मंत्रों में सबसे बड़ा मंत्र कौन सा है?

[ad_1]

हम इस लेख में ये जानेंगे की मंत्रों में सबसे बड़ा मंत्र कौन सा है? क्या इस स्रष्टि में कोई ऐसा मंत्र है जो सबसे बड़ा और शक्तिशाली हो? आखिर किस मंत्र के उच्चारण से मनुष्य अपने लक्ष्यों तक पहुँच सकता है.

ऐसे और कई सारे सवाल हमारे भीतर होते है, जिसे एकांत होकर अपने मन में खोजे तो शायद इसका ‘जवाब’ हमें ना मिले, तो चलिए आज हम इन सभी issues को duvet करेंगे और इन मंत्रो के बारे में और गहन अध्ययन करके आपको पूरी जानकारी देने की कोशिस करेंगे.

मंत्र क्या है?

sabse bada mantra kaun sa hai

हम इस पृथ्वी में रहने वाले सबसे समझदार प्राणी कहलाते है, जिसे मानव या मनुष्य कहा गया है. इसकी रचना विज्ञान की दृष्टी से देखे तो अलग और ईश्वरीय शक्तियों के द्वारा देखे तो मनुष्य के रचना कारक भगवन ब्रम्हा को कहा जाता है, खैर इसके ऊपर भी एक सत्य कहानी है जिसे हम फिर कभी आपसे रूबरू करवाएंगे.

पर अब बात आ जाती है की मंत्र होता क्या हैं.

तो चलिए अब जानते है, हिन्दू देवी-देवताओं के मंत्र और स्तोत्र है और उसी स्तोत्र के अंतर्गत उन देवी-देवताओं को सर्वस्व कहा गया है.

सर्वस्व याने जिन भी किसी भगवन जिनको आप अपना इष्ट मानते हो और उनको प्रशन्न हेतु आपके द्वारा पूजा, हवन या यज्ञो में निश्चित किये गए उन सभी शब्दों के एक समूह को मंत्र जाता है.

अब आपको इतने में Transparent हो गया होगा की आखिर मंत्र इसी को ही कहा जाता हैं. अब हम आगे बढ़ते है 2nd level की ओर.

दुनिया का सबसे बड़ा मंत्र कौन सा है?

पहले level में आपको मंत्र के बारे में बताया गया है की मंत्र क्या होता है, अगर मैं आपको ये कहू के कौन से भगवान या देवी-देवता सबसे बड़े होते है, तो क्या आप ये बता पायेंगे. जरा 2 मिनट सोच के देखिये.

नहीं आप नहीं बता पायेंगे की कौन से भगवन सबसे बड़े है, और आपके मन में अचानक से उथल-पुथल होने लगेंगी.

क्योकि ये सच है की इस स्रष्टि के रचनाकार भगवन कहे जाने वाले ब्रम्हा है तो, क्या हम उनको ही सबसे बड़ा भगवन कहेंगे या फिर भगवन शिव जी को जो, स्वयं सम्पूर्ण स्रष्टि को बचाने हेतु समुद्र मंथन द्वारा निकले विष को अपने कंठ में ग्रहन कर गए, या फिर उन देवियों को जो इस स्रष्टि में nine रूपों में विराजमान है.

अब आप इस बात पर जरुर यकीन करेंगे की दुर्गा के nine रूप शायद सबसे बड़े हो, क्योकि देवी का स्थान हमेसा से उपर ही रहा गया है. अगर हम कन्हे की ये सब आपके मन में चल रहे किसी बवंडर से कम नही तो कितनो को यकीन होगा. हम हमेशा यही सोचते हैं की आखिर सबसे बड़ा है कौन.

आपके घर में पूजा का एक स्थान जरुर होगा, जन्हा अनेको देवी-देवताओं के प्रतिमा, मूर्ति या पोस्टर विराजमान जरुर होंगे.

क्या आप पूजा करते समय गणेश जी का पैर छु कर शिव जी को भी प्रणाम नही करते या फिर पूजा स्थान में अन्य भगवानो की आराधना करना छोड़ देते है.

आप में से कितने ऐसे लोग होंगे जो माता लक्ष्मी जी की आराधना नही करते, ये तो 100% ascertain है की इस भारत देश में ऐशा कोई नही होगा जो माता लक्ष्मी जी की पूजा ना करे, अगर आप इस बात से सहमत है की हमें लास्ट में comments जरुर दे.

जैसे मैंने आपको ये समझाया की कोई भी भगवन, इश्वर, देवी या देवता छोटा या बड़ा नही होता उसी प्रकार हम किसी भी मंत्र को छोटा या बड़ा नही कह सकते.

ये एक instance था की आपको ये समझाया जाए की मंत्र तो अनेको है, पर आप जिस भी देवी-देवतओं को अपना ईस्ट मानते होंगे तो उनकी आराधना हेतु कुछ स्तुति और मंत्र के द्वारा उन्हें अपना मानकर सुख-दुख के निवारण और निराकरण हेतु इन्ही मंत्रो का उच्चारण करते है.

अब हम चलते है आने तीसरे Matter की ओर.

अंतरात्मा की शक्ति

इसके अंतर्गत आपको इतना बताना होगा की आप जिन किन्ही देवी-देवतओं को अपना ईस्ट या प्रमुख मानते है आप उनका ध्यान, मन शांत और आख बंद कर सच्चे मन से जिस भी मंत्र का उच्चारण करेंगे भगवान आपकी जरुर सुनेगा.

बस बात इतनी होनी चाहिए की आपकी लगन और मेहनत 100% होनी चाहिए, फिर देखिये भगवन आपके साथ होंगे ही.

भगवत गीता में श्री कृष्ण द्वारा एक वाक्य कहा गया है जिसको आपने कभी न कभी जरुर सुने होंगे वो वाक्य है, “कर्म करो पर फल की चिंता मत करो

इससे यह स्पष्ट होता है की आप अपना जिसमे भी 100% देने की कोशिस करते है उसका परिणाम आपको जरुर प्राप्त होता होगा.

क्या मंत्र से मोक्ष की प्राप्ति होती है?

इस सवाल का जवाब आपके लिए सायद सरल हो, क्योकि आपमें से कई लोग यही कहेंगे की हा मंत्र से मोक्ष की प्राप्ति होती हैं, पर ये गलत है.

अगर आप रामयण, भगवतगीता, सुखसागर या इसी तरह और भी कई सारे पुराणों का अध्ययन किये होंगे तो यह उनमे कंही नही लिखा है की मंत्र से मोक्ष की होती है.

कोई साधू यज्ञ के दौरान हजारो–लाखो मंत्रो का उच्चारण कर अपने आराध्य को प्रकट होने में विवश कर देते है, क्योकि उनको पुर्ण विश्वास होता ही है.

और इसी तरह इनके विपरीत राक्षशो में भी कई-कई वर्षो तक के तपश्या के कई सारे उदाहरणों में जरुर पढ़ें होंगे और ये भी अपने ईस्ट को प्रकट होने में मजबूर कर ही देते है, जिससे राक्षशो को आशीर्वाद में जो भी बल प्राप्त होता है वो उनका दुरूपयोग करते है, और साधू संत इनका सदउपयोग.

इससे आपको आपको क्या समझ आया की मंत्र से मोक्ष की प्राप्ति होती है तो इसका उत्तर है नहीं.

हम मंत्र से केवल ईश्वरीय शक्तियों को ग्रहण करते है और उसका उपयोग हमारे हाथो ही होता है.

जिस तरह रामयण में रावण एक अत्यधिक बुद्धिमानी, सक्तिशाली, तिनोलोको का विजेता होता है उसके बावजूद भी रावण ने शिव जी को कठिन शब्दों वाले मंत्रो से प्रकट किया, अब इसका यह अर्थ नही है की कठिन मंत्रो से ही भगवान प्रशन्न होते है.

पर उन्हें मोक्ष की प्राप्ति तब हुई जब राम जी द्वारा उनका वध हुवा ना के मंत्र जाप से.

इसका आसान सा उदाहरण यह है की, “मंत्र द्वारा मोक्ष की प्राप्ति होती है, ना की मंत्र से मोक्ष की.

अब हम इस लेख के आख़िरी कड़ी में आते है.

मंत्रो का उच्चारण कैसा होना चाहिए?

मंत्रो का उच्चारण 3 (तीन) तरह से करना सही होता है.

1. जो मुख से उच्चारण किया जाए याने तेज आवाजो द्वारा.

2. दूसरा वो जो मुख से उच्चारण तो हो पर उसे कोई दूसरा न सुन सके, मतलब की कम आवाजो का उपयोग कर के.

3. तीसरे में ना तो मुख के द्वारा आवाज की आवस्यकता होती है और ना ही ओस्ट के कम्पन्न की.

आपको इन तीनो में से कोई भी अच्छा प्रतीत हो या अच्छा लगे आप इनका उपयोग कर मंत्र का जाप कर सकते हैं.

आज आपने क्या सीखा

मुझे उम्मीद है की आपको मेरी यह लेख सबसे बड़ा मंत्र कौन सा है यह आपको जरुर पसंद आई होगी. मेरी हमेशा से यही कोशिश रहती है की readers को सभी दिलचस्प बातें जैसे की सबसे बड़ा मंत्र के विषय में पूरी जानकारी प्रदान की जाये जिससे उन्हें किसी दुसरे websites या web में उस article के सन्दर्भ में खोजने की जरुरत ही नहीं है.

यदि आपके मन में इस article को लेकर कोई भी doubts हैं या आप चाहते हैं की इसमें कुछ सुधार होनी चाहिए तब इसके लिए आप नीच feedback लिख सकते हैं.

यदि आपको यह लेख सबसे बड़ा मंत्र पसंद आया या कुछ सीखने को मिला तब कृपया इस पोस्ट को Social Networks जैसे कि Fb, Twitter और दुसरे Social media websites पर proportion कीजिये.

Leave a Comment