आदि का आयोजन सुचारु रूप से किया जाता है. 21 मई के दिन भारत के कई विशेषज्ञ आतंकवादियों को मिटाने के तरीके एवं योजनायें सबके सामने लाते रहते हैं.

आतंकवाद से निपटने के लिए नए लोगों को जोड़ना

भारत के कई शिक्षा संस्थानों में आतंकवाद को खत्म करने से होने वाले फायदे बताये जाते हैं, इसके साथ-साथ स्कूल या कॉलेज के बच्चों को आतंकवाद खत्म करने में अपना सहयोग देने के लिए उत्साहित किया जाता है.

रैली का आयोजन (Rally)

आतंकवाद विरोधी दिवस के दिन भारत के कई शहरों में आतंकवाद के खिलाफ रैलियां निकालकर लोगों को आतंकवाद से होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक किया जाता है. इन रैलियों के आयोजन करने का कारण लोगों को आतंकवाद के खिलाफ एक साथ खड़ा करना है.

राजीव गाँधी को श्रद्धांजलि

इस दिन आतंकवाद का शिकार हुए हमारे देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी जी को नमन किया जाता है. सभी स्कूलों एवं कॉलेजों में राजीव गाँधी की आत्मा को शांति के प्रदान करने के लिए 2 मिनट का मौन रखा रखा जाता है.

आतंकवाद विरोधी दिवस का उद्देश्य

इंसानियत एवं शांति को बढ़ावा देना

संसार का हर व्यक्ति इस बात से सहमत होगा की आतंकवाद देश एवं समाज की तरक्की, सुख-शांति और डेवेलपमेंट के लिए बहुत बड़ा खतरा है. आतंकवाद विरोधी दिवस का मुख्य लक्ष्य आतंकवाद के बारे में जानकारी देना है कि आतंकवाद से कैसे बचा जाए. क्योंकि जिस व्यक्ति को आतंकवादिओं के द्वारा किये जाने वाले हमले के तरीकों के बारे में जानकारी होगी, वही आतंकबाद को रोकने में सही कदम उठा पायेगा.

जागरूकता फैलाना

भारत की केंद्र सरकार इस तरह के हिंसात्मक लोगों के खिलाफ लोगों को एकत्रित करने एवं जागरूक करने के लिए कई तरह के कार्यक्रम आयोजित करती है. इसके साथ-साथ सरकार लोगों को इन हिंसात्मक लोगों के प्लान के बारे में बताते है कि ये लोग कैसे हमला करते हैं और आपको अपने बचाव में क्या करना चाहिए.

लोगों को संगठित करना

इस दिन लोगों  के अंदर आतंकवाद के खिलाफ एकता का बीज बोने की कोशिश की जाती है. जिससे लोग आतंकवाद के खिलाफ चल रही मुहीम में अपने हाथ बटा सकें .

नौजवानों को आतंकवादियों के संपर्क में आने से रोकना

सभी आतंकवादी संगठन नौजवानों को अपना मोहरा बनाने के लिए कई तरह की चालें चलते रहते हैं. इसके लिए तरह-तरह के आतंकवादी संगठन नौजवानों को उपहार देते है जिससे वो आतंकी संगठन में शामिल हो जायें और इन नौजवानों को अंधकार में धकेलने की साजिश रचते हैं. इन सब चीजों का ध्यान रखते हुए सरकार नौजवानों को सिखाती है कि कैसे आतंकवादियों के फैलाये हुए इस जाल से निकला जाये.

आतंकवाद विरोधी दिवस पर अनमोल वचन ( a nti terrorism day quotes in hindi )

  1. इस संसार के दो पहलु हो सकते हैं पहला शांति और अमन का, दूसरा आतंक और डर से भरा. इन दोनों पहलुओं में से आप किस की तरफ जाना चाहते हैं, आपके ऊपर ही निर्भर करता है.
  2. आतंकवाद हमारे समाज का सबसे खतरनाक दीमक है, अगर इस खतरनाक दीमक को समय रहते इस समाज नहीं निकाला गया तो ये हमारे समाज को काफी मात्रा में हानि पहुंचा सकता है.
  3. आतंकवाद किसी एक जाति एवं धर्म से जुड़ा हुआ नहीं हैं, इन लोगों का केवल एक ही मकसद है लोगों के अंदर खौफ पैदा करना. क्योंकि आतंकवाद इस दुनिया पर डर की मदद से राज करना चाहता हैं.
  4. बन्दूक से निकली गोली सामने वाले व्यक्ति की जाति, धर्म या शिक्षा देखकर नहीं लगती हैं. इसलिए इस आतंकवाद के चलते हर किसी को नुकसान हैं और हमारी भलाई इसी में है कि हम एक साथ मिलकर ऐसे अहिंसात्मक लोगों का खत्मा कर दें.
  5. किसी भी देश का पिता ये नहीं चाहेगा कि उसका बेटा बचपन से बन्दूक उठाकर आतंकवादी बन जाए, क्योंकि बच्चों के हाथ में पेन शोभा देता है ना कि बन्दूक.
  6. यदि इस दुनिया बढ़ते आतंकवाद को नहीं रोका गया, तो हमारे डेवलॅपमेंट करने का कोई मतलब नहीं निकलेगा. क्योंकि कुछ समय बाद हमारे पास पैसा तो होगा लेकिन सुरक्षा नहीं.

इस संसार में सभी देश अपने-अपने हथियारों को विकसित करने में लगे हुए हैं. जब तक इन देशों की हथियार बनाने की सोच नहीं बदलती है तब तक आतंकवादियों को कहीं ना कहीं पनाह एवं हथियार मिलते रहेंगे .  इसलिए सबसे पहले सभी देशों को अहिंसा का मार्ग अपनाना पड़ेगा. इसके अलावा संसार के सभी मजबूत राष्ट्रों को एक साथ मिलकर आतंकवाद से लड़ना पड़ेगा, नहीं तो एक दिन आतंकवाद इस संसार को डर एवं आतंक से परेशान कर देगा.  इसलिए हम सभी को आतंकवाद को जड़ से खत्म करने के लिए एकजुट होना अतिआवश्यक है.

आतंकवाद विरोधी कविता शायरी ( Anti Terrorism Day Poem )

क्या नज़ारा हैं हैवानियत का
मासूमों के कत्ले आम का

कहते हैं लिया हैं बदला
अपने बीवी बच्चो का

ओ कायरो

कभी शेर सा दहाड़ कर देखों
क्यूँ गीदड़ की तरह वार करते हो

लड़ना हैं तो सामने आओ
क्यूँ बीवी के पल्लू में छीपते हो  

माना

ये आतंक हुआ दुश्मन के धरातल पर
पर, इंसानियत हैं हमारे अन्दर भर-भर कर

देंगे अपने भाईयों का साथ
लेकर हाथों में हाथ

हैं भारत माँ के लाल हम
लड़ेंगे और जीतेंगे हर एक जंग ||

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