कंप्यूटर इंजीनियरिंग क्या है और कंप्यूटर इंजीनियर कैसे बने?

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Pc Engineering दो शब्दों से बना है Pc + Engineering. जिसमें कंप्यूटर एक ऐसा self-discipline है जो की Pc और networking से सम्बन्ध रखता है वहीँ Engineering laptop {hardware} से सम्बन्ध रखता है.

Computer Engineering Kya Hai Hindi

ये matter intersection होता है Pc Science और Electric Engineering की. Pc Engineers उन Engineers को कहा जाता है जिन्हें की explicit coaching मिली होती है दोनों {hardware} और instrument में.

ये Pc Engineers कुछ ऐसे merchandise बनाते हैं जिसमें दोनों {Hardware} और Tool की wisdom का इस्तमाल होता है. उदाहरण के लिए cell phone, play stations, laptop और video video games. ये सभी home equipment विगत कुछ वर्षों से बहुत widespread हो रहे हैं. इसलिए इस box की call for काफी तेजी से बढ़ रही है.

कुछ fields जो की बहुत ही distinctive होते हैं Pc Engineering के लिए वो हैं Very Huge Scale Built-in (VLSI) programs, computing {hardware} के लिए और ये एक बहुत ही crucial parts होते हैं computer systems के लिए जैसे की recollections और digital circuitry, साथ में analog circuits और virtual {hardware} भी.

India का पहला Pc Engineer कौन है?

Vijay Pandurang Bhatkar जो की सन 11 October 1946 में पैदा हुए थे. इन्हें आप एक laptop scientist, IT chief और educationalist भी मान सकते हैं.

लेकिन सबसे ज्यादा जिस चीज़ के लिए इन्हें जाना जाता है वो है इनका योगदान Supercomputer को बनाने के लिए. जी हाँ दोस्तों इनका एक बहुत ही बड़ा योगदान रहा है भारत के पहले Supercomputer PARAM में.

India का पहला Engineer कौन हैं?

Mokshagundam Visvesvaraya, ये हैं भारत के सबसे पहले Engineer. इनका जन्म सन 15 September 1861 में  मैसूर (कर्नाटक) के कोलार जिले के चिक्काबल्लापुर तालुक में. उन्हें सन १९५५ में भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से विभूषित किया गया था.

उनके योगदान को देखते हुए भारत में उनका जन्मदिन अभियन्ता दिवस के रूप में मनाया जाता है.

कहाँ और कौन सा वो पहला laptop है जिसे की भारत में स्थापित किया गया?

भारत में सबसे laptop का नाम है HEC- 2M, जिसे की सन 1956 में Indian Statistical Institute, Kolkata में स्थापित किया गया.

भारत के किस school ने सबसे पहली बार laptop science engineering division की स्थापना की थी?

भारत में सबसे पहला Pc Science Enginnering Division शुरू करने वाला Indian Institute of Era, Kanpur है. इसे सन 1963 में स्थापना की गयी थी.

Classes क्या क्या हैं और उनकी Length कितनी है?

यहाँ पर हम Pc Science Engineering की अलग अलग Classes के विषय में जानेंगे और उनके Length के विषय में भी.

Classes 12th के बाद

Pc Science & Engineering के पाठ्यक्रम में pupil को बहुत से विषयों से वाकिब कराया जाता है जिसमें algorithms, programming languages, running programs, database control programs, laptop community, laptop graphics और synthetic intelligence मुख्य हैं.

Pc Science & Engineering की instructional criterion को तीन classes/programmes में बांटा जाता है, जो की कुछ इसप्रकार हैं :

1.  Degree classes जिसमें की polytechnic degree करना पड़ता है जो की Three years period का होता है.

2.  UG classes जिसमें की B.Tech (Bachelor of Era) level करनी होती है और जो की Four years period की होती है.

3.  PG classes जिसमें की M.Tech (Grasp of Era) level करनी होती है और जो की 2 years period की होती है.

इसके अलावा एक और भी upper training होता है जो की है PhD (Physician of Philosophy) level इसमें Pc Engineering के complicated degree की पढाई के साथ साथ analysis पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है.

Pc Science & Engineering की सभी Classes क्या है?

  • Degree in Pc Science and Era
  • Degree in Pc Science and Engineering
  • Bachelor of Era (B.Tech) in Pc Engineering
  • Grasp of Engineering (ME/M.Tech) in Pc Engineering
  • Publish Graduate Degree in Pc Networking
  • Grasp of Philosophy (M.Phill) in Pc Science and Engineering

Specialization (Sub-disciplines)

Pc Science & Engineering की दुसरे vital specialization topics.

  • Pc structure and group
  • Database programs
  • Electronics
  • Working programs
  • Networking
  • Foundations of Pc Methods
  • Java Programming and Web site Design
  • E-Trade & ERP and Multimedia Programs

कंप्यूटर इंजीनियर कैसे बने

ये सवाल अक्सर लोगों के मन में जरुर आता है की इस Pc Engineering Classes की eligibility standards क्या है. चलिए इसके विषय में जानते हैं.

यहाँ मैंने कुछ elementary eligibility standards के विषय में बताया है quite a lot of degree, undergraduate और postgraduate classes के लिए :

1.  10th same old के finishing touch के बाद, आप degree classes करने के लिए eligible हो जाते हैं.

2.  वहीँ आप 12th same old के finishing touch करने के बाद absolutely eligible होते हैं किसी UG (B.Tech) programme को sign up for करने के लिए.

3.  Pc Science & Engineering के box में input करने के लिए, आप या तो degree या UG करना होगा, arithmetic और science का होना obligatory होना होता है और वो भी qualifying exam में.

4.  ठीक वैसे ही PG (M.Tech) programme को sign up for करने के लिए Pc Science & Engineering में B.Tech करना will have to हैं.

5.  वैसे ही PHD Program (Pc Science) करने के लिए M.Tech या B.Tech Stage का होना बहुत जरुरी होता है

Pc Engineer की Task Profile क्या होती है?

चलिए जानते हैं की Pc Engineer बनने के लिए क्या समझ रखनी पड़ती है और साथ में इस Task profile में क्या करनी होती है.

1.  उन्हें Pc Science और Electric Engineering की अच्छी समझ होनी चाहिए जिससे वो ठीक तरीके से उस wisdom का इस्तमाल कर सकें.

2.  उन्हें Virtual Era का ज्ञान होना चाहिए जिससे वो नयी चीज़ें बना सकें, और उन generation में काम कर सकें. इसके अलावा उन्हें laptop networking और laptop programs के विषय में जानना चाहिए.

3.  साथ ही उन्हें laptop {hardware}, design और instrument software को enforce करने की क्षमता होनी चाहिए.

4.  {Hardware} और Tool designs दोनों में उनकी अच्छी talent और wisdom होनी चहिये.

5.  Pc programming की समझ होनी चाहिए, इसके अलावा computing platforms और packages को efficient और environment friendly तरीके से enforce करने की काबिलियत होनी चाहिए.

6.  कोई भी error को analyze कर उसे resolve कर सकने की बुद्धि होनी चाहिये. यूँ कहे की एक बेहतरीन Bother Shooter.

7.  हमेशा newest generation tendencies और inventions से खुद को up to date रखना चाहिए.

Pc Engineers के दो primary profession choices होते है

1) Tool Engineering
2) {Hardware} Engineering.

एक instrument engineers होने के नाते उन्हें take a look at और काम करना होता है laptop techniques, packages, community safety, cell और दुसरे laptop operated units के साथ.

वहीँ {hardware} engineers होने के नाते उन्हें laptop programs और दुसरे सभी computer-related parts के साथ काम करना होता है. साथ में उन्हें Robotics, Aeronautic design, Wi-fi networks, subtle equipments  (यंत्र ) में काम करना होता है.

Pc Engineering के लिए कौन कौन सी Abilities की जरुरत होती है?

चलिए Pc Engineering के लिए जरुरत की सभी Abilities के बारे में जानते हैं.

  • उनमें Crew Paintings की Skill होनी चाहिये.
  • Downside-solving abilities
  • Decision
  • ज्यादा लम्बे समय तक काम करने के क्ष्य्मता होनी चाहिए.
  • Logical और systematic होनी चाहिए
  • Persistence होना बहुत आवश्यक होता है.
  • Analytical thoughts होनी चाहिए

Pc Engineering करने के बाद Applicants के पास क्या Employment Alternatives होती है?

एक बार आपने कोई भी Pc Engineering की Classes कर ली तब अक्सर लोग ये पूछते हैं Classes करने के बाद Candidates के पास क्या Employment Alternatives होती है. तो चलिए ऐसे ही कुछ jobs के विषय में जानते हैं जिन्हें कोई Pc Engineering candidate decide कर सकते हैं.

  • Tool builders
  • Corporations putting in trade programs.
  • Promoting & Mass Conversation
  • Analysis Labs
  • Pc & Era producers
  • Virtual Consulting companies
  • Semiconductor firms
  • Armed Forces
  • Railways
  • Govt
  • Instructional Establishments
  • Trade Enterprises

Pc Science और Pc Engineering में क्या अंतर है?

जहाँ laptop science offers करती है processing, garage, और communique of information और directions के साथ, वहीँ laptop engineering को आप electric engineering और laptop science का समाहार कह सकते हैं.

इसलिए कोई भी level program को decide करने से पहले आपको अपने personal tastes के बारे में समझना चाहिए, ये मत सोचिये की आपके घर के लोग क्या कहेंगे या आपके दोस्त यस रिश्तेदार क्या सोचेंगे. ये choice आपका खुदका होना चाहिए.

वैसे सुनने में ये दोनों phrases एक समान ही लगते हैं लेकिन असल में ऐसे नहीं होते हैं. इन दोनों के running में काफी फरक होता है. इसलिए लोग इसे समझने में अक्सर गलती करते हैं. इसलिए चलिए इस दोनों के बिच स्तिथ अंतर को चलिए समझते हैं.

Pc science केवल Programming तक ही सीमित नहीं होती :-

सबसे बड़ी जो false impression होती है laptop science की वो ये की लोग सोचते हैं की ये केवल programming ही होता है. लेकिन, ये उससे ज्यादा होती है. Pc science को एक umbrella time period कहना गलत नहीं होगा. क्यूंकि ये Four primary spaces of computing को quilt करती है. ये spaces होते हैं :

  • Concept
  • Programming languages
  • Algorithms
  • Structure

Pc science में, आपको Knowledge और instruction processing के बारे में पढना होता है, और वो कैसे communicated और saved होता है computing units में. इसे पड़ने के बाद आप आसानी से knowledge processing algorithms, symbolic representations, ways को सीख सकते हैं Tool writing करने के लिए, communique protocols, organisation of information in databases, इत्यदि भी सीख सकते हैं.

इसे आसान भाषा में समझें तो, इसमें आपको ये सिखाया जाता है की कैसे Pc या उससे जुडी issues को कैसे resolve करें. कैसे algorithms लिखें और उनकी मदद से कैसे robotically हमारे issues को resolve करें.

जहाँ laptop science की undergraduate school techniques में, छात्रों को vast vary of subjects के विषय में सीखाया जाता है जो की permit करते हैं उन्हें a couple of spaces से चीज़ें सीखने के लिए.

वहीँ graduate research में, एक explicit space में ही focal point किया जाता है. इसलिए आपको अपने लिए सही graduate program का चुनाव करनी चाहिये और साथ में school भी.

Pc Engineering ज्यादा implemented nature की होती है

Pc engineering को आप एक समाहार बोल सकते हैं Pc Science और Electric Engineering की. {Hardware} और Tool नॉलेज को mix करने से अब laptop engineers सभी computing sorts पर काम कर सकते हैं.

वो ये देख सकते हैं की कैसे microprocessors serve as करता है, उन्हें कैसे design और optimize किया जाता है, कैसे knowledge switch होता है, कैसे instrument को लिखा जाता है और compiled किया जाता है अलग अलग {hardware} platforms में.

इसे आसान भाषा में कहें तब, laptop engineering से instrument design और knowledge processing ideas को motion में लाया जाता है. एक laptop engineer accountable होता है instrument को run करने के लिए जिसे की एक laptop scientist के द्वारा create किया गया होता है.

ये दोनों fields laptop science और laptop engineer, एक दुसरे के साथ overlap करते हैं बहुत से circumstances में. जहाँ Pc science principle phase होता है वहीँ Pc Engineer में {hardware} phase होता है. इन दोनों के मिलने से ही कुछ बढ़िया नया बनाया जा सकता है.

किसी Pc Engineer का cell quantity कैसे प्राप्त करे?

Pc Engineer का Cell Numbers ऐसे ही आपको Web में मिल जायेगा. क्यूंकि अक्सर कोई भी engineer ऐसे ही अपना Cell Quantity Public नहीं करता है. बल्कि उन्हें touch करने के लिए आप Fiverr जैसे websites का इस्तमाल कर सकते हैं, जहाँ आपको अपने काम के लिए हजारों के संख्या में Pc Engineers मिल जायेंगे.

Conclusion

मुझे आशा है की मैंने आप लोगों को कंप्यूटर इंजीनियरिंग क्या है के बारे में पूरी जानकारी दी और में आशा करता हूँ आप लोगों को कंप्यूटर इंजीनियर कैसे बने के बारे में समझ आ गया होगा.

यदि आपके मन में इस article को लेकर कोई भी doubts हैं या आप चाहते हैं की इसमें कुछ सुधार होनी चाहिए तब इसके लिए आप नीच feedback लिख सकते हैं. आपके इन्ही विचारों से हमें कुछ सीखने और कुछ सुधारने का मोका मिलेगा.

यदि आपको मेरी यह put up Pc Engineering क्या होता है हिंदी में से आपको कुछ सिखने को मिला हो तब अपनी प्रसन्नता और उत्सुकता को दर्शाने के लिए कृपया इस पोस्ट को Social Networks जैसे कि Fb, Twitter इत्यादि पर percentage कीजिये.

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