स्टार्टअप कंपनी क्या है और कैसे काम करता है

[ad_1]

आपने Corporate के बारे में तो सुना होगा लेकिन क्या आप जानते हैं की Startup Corporate क्या है? इस StartUp शब्द को लोग बहुत से नए Ventures के साथ भी जोड़ते हैं।

उनका मानना ये है की ये firms कुछ इस प्रकार के होते हैं की जहाँ युवा लोग कुछ अपना नया undertaking स्टार्ट करते हैं, वो किसी Tech Primarily based Firms हों या कोई अपनी ही नयी cutting edge product हो. लेकिन सवाल उठता है की क्या सही में Startup Firms का सही माईने में अर्थ यही है.

एक बड़े Corporate के CEO का कहना है की एक StartUp ऐसी Corporate होती है जो की एक ऐसे drawback को clear up करने में विस्वास रखती है जिसका resolution evident नहीं है और जिसमे good fortune होने की भी कोई gurantee नहीं होती है.

तो अगर आपको भी जानना है की आखीर ये स्टार्ट अप इंडिया क्या है तो इस Put up को पूरी तरह से पढने और आखिर तक आपको भी एक concept हो जायेगा की सही में StartUp Corporate क्या होता है. तो फिर बिना देरी किये चलिए शुरू करते हैं.

स्टार्टअप कंपनी क्या है

Startup Company Kya Hai Hindi

एक Startup corporate या Startup उसे कहते हैं जो की एक ऐसा group है जिसे design किया जाता है एक बड़े scalable और repeatable industry fashion को प्राप्त करने के लिए. ये firms अक्सर नए बने हुए होते हैं और ये construction के section में होते हैं जिन्हें की दमदार marketplace analysis की जरुरत होती है.

ये शब्द “StartUp” इसलिए इतनी ज्यादा well-known हो गयी क्यूंकि जब dot-com bubble के दोरान बहुत सी नयी dot-com firms बनी थी तब लोग उस समय इन firms को startup firms कहकर भी पुकारते थे. जो की धीरे धीरे नए Firms के नाम होने का एक Pattern बन गयी.

एक startup corporate को हम एक छोटे बच्चे के जैसे भी समझ सकते हैं जिसे की आगे बढ़ने में अभी समय है. ये firms ऐसे services or products be offering करते हैं जो की पहले Marketplace में उपलब्ध नहीं थी जिससे दुसरे लोगों को इससे बहुत फ़ायदा होता है.

Startup Tradition क्या है

Startup कभी कभी informal angle को महत्व देते हैं ताकि उनके office में workers की eficiency बढाई जा सके. 1960 में Sir Douglas McGregor ने एक learn about से ये पाया गया है की Place of job में Stressed out punishment और rewards की कोई जरुरत नहीं है अच्छे effects पाने के लिए, ये उनके बिना भी हो सकता है.

कुछ लोग बिना की incentives के ही खुद motivated रहते हैं काम करने के लिए.

जब ये rigidity को उनके ऊपर से निकाल लिया गया तब उन्होंने पाया के staff और researchers अपने कामों में क्या center of attention दे पा रहे हैं जिससे total productiveness बढ़ जा रही है. इससे उन्हें अपने corporate के लिए कुछ ज्यादा succeed in करने के लिए attainable भी मिल रही है.

ये tradition धीरे धीरे evolve हो रही है और इसे higher firms अपना रहे हैं ताकि वो Startups के vibrant minds को seize कर सकें. इसी प्रथा को आगे बढ़ाते हुए Google ने विगत कुछ वर्षों में ऐसे कई firms खरीद लिए हैं जिन्हें उन्हें लगा की आगे अच्छे go back प्रदान कर सकते हैं.

इसके साथ ऐसे cultures से workers को काम करते वक़्त कोई rigidity नहीं होता है और वो अपना अच्छा productiveness corporate को दे सकते हैं. वो ज्यादा relaxed महसूस करते हैं जिससे वो मन दे कर अपना काम कर सकते हैं.

Co-founders कोन हैं

Co-founders उन लोगों को कहा जाता है जो की Startup firms के enlargement के दोरान उसके साथ contain रहे. कोई भी co-founder बन सकता है, चाहे वो corporate का आदमी हो या फिर बहार का.

मुख्य रूप से co-founder होते हैं Marketers, Engineers, Hackers, Project Capitalist, Internet Developer, Internet Designers और दुसरे जो की पहले से ही इन Firms से जुड़े हुए होते हैं.

इसलिए Co-Founders की कोई criminal definition नहीं होती है. किसी को Co-Founder तभी कहा जा सकता है जब उसके पास board of administrators, buyers or shareholders के विषय में जानकारी मेह्जुद हो और जो की अपना मन्तव्य रख पा रहा हो इन लोगों के सामने और Firms के दुसरे workers इसकी बात तो सुनें और अमल करने के लिए सोचें.

चूँकि Co-founders की कोई definitive settlement मेह्जुद नहीं है इसलिए आगे चलकर disputes का होना तो जायज सी बात है.

Inside Startups क्या है

बड़े और well-established firms अकसर ये take a look at करते हैं की कैसे ये खुद की Innovation तैयार करें, इसके लिए वो खुद ही Set Usaतैयार करते हैं जिन्हें की “inner startups” कहा जाता है.

ये Firms में एक अलग ही entity बनकर विकशित होते रहते हैं. और जब ये अपने नए Product के साथ marketplace में आते हैं तब उन्हें उस Firms के underneath ही इसे release करना होता है.

इससे बड़े firms को भी कहीं दुसरे firms को gain करने की जरुरत नहीं है. जब वो खुद ही अपने merchandise बना सकते हैं.

एक Startup हमेशा से Transient होता है

किसी भी Startup का organizational serve as होता है की वो हमेशा से एक repeatable और scalable industry fashion की तलाश करे. एक प्रसिद्ध व्यक्ति ने कहा है की Startup Founder के तीन मुख्य serve as होते हैं :

1. Product और उसके options के बारे में एक imaginative and prescient प्रदान करें

2. Trade Fashion के सभी चीज़ों के संधार्व में एक collection of hypotheses create करें: जैसे की कोन हैं shoppers? क्या हैं Distribution channels ? कैसे हम corporate को बना और finance कर सकते हैं ? इत्यादि.

3. जल्द से ये validate कर लें की क्या fashion proper है ये देखकर की Shoppers का कैसे behaviour है.

Startups को कैसे Fund किया जाता है?

अगर हम Startup और small industry की बात करें तब ये प्रारंभिक दोर में Founder’s saving, दोस्तों, members of the family या फिर Financial institution loans से ही fund किया जाता है.

लेकिन अगर StartUp A success रहा तब इसे Angel Buyers से further investment मिलती है. और बाद में Project Capitalist से और उसके बाद IPO (Preliminary Public Providing) से.

और ऐसे investment से Startup founder की fairness बहुत हद तक ख़त्म हो जाती है लेकिन वहीँ corporate की owenership diversifies हो जाती है.

और ऐसे में आगे Startup के unbiased entity के हिसाब से नहीं रह पाती जिसे के बाद में कोई बड़ी corporate acquistion कर लेती है या किसी दुसरे corporate के साथ merge हो जाती है. किसी छोटे Trade Proprietor के लिए ऐसे अपने keep watch over खोना भरी पड़ सकता है लेकिन Startup में ऐसा होना enlargement के लिए बहुत जरुरी है.

देखा जाये तो Startup proprietor और small industry proprietor दोनों marketers हैं लेकिन दोनों के number one serve as और investment सब अलग हैं अपने अपने industry fashion के हिसाब से.

भारत में Startup Corporate क्या है?

जब भी हम ये शब्द “Startup” सुनते हैं तब अक्सर हम थोडा confuse होते हैं की ये दोनों phrases “industry” और “Startup”के भीतर क्या अंतर है. भारत में अगर आप कोई भी नयी चीज़ की शुरुवात करते हैं तब उसे केवल Trade ही कहा जाता है, न की Startup. तो चलिए समझते हैं की आखिर ये Startup corporate भारत में क्या है.

Startup Corporate mainly बहुत ही अलग हैं conventional industry से, इसीलिए मैंने निचे कुछ महत्वपूर्ण issues के विषय में point out किया है जो की आपको Startup firms के बारे में समझने के लिए मदद करेंगे.

भारत में Startup Corporate (Startup Corporate in India)

अगर हम Enlargement की बात करें
जब भी हम conventional industry की बात करते हैं तब वहां enlargement के लिए कम scalability रहती है लेकिन Startup की बात ही कुछ अलग है क्यूंकि ये firms बहुत ही जल्द बढती है और बहुत ही कम समय में पुरे देश में बड़ी marketplace seize कर लेती हैं.

भारत में ज्यादातर startup Era Primarily based होते हैं जिनकी low price में prime scalability होती है. उदहारण के तोर पे आप PayTm को ले सकते हैं जो की एक Startup comapany FinTech ही है.

अब जो Cell Pockets Trade में बड़ी जोर से enlargement दिखा रही है और बहुत कम समय में On-line Cell Fee की Marketplace की एक बहुत ही बड़ी % को seize कर लिया है.

अगर आप किसी छोटे से marketplace में Instrument बेच रहे हों तब आपको Startup corporate नहीं कहा जायेगा. Startup में हमेशा innovation की जरुरत होती है और जिनकी prime scalability होती है.

Trade के लिए Investment
Conventional Trade और StartUps दोनों में Investment की जरुरत होती है अपने industry को चलाने के लिये. Conventional Trade के पास केवल एक possibility होता है पैसे के लिए जो की है Financial institution’s Mortgage.

जिसे के उन्हें Securities देने के बाद मिलता है. वहीँ StartUps में कई उपाय हैं investment के लिए जैसे की Angel Investor or Project Capitalist इत्यादि. जो की आपको पैसे देते हैं Stocks या Fairness के बदले में, यहाँ वो आपको किसी safety की call for नहीं करते हैं.

यहाँ Buyers को prime scalability और enlargement firms की तलाश होती है जो की उन्हें prime go back प्रदान करें. इसलिए जिन StartUps में ये Buyers अपना पैसा लगाते हैं वो उन्हें Mentorship भी प्रदान करते हैं Trade को चलने के लिए.

Go out technique का होना Beginning में
Conventional Busines में अगर आपका Loss हो जाये industry में तब आप उसे बंद करके दूसरा industry चुन सकते हैं क्यूंकि यहाँ possession आपके underneath होती है।

वहीँ StartUp में चूँकि investment Angel Investor या Project Capitalist करते हैं इसलिए beginning में ही आपके पास Go out Technique रहती है जैसे की दुसरे corporate के साथ merge होना, दुसरे बड़े corporate के द्वारा acquisition होना or IPO.

इसलिए यहाँ Investor आसानी से अपने Proportion को दुसरे Corporate या लोगों को बेचकर अच्छे returns के बदले go out कर सकता है.

Operating tradition
Conventional Trade में Conventional operating tradition होती है भारत में लेकिन Startups की बात ही कुछ और है यहाँ पर Workers का ख़ास ख्याल रखा जाता है.

यहाँ उनके places of work को sexy बनाया जाता है जिसके साथ अच्छे perks भी मिलते हैं. कुछ Startup firms तो अपने workers को wage के साथ stocks भी प्रदान करते हैं कम दामों में जिससे workers का motivation हमेशा बना रहे.

USP
Conventional industry का हमेशा से equivalent nature, technique और procedure होता है industry करने का लेकिन Startups firms भारत में पहले से ही काफी cutting edge थे जिससे उनकी Trade simplify हो जाती है और इससे Buyer और Marketplace के भीतर के बेहतर USP बना रहता है.

ये थे कुछ महत्वपूर्ण Five issues जो की भारत में StartUp Firms को outline करते हैं. NASSCOM File India के मुताबिक India पुरे विश्व में third place में आता है Startup ecosystem में.

StartUp में काम करने के फायदे और नुकसान

वैसे तो कोई भी काम करने के कुछ न कुछ फायदे और नुकसान होते ही हैं. ठीक वैसे ही Startup में काम करने के फायदे और नुकसान दोनों हैं. तो चलिए जानते हैं की इसमें काम करने के क्या फायदे और नुकसान हैं.

Startup के फायदे

1.  Distinctive Revel in का होना – यहाँ पर काम करने में आपको एक distinctive revel in प्राप्त होगा. यहाँ पर Hallways में केवल gaming rooms और skateboarding नहीं होती है उनके अलावा भी यहाँ काम करने के कई संसाधन होते हैं.

Startups को ये अच्छे से मालूम होता है की कैसे काम करने के beneficial setting तैयार करें. किसी भी industry को आगे बढ़ाने के लिए creativity और innovation की जरुरत होती है, जिसके लिए एक stimulating team of workers का होना अत्यंत जरुरी होती है.

2.  सिखने के लिए बहुत कुछ होता है – Startups में workers के ऊपर बहुत सारा दायित्व होता है जिससे उन्हें बहुत कुछ सिखने को मिलता है. वो आपको इसलिए चुनते हैं क्यूंकि आपकी talent उतनी अच्छी होती है, लेकिन founders आपसे और भी ज्यादा की उम्मीद रखते हैं.

आप starup को सभी तरह से आगे बढ़ने के लिए मदद करते हैं. अकसर आप अपने process description से ज्यादा काम करते हैं जिससे आपको एक अच्छी alternative मिलती हैं नया कुछ सिखने के लिए.

Founders और workers एक साथ काम करते हैं मिलकर, इसलिए यहाँ heart control नहीं होती, जिसकारण आपको best possible लोगों से सीखने को मिलती हैं.

3.  यहाँ पर Workers बिना किसी supervision के काम करती हैं. वो इसमें smart move लेते हैं और उनके परिणामों के लिए तैयार रहते हैं. जिससे उन्हें हमेशा आगे बढ़ने के लिए motivation मिलती है.

4.  आप innovate कर सकते हैं – Startups को जल्दी बढ़ने की जरुरत होती है. अगर वो समय रहते आगे न बढ़ें तब उन्हें कुचला भी जा सकता है. Workers को अपनी ability दिखने के पूर्ण अवसर मिलता हैं.

अगर उनके concepts को upper professional पसंद करती है तब इसके लिए उन्हें incentive भी प्रदान की जाती है ऐसे अच्छे काम करने के लिए.

5.  हमेशा आगे बढ़ने के लिए यहाँ force होती है, लेकिन एक dynamic power startup को आगे बढ़ने के लिए हमेशा power करती है. एक अजीब सा सुकून मिलता है अपने corporate को बढ़ते और घटते देख और यही चीज़ अपने group के साथ percentage करने से और भी खुशी प्राप्त होती है.

  • यहाँ के perks – पैसे ही नहीं इसके साथ आपको और भी दुसरे perks मिलते हैं जो की आको यहाँ काम करने के लिए उत्साहित करते हैं जैसे की :
  • आप house या घर से काम कर सकते हैं
  • छोटे paintings weeks का होना
  • बहुत ही informal setting
  • fitness center और दुसरे well being amenities
  • worker के लिए reductions और unfastened services and products
  • unfastened meals (और कभी कभी beverages!)

अगर हम लम्बे समय के benifit की बात करें तब भी हमें corporate के तरफ से बहुत से चीज़ें मिल सकती है, जैसे की एक अच्छी सी place (senior place, VC, Chairman), इसके साथ workers को इसमें अच्छे inventory possibility भी मिलते हैं.

Process pleasure – Workers यहाँ comapany की जन्म, enlargement और good fortune को percentage करते हैं. उसी लिए ये अभी के technology के लिए एक बहुत ही अच्छा profession trail है. उन्हें किसी एक अच्छे चीज़ का हिस्सा बनने की जरुरत होती है. जब corporate अच्छा carry out करती है तब वो गर्व कर सकते हैं की उनका इसमें कितना योगदान था.

Startup के नुकसान

1. Workload का ज्यादा होना – ये तय कर लें की आपको यहाँ बहुत समय तक काम करना होगा , बहुत ही कम छुट्टी मिलती है और कम holiday भी मिलता है.

Startup हमेशा से development के साथ काम करता है और इसलिए उन्हें development के साथ हमेशा exchange होना होता है cometition में हमेशा हिस्सा लेने के लिए. इसलिए Workers को ज्यादा effort देना पड़ता है. जिससे उन्हें rigidity होना आम सी बात है.

2.  Process की balance/safety – आप भले ही अपने काम को बहुत पसंद करते हों लेकिन आप इसे ज्यादा देर तक कायम नहीं रख सकते हैं.

Analysis से ये बात सामने आई है की 90% startup अपने पहले Three सालों के भीतर ही ख़त्म हो जाते हैं. मुख्य रूप से ये Tech Startup के साथ ये ज्यादा होता है क्यूंकि नए invention से उनके industry को बहुत ज्यादा नुकसान पहुँचता है.

3.  Startup founders के पास बहुत ही sensible concept होता है जिससे वो अपने undertaking के लिए अच्छा खासा seed cash निकाल लेते हैं. लेकिन इससे वो experinece chief नहीं बन जाते हैं. Sturdy Mentors की कमी उनके process balance को बहुत पहुंचती है.

4.  आप यहाँ ज्यादा नहीं कमा सकते हैं preliminary दिनों में – Buyers कभी भी aspiring marketers को ज्यादा wage नहीं देते हैं. वो मुख्यतः working prices, product construction, और buyer base को बढ़ाने में ज्यादा पैसे लगाते हैं. ज्यादातर circumstances में conventional firms की तुलना में startup में salaries कम ही होती है.

5.  Social existence का कम होना – आप भले ही अपने administrative center में काफी मस्ती कर रहे हों लेकिन आपको बहुत मेहनत भी करनी पड़ती है. यहाँ पर Workers को excessive force में काम करना पड़ता है ताकि loss को कम किया जा सके.

जिसके कारण social existence अपने आप ही कम हो जाता है. Paintings-life steadiness थोडा मुस्किल होता है और ज्यादा काम करने से आपकी सेहत में खराबी भी दिख सकती है.

Startup तब भी battle करते हैं जब वो बहुत ही बड़े मुकाम हासिल कर लेते हैं क्यूंकि era बदल रही है और Pageant दिनबदिन और भी ज्यादा मुस्किल होते जा रहा है.

यहाँ एक भी गलत कदम आपको race से बहार कर सकता है. इसलिए Startup की लढाई हमेशा से जरी है और ऐसे ही रहेगी.

आज आपने क्या सीखा

मुझे पूर्ण आशा है की मैंने आप लोगों को Startup Corporate क्या है के बारे में पूरी जानकारी दी और में आशा करता हूँ आप लोगों को Startup Corporate के बारे में समझ आ गया होगा.

मेरा आप सभी पाठकों से गुजारिस है की आप लोग भी इस जानकारी को अपने आस-पड़ोस, रिश्तेदारों, अपने मित्रों में Proportion करें, जिससे की हमारे बिच जागरूकता होगी और इससे सबको बहुत लाभ होगा. मुझे आप लोगों की सहयोग की आवश्यकता है जिससे मैं और भी नयी जानकारी आप लोगों तक पहुंचा सकूँ.

मेरा हमेशा से यही कोशिश रहा है की मैं हमेशा अपने readers या पाठकों का हर तरफ से हेल्प करूँ, यदि आप लोगों को किसी भी तरह की कोई भी doubt है तो आप मुझे बेझिजक पूछ सकते हैं.

मैं जरुर उन Doubts का हल निकलने की कोशिश करूँगा. आपको यह लेख स्टार्टअप योजना क्या है कैसा लगा हमें remark लिखकर जरूर बताएं ताकि हमें भी आपके विचारों से कुछ सीखने और कुछ सुधारने का मोका मिले.

“ मेरा देश बदल रहा है आगे बढ़ रहा है ”

आइये आप भी इस मुहीम में हमारा साथ दें और देश को बदलने में अपना योगदान दें.

Leave a Comment