जीपीआरऍस क्या है – What’s GPRS Complete Shape in Hindi

[ad_1]

क्या आप जानना चाहते हैं की GPRS क्या है? शायद आपने GSM के विषय में सुना होगा, यदि हाँ तब आपको बता दूँ की GPRS असल में एक upgraded model है GSM का. GPRS के आने इसने Cellular Verbal exchange के दुनिया को बदल कर रख दिया. जहाँ पहले सभी cell phone programs में circuit switched channels का इस्तमाल होता था.

वहीँ पहले के mobile phone programs जिसमें की GSM भी शामिल है वो focussed थे केवल voice communications में ही, लेकिन तब cellular knowledge की भी जरुरत पनपने लगी थी और GPRS ऐसी पहली generation थी जो की इस जरुरत को sensible तरीके से पूर्ण करने में सफल रहा.

वैसे तो 2G GSM भी प्रदान करता था कुछ हद तक knowledge capacity, लेकिन ये काफ़ी ज्यादा sluggish था किसी भी actual packages में इस्तमाल करने के लिए. यही कारण है की, GPRS को increase किया गया जिससे की ये मदद प्रदान करे knowledge को maintain करने के लिए और इसके साथ ये एक stepping stone भी बन गया 3G की.

gprs kya hai hindi

इसलिए मैंने सोचा की क्यूँ न आप लोगों को जीपीआरऍस किसे कहते है के विषय में पूरी जानकारी प्रदान की जाये जिससे इसे बेहतर और पूर्ण रूप से समझने में आपको आसानी हो. तो फिर बिना देरी किये चलिए शुरू करते हैं.

जीपीआरऍस क्या है – What’s GPRS in Hindi

GPRS असल में एक growth है International Machine for Cellular Verbal exchange की. ये mainly एक packet-oriented cellular knowledge common है वो भी 2G और 3G mobile communique community’s world device में, वो भी cellular communique के लिए. GPRS को बनाया गया था Eu Telecommunications Requirements Institute (ETSI) के द्वारा.

GPRS override करता है stressed out associations को, क्यूंकि ये framework में streamlined get right of entry to मेह्जुद होता है packet data’s community के तरह जैसे की internet. Packet radio common को make the most of किया जाता है GPRS के द्वारा वो भी shipping करने के लिए shopper data packets को एक structured course में, GSM flexible stations और exterior packet data networks के बीच में. इन packets को straightforwardly direct किया जाता है packet modified programs को वो भी GPRS moveable stations से.

जीपीआरएस की परिभाषा

Normal Packet Radio Provider एक प्रकार का packet-switching generation होता है जो की permit करता है knowledge transfers वो भी mobile community’s world device के माध्यम से cellular communications (GSM) के लिए, वहीँ ये प्रदान करता है end-to-end, wide-area wi-fi IP connectivity भी.

GPRS transmission fee को toughen किया जा सकता है 56Kbps से 114Kbps तक भी. वहीँ इसमें present wi-fi packages की जरुरत नहीं होती है एक एक middleman converter के तोर पर, इस कारण connection और transmission बन जाते हैं ज्यादा handy और आसान. इस तरीके से, customers आसानी से go surfing कर सकते हैं Web में, वहीँ साथ में वो take part भी कर सकते हैं interactive communique में जैसे की video convention, और customers उसी समान video community (VRN) में attach हो सकते हैं community के साथ बिना dial-up के ही.

GPRS Complete Shape in Hindi

GPRS की फुल फॉर्म “Normal Packet Radio Provider” होती है, हिंदी भाषा में इसका अर्थ यह हुआ की यह एक ऐसी carrier है जो की knowledge को radio waves के जरिये transmit करने का काम करती है.
इसे हिंदी में “सामान्य पैकेट रेडियो सवाएं “ कहा जाता है.

जीपीआरएस का मालिक कौन है?

GPRS specs को लिखी गयी है Eu Telecommunications Usual Institute (ETSI) के द्वारा, यह एक Eu counterpart है American Nationwide Usual Institute (ANSI) की. इसलिए इसे हम GPRS का मालिक मान सकते हैं.

जीपीआरएस की मापदंड

GPRS असल में एक common ETSI के अंतर्गत लेकिन वहीँ इसे बाद में switch कर दिया गया third Era Partnership Mission (3GPP) को और वहीँ इसे put up कर दिया गया सन 1998 में. एक common के तोर पर, ये appropriate होता है 2G, 3G और WCDMA networks के साथ वो भी by the use of GPRS Core Community के साथ.

GPRS एक packet-switching communications protocol होता है, वहीँ इससे पहले दुसरे circuit-based switching protocols का इस्तमाल किया जाता था 2G networks पर. इसका मतलब ये भी है की इसमें knowledge supply होती है best-effort वाली; latency और deliverability थोडा range कर सकती है समय समय पर. High quality of Provider (QoS) आसानी से manageable नहीं होती है GPRS में क्यूंकि ये निर्भर करती है कितनी संख्या की दुसरे customers उस carrier को proportion कर रहे हैं.

जीपीआरएस के प्रमुख विशेषताऐं

चलिए अब जानते हैं की ऐसे कौन सी तीन key options है GPRS की जो की describe करती हैं wi-fi packet knowledge को:

1. हमेशा on-line वाली characteristic – ये मिटा देती है dial-up procedure को, जो की packages को बना देती है केवल one click on away.

2. यह एक improve है मेह्जुदा programs के साथ – इसमें Operators को उनके apparatus को exchange नहीं करना होता है; बल्कि, GPRS एक added options है उनके मेह्जुदा present infrastructure के ऊपर.

3. एक integral phase वो भी long run 3G programs का – GPRS एक packet knowledge core community होता है 3G programs EDGE और WCDMA के लिए.

GPRS का लक्ष्य

GPRS एक पहला कदम है end-to-end wi-fi infrastructure की और और इसकी कुछ लक्ष्य भी है जिनके विषय में चलिए जानते हैं :

  • Open structure का होना
  • Constant IP services and products प्रदान करना
  • समान infrastructure वो भी अलग अलग air interfaces के लिए
  • Built-in telephony और Web infrastructure
  • Leverage करना business funding वो भी IP में
  • इसकी Provider innovation पूरी तरह से unbiased होती है infrastructure से

GPRS में कैसी Products and services Be offering की जाती हैं?

अब चलिए जानते हैं की GPRS के द्वारा प्रदान की जाने वाली Products and services के विषय में.

1. SMS messaging और broadcasting

2. Push-to-talk over mobile

3. Immediate messaging और presence

4. Multimedia messaging carrier

5. Level-to-Level और Level-to-Multipoint services and products

GPRS के द्वारा Fortify किये जाने वाले Protocols क्या क्या हैं?

अब चलिए जानते हैं की वो ऐसे कौन कौन से Protocols हैं जिन्हें की GPRS Fortify करता है.

1. Web Protocol (IP)

2. Level-To-Level Protocol (PPP)

जीपीआरएस के फायदे क्या है?

GPRS generation काफी सारे advantages और benefits प्रदान करती है customers और community operators को वो भी elementary GSM device की तुलना में. इसे broadly deploy किया जाता था एक life like knowledge capacity प्रदान करने के लिए by the use of mobile telecommunications generation. अब चलिए जानते हैं की GPRS के benefits क्या हैं :-

Upper Knowledge Fee
GPRS shorter get right of entry to occasions में upper knowledge charges प्रदान करती हैं. GPRS प्रदान करती है switch fee as much as 115kbit/s (इसमें most होती है 171.2kbit/s, apart from FEC). इसका मतलब है की GPRS और ISDN customers आसानी से Web को surf कर सकते हैं वो भी moveable computer systems के जरिये.

Low Connection Price
GSM community में, excessive useful resource usage होती हैं. वहीँ GPRS ने पहली बार introduce किया packet-switching, transmission mode, जिससे की सही मायिने में circuit-switching GSM knowledge transmission mode का इस्तमाल होने लगा, वहीँ ये काफी ज्यादा महत्वपूर्ण था wi-fi useful resource shortage के लिए.

अब GPRS Customers की billing के लिए communique की knowledge quantity को major foundation किया जाता है, जिससे की ये आसानी से पता चल जाता है की consumer को carrier इस्तमाल करने का कितना pay करना होता है. अब GPRS customers की connection time भले ही कुछ घंटे क्यूँ न हो, लेकिन उन्हें केवल pay करना होता है reasonably low connection value.

Brief Get admission to Occasions
GPRS basically प्रदान करता है एक connection cellular customers और far off knowledge networks (e.g.. Fortify TCP/IP, X.25 और दुसरे networks को), जिससे की cellular customers को प्रदान किया जा सके high-speed wi-fi IP और wi-fi X.25 services and products.

Simple Billing
GPRS packet transmission be offering करता है एक ज्यादा user-friendly billing वो भी circuit switched services and products की billing के तुलना में. Circuit switched services and products की बात करें तब, billing आधारित होती है connection के period के ऊपर. ये उपयुक्त नहीं होती है उन packages के लिए जिनमें bursty visitors होती है. इसमें consumer को pay करना होता है whole airtime को, वो भी idle classes में जब कोई भी packets को भेजा न जाता हो (e.g., जब एक consumer learn करता है एक Internet web page).

वहीँ इसके विपरीत, packet switched services and products में, billing आधारित होता है transmitted knowledge के परिणाम के ऊपर. इसमें consumer की merit यह है की वो भले ही “on-line” होते हैं एक लम्बे समय के लिए लेकिन उन्हें billed किया जाता है transmitted knowledge quantity के आधार पर.

Pace:
एक बहुत ही बड़ी get advantages है GPRS generation की वो be offering करती है upper knowledge fee वो भी GSM की तुलना में. Charges as much as 172 kbps मुमकिन हैं, वहीँ most knowledge charges realistically reach किया जा सकता है beneath maximum prerequisites जिसमें की vary 15 – 40 kbps में होती है.

Packet switched operation:
जहाँ GSM में circuit switched tactics का इस्तमाल होता था, वहीँ GPRS generation इस्तमाल करती हैं packet switching in line वो भी Web के साथ. इससे ज्यादा environment friendly use होता है to be had capability का, और वहीँ ये permit करती है larger commonality वो भी Web tactics.

All the time on connectivity:
GPRS की एक और merit यह है की ये be offering करती है “All the time On” capacity. जब circuit switched tactics का इस्तमाल होता है, fees आधारित होते हैं समय के ऊपर की कितनी देर तक एक circuit का इस्तमाल होता है i.e. कितनी देर तक name चल रही है. वहीँ packet switched generation में fees को हिसाब किया जाता है quantity of information carried के ऊपर जो की services and products supplier’s capability के द्वारा इस्तमाल किया गया होता है. वहीँ, at all times on connectivity मुमकिन होती है.

ज्यादा packages:
Packet switched generation के साथ at all times on connectivity जब mixed होती है upper knowledge charges के साथ, तब इससे ज्यादा probabilities पैदा होती है नए packages के लिए. GPRS के आने से Blackberry जैसे Cellular या PDA का enlargement ज्यादा होने लगा.

वहीँ GPRS की Features को ज्यादा increase करने के लिए, उसमें additional advances किये गए और दूसरी device जिसे की EDGE या Enhanced GPRS, EGPRS को increase किया गया.

GPRS में किस Switching का इस्तमाल किया जाता है?

GPRS generation में Packet Switched Knowledge का इस्तमाल होता है न की circuit switched knowledge का. यह methodology ज्यादा environment friendly इस्तमाल करती हैं to be had capability की. इसका कारण यह है की ज्यादातर knowledge switch happen होती है “bursty” model में. इसमें switch होती है quick peaks में, वहीँ ये adopted होती है breaks के द्वारा जब बहुत ही कम या no task होती है.

एक conventional way के अनुसार एक circuit को completely switched कर दिया जाता था एक explicit consumer के लिए. इन्हें कहा जाता है एक circuit switched mode. Knowledge Switch की “bursty” nature के हिसाब से इसका मतलब है की कुछ ऐसे भी classes होते हैं जब ये किसी भी प्रकार की knowledge elevate नहीं कर रही होती है.इस state of affairs को toughen करने के लिए, total capability को shared कर दिया जाता है a number of customers के बीच में.

इसे प्राप्त करने के लिए, knowledge को break up किया जाता है packets और tags में जिन्हें की insert किया जाता है packet में जिससे की इसे प्रदान किया जा सके vacation spot deal with. Packets वो भी अलग अलग assets से उन्हें transmit किया जाता है hyperlink के माध्यम से. ये तो imaginable नहीं है की knowledge burst वो भी अलग अलग customers के लिए एक ही समय में happen हो, लेकिन total useful resource को proportion कर ऐसे model में, channel, या mixed channels को ज्यादा बेहतर रूप से इस्तमाल किया जा सकता है. इसी way को packet switching कहा जाता है, और ये काफी सारे mobile knowledge programs के core में हुआ करता था, और इस case में GPRS में.

PACKET SWITCHING VS CIRCUIT SWITCHING

अब चलिए जानते हैं की packet switching और Circuit Switching में क्या अंतर हैं.

CIRCUIT SWITCHED MODE PACKET SWITCHED MODE
IMSI connect होती है GPRS connect होती है
Name setup TBF status quo
PDP context activation
Name state (bi-directional) Block switch (uni-directional)
ये Channel की Unique इस्तमाल करती हैं इसमें Channel को proportion किया जाता है customers के बीच में
Calls transparent होती है crowning glory के बाद ये हमेशा on होता है

DIFFERENCE BETWEEN GSM AND GPRS

अब चलिए जानते हैं की GSM और GPRS में क्या अंतर हैं.

GSM GPRS
GSM एक standard-bearer है 2G applied sciences की. GPRS एक improve model है elementary GSM options का. ये permit करती है cellular handset को जिससे की वो download कर सकती हैं a lot upper knowledge velocity वो भी जितनी की common GSM be offering कर सकती हैं.
GSM visitors और signalling follows करती हैं अलग अलग multi-frame construction.
i.e. 51 body MF का इस्तमाल होता है signaling के लिए और 26 body MF का इस्तमाल होता है visitors के लिए.
वहीँ GPRS में visitors और signaling दोनों ही apply करती हैं not unusual multi-frame construction. i.e. 52 body MF का इस्तमाल होता है दोनों signaling और visitors में.
GSM इस्तमाल करती हैं circuit switching visitors GPRS इस्तमाल करती हैं packet switching visitors.
GSM UE मेह्जुद होती है दो states  में ,i.e
IDLE और READY.
वहीँ GPRS UE में तीन states होती हैं,
i.e IDLE, READY और STANDBY.
GSM time slot को allocate किया जाता है दोनों uplink और downlink में. यही कारण है की इन radio useful resource allocation को GSM में Symmetric कहा जाता है. वहीँ GPRS radio useful resource allocation होता है uneven, उदाहरण के लिए, ये मुमकिन है की time slot को allocate करना केवल downlink में, न की uplink में जब एक consumer केवल document को obtain कर रहा होता है.
GSM में location discipline idea का इस्तमाल होता है. वहीँ GPRS में routing discipline idea का इस्तमाल होता है.

GPRS का भविष्य?

अब तक आप ये तो जान ही गए होंगे की GPRS एक बहुत ही the most important step है cellular evolution में, और वहीँ ये खोलता है unending probabilities वो भी utility builders और customers के लिए. GPRS के बाद के generation होंगे या तो EDGE या UMTS (या दोनों).

1. Enhanced Knowledge fee for GSM Evolution (EDGE) : इसमें एक नयी modulation scheme का इस्तमाल होता है जिससे की ये प्रदान करता है as much as 3 times upper throughput (वो भी HSCSD और GPRS के लिए)

2. Common Cellular Telecommunication Machine (UMTS) : एक नयी wi-fi generation जिसमें की नयी infrastructure deployment का इस्तमाल होता है.

आज आपने क्या सीखा

मुझे उम्मीद है की आपको मेरी यह लेख जीपीआरऍस क्या है (What’s GPRS in Hindi) जरुर पसंद आई होगी. मेरी हमेशा से यही कोशिश रहती है की readers को GPRS के विषय में पूरी जानकारी प्रदान की जाये जिससे उन्हें किसी दुसरे websites या web में उस article के सन्दर्भ में खोजने की जरुरत ही नहीं है.

इससे उनकी समय की बचत भी होगी और एक ही जगह में उन्हें सभी data भी मिल जायेंगे. यदि आपके मन में इस article को लेकर कोई भी doubts हैं या आप चाहते हैं की इसमें कुछ सुधार होनी चाहिए तब इसके लिए आप नीच feedback लिख सकते हैं.

यदि आपको यह put up जीपीआरएस की परिभाषा पसंद आया या कुछ सीखने को मिला तब कृपया इस पोस्ट को Social Networks जैसे कि Fb, Twitter और दुसरे Social media websites proportion कीजिये.

Leave a Comment